Sunday, September 20, 2026
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Divorce Verdict: 6 लाख एकमुश्त नहीं, अब हर महीने मिलेंगे 10 हजार…ममता देवी केस में यूं बदला मेंटेनेंस का तरीका, पूरा पढ़ें

Divorce Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने ममता देवी बनाम संजय कुमार मामले में तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए भरण-पोषण (Maintenance) के आदेश में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के तलाक के फैसले को सही ठहराया, लेकिन पत्नी को मिलने वाली वित्तीय सहायता के स्वरूप को बदल दिया। कोर्ट का मानना है कि एकमुश्त राशि (Lump sum) के बजाय मासिक भुगतान महिला के भविष्य को अधिक सुरक्षा प्रदान करता है। अदालत ने माना कि वैवाहिक रिश्तों में आई कड़वाहट और लंबे अलगाव के बाद विवाह का पूरी तरह टूट जाना (Irretrievable breakdown) तलाक का ठोस आधार है।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
तलाक का आधारक्रूरता (Cruelty) और परित्याग (Desertion)।
पिछला आदेश₹6 लाख एकमुश्त (Lump sum)।
नया आदेश₹10,000 प्रति माह (आदेश की तारीख से)।
कोर्ट की टिप्पणीनिचली अदालतों के तथ्यों और गवाहों के मूल्यांकन में कोई गलती नहीं पाई गई।

केस का बैकग्राउंड: 2002 से शुरू हुआ विवाद

  • शादी और बच्चे: जोड़े की शादी 2002 में बोकारो (झारखंड) में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं।
  • आरोप-प्रत्यारोप: पत्नी ने दहेज और प्रताड़ना का आरोप लगाया, जबकि पति ने पत्नी के व्यवहार से मानसिक और शारीरिक संकट (Cruelty) होने की बात कही।
  • बच्चों की गवाही: इस मामले में एक निर्णायक मोड़ तब आया जब बेटे ने अपनी माँ के खिलाफ गवाही दी और खुद पत्नी ने बच्चों को साथ रखने में अनिच्छा जताई।

कोर्ट का तर्क: रिश्ता अब जुड़ना नामुमकिन

  • अदालत ने तलाक को बरकरार रखने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर गौर किया।
  • तथ्यों की पुष्टि: फैमिली कोर्ट और हाई कोर्ट ने गवाहों और सबूतों के आधार पर ‘क्रूरता’ (Cruelty) और ‘परित्याग’ (Desertion) को सही पाया था।
  • लंबा अलगाव: जोड़ा 2018 से अलग रह रहा था। कोर्ट ने कहा, “इतने लंबे समय तक अलग रहना यह दर्शाता है कि वैवाहिक बंधन अब मरम्मत से परे टूट चुका है।”

मेंटेनेंस में बदलाव: भविष्य की सुरक्षा

  • सबसे बड़ा बदलाव भरण-पोषण की राशि को लेकर किया गया।
  • फैमिली कोर्ट का आदेश: पहले ₹6 लाख की एकमुश्त राशि देने का आदेश दिया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट का संशोधन: कोर्ट ने कहा कि महिला की निरंतर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए ₹10,000 प्रति माह का भुगतान करना अधिक उचित है।
  • तर्क: एकमुश्त राशि खत्म हो सकती है, लेकिन मासिक भत्ता जीवन यापन के लिए एक ‘सस्टेन्ड सपोर्ट’ (Sustained Support) की तरह काम करता है।

व्यावहारिक न्याय (Practical Justice)

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि तलाक के मामलों में बच्चों की गवाही और लंबे अलगाव की अवधि बहुत मायने रखती है। साथ ही, मेंटेनेंस को मासिक भत्ते में बदलकर कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि तलाक के बाद भी महिला की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी रहे।

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