Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने लेखा महानियंत्रक (A&E), ओडिशा के कार्यालय में बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली (Biometric Attendance System – BAS) पर मुहर लगा दी है।
ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला रद्द
हाल ही में केंद्र सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसके तहत बायोमीट्रिक उपस्थिति को लागू की थी। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों से पूर्व परामर्श न लेने मात्र से यह निर्णय अवैध नहीं ठहराया जा सकता। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने ओडिशा हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसने BAS लागू करने के आदेश को निरस्त कर दिया था। पीठ ने कहा, “जब बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम का उद्देश्य सभी हितधारकों के हित में है, तो केवल इसलिए कि कर्मचारियों से पहले परामर्श नहीं लिया गया, इसे अवैध नहीं कहा जा सकता।”
विवाद की पृष्ठभूमि
विवाद तब शुरू हुआ जब विभाग ने 1 जुलाई, 22 अक्टूबर और 6 नवंबर 2013 को परिपत्र जारी कर स्टाफ के लिए BAS लागू किया। कर्मचारियों ने इसे केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में चुनौती दी थी, यह कहते हुए कि निर्णय उनकी सहमति के बिना और “स्वामी का कंप्लीट मैनुअल ऑन एस्टैब्लिशमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेशन” के प्रावधानों के विरुद्ध लिया गया। CAT ने कर्मचारियों की याचिका खारिज कर दी, पर हाईकोर्ट ने 2014 में इसे स्वीकार कर लिया था।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की दलील
केंद्र ने तर्क दिया कि “स्वामी मैनुअल” में ऐसा कोई नियम नहीं है, जो BAS लागू करने से रोकता हो। कर्मचारियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया कि BAS उनके हित में है। इस पर अदालत ने कहा, जब कर्मचारियों को BAS लागू करने पर कोई आपत्ति नहीं है, तो विवाद की कोई गुंजाइश नहीं बचती। विभाग इसे लागू करने के लिए स्वतंत्र है। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने को वैध ठहराया।

