PIL Crackdown: सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील को उसकी 17 जनहित याचिकाएं (PILs) वापस लेने की अनुमति दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने वकील सचिन गुप्ता को उनकी याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दी। गुप्ता ने अब इन मुद्दों को लेकर पहले संबंधित अधिकारियों (Authorities) के पास जाने का फैसला किया है। यह वही वकील हैं जिन्हें पिछले महीने “फालतू और आधारहीन” याचिकाएं दायर करने के लिए अदालत से कड़ी फटकार मिली थी।
47 याचिकाओं का पहाड़ (The Backstory)
- एडवोकेट सचिन गुप्ता ने कुल 47 अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की थीं। अदालत ने उनके इस ‘रश’ (जल्दबाजी) पर सवाल उठाए हैं।
- पिछली सुनवाई (10 अप्रैल): जब 25 याचिकाएं सुनवाई के लिए आईं, तो कोर्ट ने साफ कहा कि हर बात के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट न दौड़ें। पहले संबंधित सरकारी विभागों को अपनी शिकायत दें। यदि वे समाधान नहीं करते, तब उचित समय पर कोर्ट विचार करेगा।
- ताजा अपडेट: गुरुवार को गुप्ता ने बची हुई 17 याचिकाओं को भी वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
कोर्ट की फटकार: आधी रात को ड्राफ्ट करते हो क्या?
- इस मामले में सबसे चर्चा का विषय वह टिप्पणी रही जो 9 मार्च को चीफ जस्टिस ने की थी। कोर्ट ने गुप्ता द्वारा दायर 5 याचिकाओं को “फालतू” (Frivolous) बताते हुए खारिज कर दिया था।
- अजीबोगरीब मांग: एक याचिका में मांग की गई थी कि इस पर वैज्ञानिक अध्ययन हो कि क्या प्याज और लहसुन में “तामसिक” (नकारात्मक) ऊर्जा होती है।
- CJI की टिप्पणी: चीफ जस्टिस ने चुटकी लेते हुए पूछा था— आधी रात को ये सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या? उन्होंने इन याचिकाओं को पूरी तरह से अस्पष्ट और आधारहीन बताया।
- अन्य याचिकाएं: शराब और तंबाकू उत्पादों में हानिकारक सामग्री को रेगुलेट करने वाली याचिकाओं को भी इसी आधार पर खारिज कर दिया गया था।
जनहित याचिका (PIL) का ‘दुरुपयोग’?
- अदालत का यह रुख जनहित याचिकाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक बड़ा संदेश है।
- प्रक्रिया (The Process): कोर्ट ने स्पष्ट किया कि PIL का मतलब यह नहीं है कि आप सीधे उच्चतम न्यायालय आ जाएं। पहले प्रशासनिक स्तर पर प्रयास होना चाहिए।
- समय की बर्बादी: “फालतू” याचिकाओं से कोर्ट का कीमती समय बर्बाद होता है, जिससे वास्तविक पीड़ितों के मामले लटके रहते हैं।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| याचिकाकर्ता | एडवोकेट सचिन गुप्ता (Petitioner in person)। |
| वापस ली गई PILs | कुल 17 (इससे पहले 25 वापस ली जा चुकी थीं)। |
| कोर्ट का निर्देश | संबंधित अधिकारियों/प्राधिकारियों के पास पहले जाएं। |
| विवादित विषय | प्याज-लहसुन की ऊर्जा, शराब/तंबाकू रेगुलेशन आदि। |
लोकहित बनाम प्रसिद्धि
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के जरिए यह साफ कर दिया है कि जनहित याचिका (PIL) एक पवित्र उपकरण है जिसे केवल गंभीर जनहित के मुद्दों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए। प्याज-लहसुन जैसे विषयों पर वैज्ञानिक शोध की मांग करना या बिना प्रशासनिक प्रयास के दर्जनों याचिकाएं दायर करना न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ माना गया है।

