HomeArticlesSCBA seminar: "हम हिंदी न जानने के कारण अलग-थलग नहीं पड़ना चाहते":...

SCBA seminar: “हम हिंदी न जानने के कारण अलग-थलग नहीं पड़ना चाहते”: जस्टिस नागरत्ना का भाषा विवाद पर बड़ा बयान

SCBA seminar: सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बी वी नागरत्ना ने कहा, दक्षिण भारतीय लोग इसलिए अलग-थलग नहीं पड़ना चाहते क्योंकि वे हिंदी नहीं जानते।

हिंदी के उपयोग से जुड़े एक सवाल का जवाब दिया

न्यायाधीश बी वी नागरत्ना ने न्यायपालिका में हिंदी के उपयोग से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारत एक उपमहाद्वीप है और किसी को भी अपनी भाषा को लेकर “बहुत अनन्य” (exclusive) नहीं होना चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि वह राजनीति की बात नहीं कर रही हैं।

जस्टिस ने कहा

  • भाषा अनन्यता से बचें: संविधान की 8वीं अनुसूची में कई भाषाएं हैं, और दक्षिण भारत में कम से कम छह भाषाएं हैं। ऐसे में कोई भी अपनी भाषा को लेकर बहुत अनन्य नहीं हो सकता।
  • दक्षिण को जोड़ती है अंग्रेजी: उन्होंने कहा कि विभिन्न दक्षिण भारतीय राज्यों को जो भाषा जोड़ती है, वह अंग्रेजी है।
  • अलगाव की चिंता: दक्षिण से आने वाली जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “हमें इसमें (भाषा के उपयोग में) किसी प्रकार का संयम (moderation) रखना होगा, क्योंकि हम (दक्षिण भारतीय) हिंदी न जानने के कारण अलग-थलग नहीं पड़ना चाहते हैं। मैं दक्षिण से आकर यह कह रही हूँ।”

CJI सूर्यकांत की टिप्पणी

जस्टिस नागरत्ना की यह टिप्पणी तब आई जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक महिला वकील के सवाल का जवाब दिया, जिन्होंने स्थानीय भाषाओं में निपुण लेकिन अंग्रेजी न जानने वाले वकीलों के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछा था। CJI सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित “WE — (Women Empowerment in Law): on Strength, Struggle and Success” (कानून में महिला सशक्तिकरण: शक्ति, संघर्ष और सफलता पर) विषय पर एक पैनल चर्चा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वह सभी भाषाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास करते हैं और हिंदी राष्ट्रीय भाषा होने के नाते, उन्हें इसे बढ़ावा देने में गर्व महसूस होता है।

CJI सूर्यकांत ने जवाब दिया

“किसी भी भाषा के प्रयोग के लिए हमें संवेदनशील होना होगा। मैं कई बार कोर्ट में वादियों (litigants) और वकीलों को हिंदी में बोल देता हूँ। हमें इस संकोच (inhibition) को खत्म करना है। यह ठीक है कि हमारा प्रोसीजर और कानून इंग्लिश में बना है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं केवल हिंदी, गुजराती, तमिल की बात नहीं कर रहा हूँ, बल्कि मैं स्थानीय बोलियों की बात कर रहा हूँ। हमें न्यायिक प्रणाली में वही भाषा बोलनी चाहिए जो वादी सुनना चाहता है।”

जस्टिस नागरत्ना की महिला वकीलों पर राय

जस्टिस नागरत्ना ने कानूनी पेशे में महिला सशक्तिकरण पर भी बात की:

  • पारिवारिक ताना: उन्होंने कहा कि महिला वकीलों को परिवार से यह ताना (taunt) सुनने को मिलता है: “आप सुबह से शाम तक घर से बाहर रहती हैं। आप घर के कामों, बच्चों पर ध्यान नहीं दे रही हैं, और साथ ही, आप कमा भी नहीं रही हैं।”
  • संस्थागत समर्थन: उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में महिला वकीलों को बनाए रखने के लिए संस्थागत समर्थन आवश्यक है।
  • समान अवसर: वरिष्ठों को केवल घरेलू हिंसा या फैमिली कोर्ट के मामले नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण, जटिल दीवानी और आपराधिक मामले प्रतिभाशाली महिला जूनियर्स को देने चाहिए।
  • सरकारी पदों पर महिला आरक्षण: उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार के तीस प्रतिशत (30%) विधि अधिकारी महिलाएँ होनी चाहिए।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
mist
19 ° C
19 °
19 °
88 %
2.1kmh
40 %
Sat
19 °
Sun
27 °
Mon
33 °
Tue
36 °
Wed
37 °

Recent Comments