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BLACK MAGIC: काला जादू और तंत्र-मंत्र पर कानून टालने के पीछे क्या वजहें थीं…केरल हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

BLACK MAGIC: केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा, काला जादू, तंत्र-मंत्र और अमानवीय प्रथाओं पर रोक लगाने वाले प्रस्तावित कानून को कैबिनेट ने किन कानूनी और संवैधानिक कारणों से टाल दिया।

कई जटिल कानूनी और संवैधानिक मुद्दे हैं: सरकार

चीफ जस्टिस नितिन जमदार और जस्टिस बसंत बालाजी की बेंच ने यह निर्देश तब दिया जब सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह कानून पूरी तरह से वापस नहीं लिया गया है, बल्कि फिलहाल टाल दिया गया है और इस पर विचार जारी है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रस्तावित कानून को कैबिनेट की बैठक के एजेंडे से इसलिए हटाया गया क्योंकि इसमें कई जटिल कानूनी और संवैधानिक मुद्दे हैं। हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि भले ही इस विषय पर कोई विशेष कानून नहीं है, लेकिन मौजूदा कानूनों जैसे बीएनएस, ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट, केरल पुलिस एक्ट, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत ऐसे अपराधों पर कार्रवाई की जा सकती है।

कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह दो प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी दे:

  1. कैबिनेट ने प्रस्तावित कानून को एजेंडे से हटाने का जो फैसला किया, उसके पीछे के कानूनी और संवैधानिक कारणों को संक्षेप में बताया जाए।
  2. पिछले पांच वर्षों में जादू-टोना और अंधविश्वास के नाम पर हुए अपराधों पर मौजूदा कानूनों के तहत की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश किया जाए।

सरकार बताए- कब लेगी अंतिम फैसला

कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे अपराधों पर मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई हुई है, तो उसका रिकॉर्ड जरूर होना चाहिए। इसलिए सरकार को एक अतिरिक्त हलफनामे के जरिए यह जानकारी देनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि सरकार का कहना है कि यह विशेष कानून अभी विचाराधीन है, तो उसे यह भी बताना होगा कि इस पर अंतिम फैसला कब लिया जाएगा। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को तय की है।

मानव बलि के बाद उठी थी कानून की मांग

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जो केरल युक्तिवादी संघ ने दायर की थी। याचिका में महाराष्ट्र और कर्नाटक की तरह केरल में भी काला जादू और तंत्र-मंत्र पर रोक लगाने वाला कानून बनाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया कि “केरल इनह्यूमन ईविल प्रैक्टिसेज, सॉर्सरी एंड ब्लैक मैजिक बिल” नाम से एक मसौदा कानून 2022 में तैयार किया गया था, जो लॉ रिफॉर्म्स कमीशन की सिफारिशों पर आधारित था। हालांकि, 5 जुलाई 2023 को राज्य मंत्रिमंडल ने इस पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया। याचिका में यह भी कहा गया कि यह मांग 2022 में पथानामथिट्टा जिले में दो महिलाओं की मानव बलि की घटना के बाद उठी थी, जिसमें एक दंपती समेत तीन लोग शामिल थे।

OTT और टीवी पर अंधविश्वास फैलाने वाले कंटेंट पर भी रोक की मांग

याचिका में यह भी मांग की गई है कि बड़े पर्दे, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, टीवी चैनलों और यूट्यूब पर दिखाए जा रहे ऐसे सीरियल और फिल्में, जो अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और काला जादू को बढ़ावा देते हैं, उन्हें अवैध घोषित किया जाए। हालांकि, जिनका उद्देश्य सकारात्मक हो और जिनमें कलात्मक मूल्य हों, उन्हें इससे छूट दी जाए।

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