UP News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रयागराज के बामरौली स्थित एयरफोर्स स्कूल को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ नहीं माना जा सकता।
बहुमत से इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही हुआ
जस्टिस अभय एस ओका की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने 2:1 के बहुमत से इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने भी कहा था कि यह स्कूल ‘राज्य’ की परिभाषा में नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि यह स्कूल सरकारी नियंत्रण में नहीं आता, इसलिए इसके कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों की सेवाएं नियमित नहीं की जा सकतीं।
IAF हेडक्वार्टर का नियंत्रण साबित नहीं हुआ
जस्टिस ओका ने कहा कि यह साबित नहीं किया गया कि इंडियन एयरफोर्स (IAF) हेडक्वार्टर का स्कूल के प्रबंधन पर कोई नियंत्रण है। भले ही कुछ फंड आर्मी वेलफेयर सोसाइटी से मिले हों, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि स्कूल पर राज्य या IAF का सर्वव्यापी नियंत्रण है।
निजी संस्था द्वारा संचालित है स्कूल
कोर्ट ने कहा कि यह स्कूल इंडियन एयरफोर्स एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसाइटी द्वारा चलाया जाता है, जो सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड एक निजी संस्था है। यह संस्था किसी भी वैधानिक नियमों के तहत संचालित नहीं होती।
निजी अनुबंध का मामला, रिट याचिका नहीं बनती
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता शिक्षकों और स्कूल के बीच का संबंध एक निजी अनुबंध का मामला है। अगर अनुबंध का उल्लंघन हुआ भी हो, तो यह पब्लिक लॉ का विषय नहीं बनता। इसलिए रिट याचिका दाखिल करने का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने दोनों शिक्षकों की अपील खारिज कर दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि वे अन्य कानूनी उपायों का सहारा ले सकते हैं।
अल्पमत में रहे जस्टिस अमानुल्लाह ने जताई असहमति
बेंच के तीसरे जज जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि यह स्कूल पब्लिक फंक्शन यानी शिक्षा देने का काम करता है और इसमें एयरफोर्स के अधिकारी गवर्निंग बॉडी में एक्स-ऑफिसियो पदों पर होते हैं। इससे यह साबित होता है कि स्कूल पर IAF का प्रभावी नियंत्रण है। उन्होंने कहा कि यह स्कूल एयरफोर्स के उन कर्मचारियों के बच्चों के लिए है, जो दूरदराज के इलाकों में तैनात रहते हैं। ऐसे में यह सरकारी उद्देश्य की पूर्ति करता है। उन्होंने कहा कि स्कूल IAF बेस के अंदर संचालित होते हैं और सरकारी संसाधनों का लाभ उठाते हैं। इसलिए इस पर रिट जुरिस्डिक्शन लागू होनी चाहिए थी।
मामला क्या था?
यह केस दो पूर्व शिक्षकों – दिलीप कुमार पांडे और संजय कुमार शर्मा – की अपील से जुड़ा था। दोनों को स्कूल से निकाला गया था और उन्होंने इसे चुनौती देते हुए रिट याचिका दाखिल की थी।

