Supreme Court View
PUBLIC SERVANTS Complaint : सार्वजनिक सेवकों (Public Servants) के खिलाफ मनगढ़ंत और फर्जी शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है।
यह निर्देश में किया स्पष्ट
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए हलफनामा (Affidavit) देना अनिवार्य होगा।
यह है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारी पर ड्यूटी के दौरान अपराध करने का आरोप लगाता है, तो उसे शपथ पत्र के साथ अपनी बात रखनी होगी।
यह रहा अदालत का तर्क
- समानता का नियम: जब न्यायिक अधिकारियों (Judges) के खिलाफ शिकायत के लिए हलफनामा जरूरी है, तो सरकारी अफसरों के लिए अलग नियम क्यों?
- फर्जीवाड़े पर रोक: इस कदम का मुख्य उद्देश्य झूठी, तुच्छ और परेशान करने वाली शिकायतों को फिल्टर करना है।
- संतुलन जरूरी: कोर्ट का मानना है कि भ्रष्ट अधिकारियों को सजा देना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी ईमानदार अफसरों को कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग से बचाना भी है।
मजिस्ट्रेट के पास खारिज करने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) की धारा 175(3) के तहत, यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि शिकायत पूरी तरह से निराधार है, तर्कहीन या बेतुकी है, या प्रथम दृष्टया कोई अपराध नहीं बनता है, तो मजिस्ट्रेट ऐसी शिकायत को खारिज कर सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यह फैसला मनमाना नहीं होना चाहिए और इसके पीछे ठोस कारण होने चाहिए।
मामला क्या था
यह निर्देश केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आया, जिसमें तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में FIR दर्ज करने की बात कही गई थी।





