Supreme Court: राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण स्तर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2025 को गहरी चिंता जताई।
AQI स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी हानिकारक
अदालत ने कहा, मास्क पहनना पर्याप्त नहीं है, इसलिए वरिष्ठ वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हों। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब दिल्ली 13 नवंबर 2025 को घने स्मॉग की चादर में लिपटी रही और लगातार तीसरे दिन वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई।विशेषज्ञों के अनुसार, ‘गंभीर’ श्रेणी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी हानिकारक है, जबकि सांस या हृदय से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह अत्यंत खतरनाक साबित हो सकता है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने सख्त लहजे में कहा,
“आप सभी यहां शारीरिक रूप से क्यों उपस्थित हैं? हमारे पास वर्चुअल सुनवाई की सुविधा है। कृपया उसका उपयोग करें। यह प्रदूषण स्थायी नुकसान पहुंचाएगा। केवल मास्क लगाना पर्याप्त नहीं है। हम इस पर मुख्य न्यायाधीश से भी चर्चा करेंगे।”
पराली जलाने पर नियंत्रण किया जाए
राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं अब भी प्रदूषण का प्रमुख कारण बनी हुई हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 8 बजे बवाना में AQI 460 दर्ज किया गया, जो सबसे अधिक था, जबकि NSIT द्वारका में 216 दर्ज किया गया। शीर्ष अदालत ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को निर्देश दिया था कि वे एक सप्ताह के भीतर पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा पेश करें।
राज्य सरकारों को ठोस नीति और अमल के साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राज्य सरकारों को ठोस नीति और अमल के साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे, ताकि उन्हें क्षेत्र में गिरती वायु गुणवत्ता के लिए जवाबदेह ठहराया जा सके। इस बीच, दिल्ली में इस सीजन पहली बार AQI के ‘गंभीर’ श्रेणी में जाने के बाद राज्य के वकीलों ने अदालत से मामले को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया।

