South Korea: दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल गुरुवार को सियोल की एक अदालत में पेश हुए, जहाँ उनके खिलाफ ‘विद्रोह’ (Rebellion) के आरोपों पर फैसला सुनाया जाना है।
यह मामला दिसंबर 2024 में उनके द्वारा लगाए गए अल्पकालिक मार्शल लॉ (Martial Law) से जुड़ा है, जिसने देश को दशकों के सबसे बड़े राजनीतिक संकट में धकेल दिया था। 3 दिसंबर 2024 को तत्कालीन राष्ट्रपति यून ने अचानक मार्शल लॉ घोषित कर दिया था और संसद (National Assembly) को घेरने के लिए सेना भेज दी थी।
क्या है मुख्य आरोप?
- विद्रोह का आरोप: यह उनके खिलाफ सबसे गंभीर आरोप है।
- सजा की मांग: विशेष अभियोजक ने यून के लिए मृत्युदंड की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि उनकी कार्रवाई ने देश के लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा किया था।
सजा को लेकर क्या है विशेषज्ञों की राय?
ज्यादातर विश्लेषकों का अनुमान है कि यून को उम्रकैद की सजा हो सकती है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं। उनके मार्शल लॉ के प्रयास में कोई जनहानि (Casualties) नहीं हुई थी। दक्षिण कोरिया ने 1997 के बाद से किसी भी कैदी को फांसी नहीं दी है, जिसे व्यवहारिक रूप से मृत्युदंड पर रोक माना जाता है।
कोर्ट के बाहर समर्थकों और विरोधियों का हंगामा
सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के बाहर भारी तनाव का माहौल देखा गया। जब यून को लेकर जेल की बस गुजरी, तो उनके समर्थकों ने नारेबाजी की, वहीं पास ही मौजूद उनके विरोधियों ने उन्हें फांसी देने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
पूरा घटनाक्रम: मार्शल लॉ से जेल तक
- 3 दिसंबर 2024: मार्शल लॉ की घोषणा। करीब 6 घंटे बाद सांसदों ने सैन्य घेराबंदी तोड़कर सर्वसम्मति से इसे हटाने के लिए मतदान किया।
- 14 दिसंबर 2024: सांसदों द्वारा महाभियोग (Impeachment) चलाए जाने के बाद उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया।
- अप्रैल 2025: संवैधानिक न्यायालय ने उन्हें औपचारिक रूप से राष्ट्रपति पद से हटा दिया।
- जुलाई 2025: यून को गिरफ्तार किया गया और तब से वे हिरासत में हैं।
अन्य दोषियों की स्थिति
अदालत यून के साथ 7 अन्य पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारियों पर भी फैसला सुनाएगी, जिसमें पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून शामिल हैं। पिछले महीने, यून को गिरफ्तारी का विरोध करने और कैबिनेट मीटिंग के बिना मार्शल लॉ लागू करने के लिए पहले ही 5 साल की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को भी इस मामले में 23 साल की सजा मिली है।

