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SEXUAL HARASSMENT: दिल्ली मेट्रो में सफर पर बड़ा निर्देश आया…आरोपी महिला यात्री के समीप कर रहा था गलत हरकत

SEXUAL HARASSMENT: दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली मेट्रो के भीतर एक महिला का यौन उत्पीड़न करने वाले व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा है।

कोर्ट ने इस मामले को सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने दोषी मोहम्मद ताहिर द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (लज्जा भंग करने के इरादे से हमला) और 354A (यौन उत्पीड़न) के तहत अपनी सजा को चुनौती दी थी।

“यह राज्य का कर्तव्य है कि वह महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह मामला सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाली महिलाओं के सुरक्षा सरोकारों को उजागर करता है।”
— अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश

क्या था पूरा मामला?

  • घटना: यह शर्मनाक घटना 27 मार्च, 2021 की शाम को दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर साकेत और हौज खास स्टेशनों के बीच चलती ट्रेन में हुई थी।
  • आरोप: मोहम्मद ताहिर ने शिकायतकर्ता महिला के बगल में खड़े होकर अश्लील हरकत (हस्तमैथुन) की और विरोध करने के बावजूद उसके कंधे को छुआ।
  • जनता की प्रतिक्रिया: महिला द्वारा शोर मचाने पर साथी यात्रियों ने हस्तक्षेप किया और आरोपी को ट्रेन से उतरने पर मजबूर किया। उसे ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन के कंट्रोलर रूम में पकड़ा गया।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

  • अदालत ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के संदर्भ में इस फैसले की शुरुआत की और ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पूरी तरह सही ठहराया।
  • तर्कों को खारिज किया: आरोपी के वकील ने दलील दी थी कि महिला ने अलग-अलग बयानों में उतरने वाले स्टेशनों के नाम (INA और ग्रीन पार्क) अलग बताए थे, इसलिए उसकी गवाही अविश्वसनीय है। कोर्ट ने इसे ‘रेड हेरिंग’ (ध्यान भटकाने वाला) तर्क बताते हुए कहा कि स्टेशनों के नाम में भ्रम होना केस के लिए घातक नहीं है।
  • ठोस सबूत: जज ने कहा कि पीड़िता की गवाही को इमरजेंसी बटन दबाने, अधिकारियों के आने और आरोपी की गिरफ्तारी जैसे घटनाक्रमों से पूरी तरह समर्थन मिलता है।
  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश का समर्थन किया जिसमें कहा गया था कि भीड़भाड़ वाली मेट्रो जैसे सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध न केवल शारीरिक बल्कि गहरा मनोवैज्ञानिक आघात (Psychological Trauma) पहुंचाते हैं।

अंतिम फैसला

अदालत ने मोहम्मद ताहिर की अपील खारिज करते हुए आदेश दिया कि उसे ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई शेष सजा काटने के लिए तुरंत हिरासत में लिया जाए। कोर्ट ने मेट्रो प्रणाली के भीतर मजबूत सुरक्षा उपायों और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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