Thursday, October 1, 2026
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CYBER FRAUD ACCOUNTS: साइबर फ्रॉड मामलों में जांच एजेंसियां बैंक अकाउंट ‘फ्रीज़’ नहीं कर सकतीं…बॉम्बे HC की टिप्पणी

CYBER FRAUD ACCOUNTS: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, जांच एजेंसियां साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में किसी बैंक खाते को डेबिट फ्रीज़ नहीं कर सकतीं।

केवल संदिग्ध रकम पर लियन लगाएं

BNSS—यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता—के तहत एजेंसी केवल संदिग्ध रकम पर लियन लगा सकती है, लेकिन पूरे खाते को फ्रीज़ करना कानूनन गलत है। नागपुर बेंच के जस्टिस अनिल पंसारे और जस्टिस राज वाकोड़े की पीठ ने यह फैसला सुनाया। यह आदेश उन सात लोगों की याचिकाओं पर आया जिनके बैंक खातों को BNSS की धारा 106 के तहत ‘डिपोजिट फ्रीज़’ कर दिया गया था, क्योंकि कथित साइबर फ्रॉड की रकम उनके खातों में आई थी। BNSS की धारा 106 जांच एजेंसियों को चोरी या अपराध से जुड़े संदिग्ध संपत्ति को जब्त करने का अधिकार देती है, लेकिन…

लियन का मतलब—खाता चालू रहेगा, सिर्फ संदिग्ध रकम नहीं निकलेगी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लियन लगाने पर सिर्फ वही रकम ब्लॉक होती है, जबकि खाता सामान्य रूप से चलता रहता है। अक्सर साइबर फ्रॉड में किसी खाते का उपयोग केवल पैसों को आगे भेजने (rerouting) के लिए किया जाता है, और खाता धारक को इसकी जानकारी तक नहीं होती।

धारा 107 कहती है—संपत्ति अटैच करने के लिए मजिस्ट्रेट की इजाजत जरूरी

कोर्ट ने कहा कि “कानून बिल्कुल स्पष्ट है—धारा 106 के तहत जांच एजेंसी को किसी खाते को अटैच या डेबिट फ्रीज़ करने का अधिकार नहीं है।” इस आधार पर पुलिस द्वारा जारी सभी डेबिट फ्रीज़ आदेश रद्द कर दिए गए।

केंद्र के साइबर फ्रॉड मैनेजमेंट सिस्टम का भी हवाला

कोर्ट ने गृह मंत्रालय के Indian Cybercrime Coordination Centre (I4C) द्वारा जारी ‘Citizen Financial Cyber Frauds Reporting and Management System’ का भी हवाला दिया। इस सिस्टम में भी साफ निर्देश है कि— “बैंक विवादित राशि पर लियन लगा सकते हैं, लेकिन खाते को डेबिट फ्रीज़ नहीं कर सकते।”

कुछ बैंक बिना मांगे ही अकाउंट फ्रीज़ कर देते हैं—HC

हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार जांच एजेंसी की चिट्ठी में अकाउंट फ्रीज़ करने का निर्देश नहीं होता, फिर भी बैंक खुद ही खाते को फ्रीज़ कर देते हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया— “यह रहस्य है कि बैंक ने अपने-आप खाते को फ्रीज़ करने का फैसला कैसे ले लिया।” पीठ ने पीड़ित खाताधारकों को यह भी अनुमति दी कि वे चाहें तो उचित कानूनी कार्यवाही के जरिए मुआवजे की मांग कर सकते हैं।

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