Plastic Warning Row: सुप्रीम कोर्ट ने प्लास्टिक और PET बोतलों में बिकने वाले पानी, चीनी और नमक पर “माइक्रो/नैनो प्लास्टिक” की चेतावनी लिखने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने ‘PET पैकेजिंग एसोसिएशन फॉर क्लीन एनवायरमेंट’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के फरवरी 2026 के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनता को जागरूक करने के लिए इस तरह की चेतावनी प्रदर्शित करने में कुछ भी गलत नहीं है।
चेतावनी क्या होगी? (The Mandatory Label)
- मद्रास हाई कोर्ट ने FSSAI को निर्देश दिया था कि वह एक नोटिफिकेशन जारी करे।
- बोतलबंद पानी: सभी प्लास्टिक/PET बोतलों पर बोल्ड और लाल रंग के अक्षरों में लिखा होना चाहिए— “इस पानी में माइक्रो/नैनो प्लास्टिक हो सकते हैं” (This water may contain micro/nano plastics)।
- चीनी और नमक: प्लास्टिक पैकेट में बिकने वाली चीनी और नमक पर भी यही चेतावनी अनिवार्य होगी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी (Judicial Observation)
- जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इस तरह की चेतावनी से जनता में ‘पैनिक’ (घबराहट) पैदा हो सकता है, तो बेंच ने कहा, “लोग पहले से ही जागरूक हो रहे हैं और प्लास्टिक बोतलों का उपयोग कम कर रहे हैं। इस चेतावनी को प्रदर्शित करने में कुछ भी गलत नहीं है।”
- सरकार की सुस्ती: “हो सकता है कि सरकार इस मामले में ढुलमुल रवैया अपना रही हो, लेकिन हाई कोर्ट इस पर बहुत स्पष्ट है क्योंकि रिपोर्ट्स में माइक्रो प्लास्टिक की मौजूदगी के संकेत मिले हैं।”
- कंज्यूमर मार्केट: कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यह एक ‘कंज्यूमर-ड्रिवेन’ मार्केट है और लोगों को यह जानने का पूरा हक है कि वे क्या उपभोग कर रहे हैं।
माइक्रो प्लास्टिक का खतरा (Health Concerns)
यह आदेश हालिया वैज्ञानिक शोधों के आधार पर आया है जिनमें पाया गया है कि प्लास्टिक बोतलों में रखे पानी में प्लास्टिक के सूक्ष्म कण (Micro/Nano plastics) घुल जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। हाई कोर्ट ने FSSAI को निर्देश दिया है कि वह सभी निर्माताओं को इस नियम का सख्ती से पालन करने के लिए कहे।
कार्यवाही के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| विषय | विवरण |
| याचिकाकर्ता | PET पैकेजिंग एसोसिएशन (प्लास्टिक निर्माता संघ)। |
| कोर्ट का रुख | हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार। |
| चेतावनी का स्वरूप | बोल्ड अक्षर, लाल रंग (प्रमुखता से दृश्य)। |
| नतीजा | याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली और अब वे फिर से हाई कोर्ट का रुख करेंगे। |
निष्कर्ष: स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि न्यायपालिका अब वाणिज्यिक हितों (Commercial Interests) से ऊपर जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। यदि यह नियम लागू होता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहाँ प्लास्टिक पैकेजिंग पर इस तरह की स्वास्थ्य चेतावनी अनिवार्य है।

