Delhi Police: फरवरी 2020 दंगों से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस कमिश्नर से कहा है कि जब कोई पुलिस अफसर कोर्ट में गवाही के लिए बुलाया जाए, तो उस दिन उसे कोई दूसरी ड्यूटी न दी जाए, जब तक कि वह बेहद जरूरी न हो।
दयालपुर थाने में दर्ज केस पर सुनवाई
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) परवीन सिंह इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। यह केस दयालपुर थाने में दर्ज हुआ था और अब इसमें अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही चल रही है। कोर्ट ने 4 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने कोर्ट में पेश न होने की अर्जी दी थी। उन्होंने कहा कि 1 से 10 जुलाई तक उन्हें भारत मंडपम में पहले से तय ड्यूटी पर लगाया गया है। कोर्ट ने कहा कि 30 अप्रैल को ही आईओ को पेशी से छूट दी गई थी, जिससे अभियोजन पक्ष के पास उन्हें समय पर सूचना देने का पूरा मौका था। आईओ भी अपने सीनियर अफसरों को बता सकते थे कि उन्हें कोर्ट में पेश होना है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
कोर्ट ने कहा- पहले से है आदेश, फिर भी ड्यूटी लगाई गई
जज ने कहा, मैं पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी उस स्थायी आदेश से अवगत हूं, जिसमें कहा गया है कि जब कोई पुलिस अफसर कोर्ट में गवाही के लिए बुलाया जाए, तो उसे उस दिन कोई नियमित या वैकल्पिक ड्यूटी न दी जाए, जब तक कि वह बेहद जरूरी न हो या उस अफसर की कोई खास विशेषज्ञता उस दिन जरूरी न हो। जज ने कहा कि इसके बावजूद, जब साफ तौर पर बताया गया था कि आईओ को पेश होना है, तब भी उनकी गैरहाजिरी की अर्जी भेजी गई।
तीन आरोपी जेल में, फिर भी सुनवाई नहीं हो सकी
कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि इस मामले में तीन आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और तीन महीने बाद उनकी पेशी हुई थी। इसके बावजूद, दोनों तारीखें बिना किसी ठोस सुनवाई के खराब हो गईं। कोर्ट ने कहा कि इस केस में सिर्फ दो गवाहों की गवाही बाकी है, जिनमें से एक आईओ हैं। ऐसे में उनकी गैरहाजिरी और भी परेशान करने वाली है।
कमिश्नर को फिर से निर्देश देने को कहा
कोर्ट ने कहा, इन हालात में यह मामला पुलिस कमिश्नर के संज्ञान में लाया जा रहा है ताकि वे फिर से इस पर गौर करें और जरूरी निर्देश जारी करें कि जब तक बहुत जरूरी न हो, कोर्ट में गवाही के लिए बुलाए गए पुलिस अफसरों को उस दिन कोई दूसरी ड्यूटी न दी जाए।

