Couple standing on road
Sexual Relation: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा, एक कानूनी तौर पर विवाहित, परिपक्व महिला को शादी के वादे पर यौन संबंध के लिए प्रेरित किया जाना ‘अकल्पनीय’ है।
दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली FIR रद्द
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली FIR को रद्द करते हुए जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने टिप्पणी की, “जब एक परिपक्व, विवाहित महिला शादी के वादे पर यौन संबंध बनाती है और लंबे समय तक ऐसा करती रहती है, तो यह विवाह संस्था के प्रति लापरवाही है, न कि IPC की धारा 90 के तहत किसी गलतफहमी पर आधारित सहमति।”
कोर्ट: एक साल से अधिक चला संबंध, FIR बदले हालात की प्रतिक्रिया
कोर्ट ने कहा कि FIR और 164 CrPC बयान को मान भी लिया जाए, तब भी यह मानना कठिन है कि एक विवाहित महिला शादी के वादे से यौन संबंध में फंस सकती है।
“लगता है कि प्रोसिक्यूट्रिक्स लंबे समय तक संबंध में रही, लेकिन जब उसकी छोटी बहन की उसी व्यक्ति से सगाई हो गई, तो भावनात्मक आघात में आकर यह मामला दर्ज किया।
यह था मामला?
FIR में IPC की धाराएं 376(2)(n), 406, 506, 509/34 लगाई गई थीं। प्रोसिक्यूट्रिक्स वकील है, शादीशुदा है और पति से विवाद चल रहा था। आरोप था कि आरोपी—जो खुद भी वकील है—ने शादी का वादा कर उससे संबंध बनाए और परिवार ने भी इसे बढ़ावा दिया। बाद में उसी व्यक्ति की सगाई उसकी छोटी बहन से करा दी गई।
कोर्ट ने कहा
“एक वकील होने के नाते प्रोसिक्यूट्रिक्स जानती थी कि उसकी वैध शादी चल रही है। ऐसे में आरोपी द्वारा शादी का वादा कर उसे संबंध के लिए ‘प्रेरित’ करने का सवाल ही नहीं उठता।”
कोर्ट ने रिकॉर्ड देखकर क्या पाया?
हाई कोर्ट ने निम्न मुख्य निष्कर्ष दर्ज किए कि प्रोसिक्यूट्रिक्स 35 वर्षीय, विवाहित और 8 साल के बच्चे की मां है। वह शिक्षित है—2019 में LLB पूरा कर वकालत कर रही है। उसने अपने पिता, मां, बहन, पति और एक अन्य व्यक्ति पर झूठे आरोप लगाए जो जांच में गलत पाए गए। आरोपी और उसके पिता, प्रोसिक्यूट्रिक्स के 498A मामले में उसके वकील थे। FIR के पहले बयान में उसने कहा था कि परिवार व आरोपी के पिता ने उसे शादी के वादे पर संबंध बनाने को प्रोत्साहित किया। FIR में रेप की घटना की कोई तारीख या समय नहीं था। 164 CrPC बयान में पहली बार उसने 21.07.2020–12.10.2020 का समय बताकर ‘शादी का वादा’ कहा।






