Monday, February 16, 2026
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Vernacular language: “मैं किसी सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानूंगा”…यूपी के कंधई थाने के SHO की टिप्पणी

Vernacular language: कंधई थाने के प्रभारी ने कोर्ट आदेश की अवहेलना कर की गिरफ्तारी; सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ‘वर्दी के पीछे छिपकर न्याय व्यवस्था को दूषित नहीं किया जा सकता है।

रवैया न्याय व्यवस्था के लिए “गंभीर खतरा”

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कंधई थाना प्रभारी गुलाब सिंह सोनकर पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिन्होंने अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर मारपीट की। कोर्ट ने कहा कि SHO का रवैया न्याय व्यवस्था के लिए “गंभीर खतरा” है और यह वर्दी की आड़ में न्याय को दूषित करने जैसा है।दरअसल, 28 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी तरह की दबाव या कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद SHO ने 23 अप्रैल 2025 को याचिकाकर्ता को कार्यस्थल से घसीटकर गिरफ्तार किया और शारीरिक रूप से हमला किया।

जब पीड़ित ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाया, तो SHO ने स्थानीय भाषा में कहा —


“मैं किसी सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानूंगा, मैं तुम्हारा सारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट आज निकाल दूंगा।”

जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा —

“पहले प्रतिवादी (SHO) द्वारा अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की गई है, और ऐसा आचरण लोहे के हाथों से निपटाने योग्य है। वर्दी के नाम पर कोई भी व्यक्ति न्याय प्रणाली को दूषित नहीं कर सकता।”

जांच एडीजी रैंक के अधिकारी करें

कोर्ट ने इससे पहले यूपी गृह विभाग को इस मामले की जांच एडीजी रैंक के अधिकारी से कराने का आदेश दिया था। सरकार की जांच रिपोर्ट में भी SHO की जानबूझकर अवज्ञा की पुष्टि हुई है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी, और कोर्ट को इसकी जानकारी अगली सुनवाई में दी जाएगी। कोर्ट ने सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए मामला 7 नवंबर 2025 को दोबारा सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

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