Trademark Battle: दिल्ली हाई कोर्ट ने मशहूर रेस्टोरेंट चेन ‘SOCIAL’ के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए ‘SOCIAL HOUSE’ ट्रेडमार्क को रजिस्टर से हटाने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने ‘इम्प्रेसैरियो’ (Impresario – जो SOCIAL कैफे चलाती है) की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई के कारोबारी वर्धमान चोकसी के ‘SOCIAL HOUSE’ मार्क को ट्रेडमार्क रजिस्टर से बाहर करने का आदेश दिया। अदालत ने इस मामले में ‘ट्रेडमार्क स्क्वैटिंग’ (Trademark Squatting) के पैटर्न को पकड़ते हुए स्पष्ट किया कि किसी स्थापित ब्रांड के नाम का फायदा उठाने के लिए उसे ब्लॉक करना गैर-कानूनी है।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| मुख्य आदेश | ‘SOCIAL HOUSE’ मार्क को ट्रेडमार्क रजिस्टर से हटाया जाए। |
| वजह | संबंधित क्लास (Class 43) में मार्क का वास्तविक उपयोग नहीं होना। |
| ब्रांड की जीत | SOCIAL कैफे-बार ब्रांड की विशिष्टता और साख को मान्यता मिली। |
| नतीजा | चोकसी द्वारा SOCIAL के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं। |
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘ट्रेडमार्क स्क्वैटिंग’ क्या है?
- अदालत ने वर्धमान चोकसी के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए।
- स्क्वैटिंग (Squatting): कोर्ट ने कहा कि चोकसी का वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध नामों के समान मार्क के लिए आवेदन करना एक सोची-समझी रणनीति है।
- मकसद: ऐसे ट्रेडमार्क को पहले ही रजिस्टर करा लेना ताकि बाद में असली मालिकों को इसे ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। अदालत ने कहा कि ऐसा आचरण ट्रेडमार्क रजिस्टर की पवित्रता को कम करता है।
‘Non-Use’ का कानूनी आधार (कानून की कक्षा)
- अदालत ने ट्रेडमार्क कानून के एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू को स्पष्ट किया।
- उपयोग जरूरी है: यदि कोई ट्रेडमार्क रजिस्टर कराया गया है, तो उसका उसी सेवा (Class) के लिए वास्तविक उपयोग होना चाहिए।
- क्लास 41 बनाम 43: चोकसी ने ‘SOCIAL HOUSE’ को Class 43 (रेस्टोरेंट और कैफे) के लिए रजिस्टर कराया था, लेकिन वह इसका उपयोग केवल अपने नाइट क्लब ‘एस्कोबार’ में इवेंट्स होस्ट करने के लिए कर रहे थे, जो Class 41 (मनोरंजन) के तहत आता है।
- नतीजा: चूंकि Class 43 में कोई वास्तविक रेस्टोरेंट सेवा नहीं दी गई और न ही उपयोग न करने का कोई विशेष कारण (जैसे COVID-19) बताया गया, इसलिए यह मार्क रद्द करने योग्य है।
क्या ‘SOCIAL’ जैसे आम शब्द पर किसी का हक हो सकता है?
- चोकसी का तर्क था कि SOCIAL एक साधारण अंग्रेजी शब्द है और इस पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता। कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
- विशिष्टता (Distinctiveness): भले ही कोई शब्द आम हो, लेकिन अगर निरंतर उपयोग और ब्रांडिंग के जरिए उस उद्योग (जैसे हॉस्पिटैलिटी) में उसने अपनी एक अलग पहचान बना ली है, तो उसे कानूनी संरक्षण मिलेगा।
- सबूत: ‘इम्प्रेसैरियो’ ने 2014 से अपने ‘SOCIAL’ ब्रांड की व्यापक मौजूदगी, कई शहरों में आउटलेट्स और भारी राजस्व के ठोस सबूत पेश किए।
ट्रेडमार्क की सुरक्षा
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक सबक है जो प्रसिद्ध ब्रांडों के मिलते-जुलते नाम रजिस्टर कराकर ‘ब्लैकमेल’ करने या गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। अदालत ने साफ कर दिया कि “Prior Use” (पहले उपयोग) और “Genuine Use” (वास्तविक उपयोग) ही ट्रेडमार्क की लड़ाई में सबसे बड़े हथियार हैं।

