Questionable FIR: सुप्रीम कोर्ट ने जी राजस्थान और ज़ी 24 घंटा के पूर्व चैनल हेड आशीष दवे के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली (Extortion) की FIR को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां
- इंस्टाग्राम से तुलना: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने FIR की गुणवत्ता पर तंज कसते हुए कहा, “इस FIR से बेहतर तो इंस्टाग्राम स्टोरीज होती हैं। कोर्ट ने इस दौरान पुलिस और शिकायतकर्ता (Zee Media) को कड़ी फटकार लगाई।
- जेम्स बॉन्ड मूवी: कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या यह कोई जेम्स बॉन्ड की फिल्म है? पुलिस ने शिकायतकर्ता के लिए रेड कार्पेट बिछा दिया। आपने इसमें ‘मर्डर’ की धारा क्यों नहीं लिख दी?”
- भेदभाव का आरोप: कोर्ट ने कहा कि अगर कोई आम नागरिक ऐसी ‘अस्पष्ट’ शिकायत लेकर जाता, तो पुलिस उसे भगा देती। सिर्फ इसलिए कि शिकायतकर्ता एक प्रभावशाली एजेंसी है, FIR दर्ज कर ली गई।
मामला क्या था?
- जी मीडिया ने जयपुर में आशीष दवे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
- आरोप: आशीष दवे ने चैनल हेड रहते हुए लोगों को ‘नेगेटिव न्यूज़’ दिखाने की धमकी देकर पैसे वसूले।
- कंपनी का दावा: कंपनी ने कहा कि दवे ने बिना अनुमति के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नकारात्मक कंटेंट प्रसारित किया।
- हाई कोर्ट का रुख: नवंबर 2025 में राजस्थान हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने से मना कर दिया था, यह कहते हुए कि मामले की जांच जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को पलटते हुए कहा कि FIR में कोई ठोस तथ्य नहीं हैं। कोर्ट ने माना कि शिकायत पूरी तरह अस्पष्ट (Vague) है। इसमें आपराधिक जांच को सही ठहराने के लिए जरूरी सबूतों का अभाव है। यह प्रभावशाली लोगों के दबाव में दर्ज किया गया एक केस प्रतीत होता है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने न केवल केस को खत्म किया, बल्कि पुलिस को यह संदेश भी दिया कि वे प्रभाव में आकर बिना ठोस आधार के FIR दर्ज न करें।

