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Police Arrest Guideline: गिरफ्तारी अब “पहला कदम” नहीं, बल्कि “आखिरी उपाय” है…लोगों को दी सुप्रीम शक्ति, पढ़ें

Police Arrest Guideline: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35 के तहत गिरफ्तारी की शक्ति की व्याख्या करता है।

मूल संदेश सुप्रीम अदालत ने विस्तार से समझाया

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी पुलिस का विवेकाधिकार है, कोई अनिवार्य प्रक्रिया नहीं। इसका मूल संदेश बहुत साफ है। गिरफ्तारी अधिकार है, लेकिन अनिवार्य नहीं; और यह अंतिम उपाय (last resort) होना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 7 वर्ष तक की सजा वाले अपराधों में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस को बीएनएसएस, 2023 की धारा 35(3) के तहत पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।

गिरफ्तारी पुलिस का विवेकाधिकार है

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी पुलिस का विवेकाधिकार है, कोई अनिवार्य प्रक्रिया नहीं। कोर्ट ने दोहराया कि गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब वह बिल्कुल आवश्यक हो और बिना हिरासत के जांच संभव न हो। न्यायालय ने यह भी कहा कि धारा 35(1)(b) के तहत गिरफ्तारी की शर्तों का सख्ती से पालन जरूरी है और पुलिस को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे। कोर्ट के अनुसार, नोटिस देना सामान्य नियम है जबकि गिरफ्तारी एक अपवाद, ताकि नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुरक्षित रह सके।

आइए इसे सरल और सटीक बिंदुओं में समझते हैं

  1. गिरफ्तारी “सुविधा” नहीं, “जरूरत” होनी चाहिए

धारा 35(6) सहपठित 35(1)(b) के तहत पुलिस को गिरफ्तारी की शक्ति है, लेकिन यह सिर्फ पूछताछ के लिए किसी को पकड़ लेने का अधिकार नहीं देता। पुलिस अधिकारी को खुद संतुष्ट होना होगा कि: अपराध की अधिकतम सजा 7 वर्ष तक है, और बिना हिरासत में लिए जांच प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ सकती।

  1. गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं, विवेकाधीन (Discretionary) है

अदालत ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी केवल एक कानूनी विवेकाधिकार है, जो जांच में सहायता के लिए है। इसे अनिवार्य कदम नहीं माना जाएगा।

  1. “Necessity Test” जरूरी

गिरफ्तारी से पहले पुलिस अधिकारी को खुद से पूछना होगा कि क्या गिरफ्तारी सचमुच जरूरी है?, अगर नहीं, तो गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।

  1. धारा 35(3) का नोटिस ही सामान्य नियम

7 वर्ष तक की सजा वाले मामलों में पहले नोटिस जारी करना नियम (Rule) है। सीधे गिरफ्तारी करना अपवाद (Exception) है।

  1. गिरफ्तारी अंतिम विकल्प

यदि धारा 35(1)(b) की शर्तें मौजूद हों, तब भी गिरफ्तारी तभी होगी जब वह “absolutely warranted” यानी बिल्कुल आवश्यक हो।

  1. नोटिस के बाद गिरफ्तारी, एक अपवाद

धारा 35(6) के तहत, नोटिस देने के बाद गिरफ्तारी रूटीन कार्यवाही नहीं, बल्कि एक विशेष परिस्थिति है। पुलिस को बहुत सावधानी और संयम से यह शक्ति प्रयोग करनी होगी।

यह है BNSS, 2023 का उद्देश्य

मनमानी गिरफ्तारी रोकना और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना। गिरफ्तारी अब “पहला कदम” नहीं, बल्कि “आखिरी उपाय” है।

यह कहा एमिकस क्यूरी

एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा, धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना अनिवार्य है और केवल गिरफ्तारी के कारणों को दर्ज करके इसे टाला नहीं जा सकता। पीठ ने कहा, यह कहना पर्याप्त है कि गिरफ्तारी के बिना भी जांच जारी रह सकती है।

IN THE SUPREME COURT OF INDIA
EXTRAORDINARY APPELLATE JURISDICTION MA NO.2034 OF 2022 IN MA NO. 1849 OF 2021
IN SPECIAL LEAVE PETITION (CRL.) NO. 5191 OF 2021, MA No. 2035 of 2022
IN SPECIAL LEAVE PETITION (CRL.) NO. 5191 of 2021

SATENDER KUMAR ANTIL… PETITIONER
VERSUS CENTRAL BUREAU OF INVESTIGATION AND ANR.

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