One Bar Policy: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (PHHCBA) ने एक कड़ा प्रस्ताव (Resolution) पारित करते हुए ‘सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
19 मार्च 2026 को हुई जनरल हाउस की मीटिंग में यह साफ कर दिया गया कि हाई कोर्ट परिसर में PHHCBA के अलावा किसी दूसरी बार बॉडी को मान्यता नहीं दी जाएगी। PHHCBA इस फैसले की आधिकारिक जानकारी चीफ जस्टिस के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ (UT) प्रशासन को भी भेजेगी।
विवाद की मुख्य वजह: “लॉन्ज और नेमप्लेट”
- विवाद की शुरुआत हाल ही में हुए एक उद्घाटन से हुई।
- घटना: 27 फरवरी को चीफ जस्टिस शील नागू ने एक नए लॉन्ज का उद्घाटन किया था, जिसका नाम “Senior Advocates Association Lounge” रखा गया था।
- PHHCBA की आपत्ति: बार एसोसिएशन का कहना है कि यह नाम गलत है। उन्होंने मांग की है कि:
- लॉन्ज का नाम बदलकर “Senior Advocates Room” किया जाए। वहां लगी उन सभी नेमप्लेट और शिलापट्ट (Plaques) को हटाया जाए जिन पर PHHCBA के पदाधिकारियों के अलावा किसी और के नाम हैं।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- सिर्फ एक एसोसिएशन: हाई कोर्ट में केवल एक ही बार एसोसिएशन (PHHCBA) होगी। किसी भी ‘सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन’ को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी।
- पदाधिकारियों पर पाबंदी: किसी भी अन्य बॉडी के प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी या ट्रेजरर को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- प्रतिनिधित्व (Representation): हाई कोर्ट, सरकार या किसी भी अथॉरिटी के साथ होने वाली मीटिंग्स में केवल PHHCBA की कार्यकारी समिति (Executive Committee) ही वकीलों का प्रतिनिधित्व करेगी।
सीनियर एडवोकेट्स का पक्ष
दूसरी तरफ, एक सीनियर एडवोकेट ने इस विवाद को ‘अनावश्यक’ बताया है। उनका कहना है, “हम हाई कोर्ट बार एसोसिएशन जैसी कोई समानांतर बॉडी नहीं हैं। हम केवल वरिष्ठ वकीलों का एक समूह (Association) हैं। इस विवाद की कोई जरूरत नहीं थी।”
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
- मीटिंग में आगामी बार एसोसिएशन चुनावों के लिए एक चुनाव समिति (Election Committee) का भी गठन किया गया।
- चेयरमैन: सीनियर एडवोकेट रुपेंद्र सिंह खोसला।
- धार: यह प्रस्ताव 100 से अधिक सदस्यों के हस्ताक्षर वाले मांग पत्र (Requisition) पर चर्चा के बाद पास किया गया।

