WhatsApp-Meta Case: राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के आदेश का एक हिस्सा रद्द कर दिया।
अधिकरण ने डेटा शेयरिंग पर CCI की 5 साल की पाबंदी हटाई
आयोग ने WhatsApp को पांच साल तक उपयोगकर्ता डेटा Meta Platforms (Facebook की मूल कंपनी) के साथ विज्ञापन उद्देश्यों के लिए साझा करने से रोका गया था। अधिकरण ने डेटा शेयरिंग पर CCI की 5 साल की पाबंदी हटाई।
यह रही NCLAT की टिप्पणी
NCLAT की दो सदस्यीय पीठ — अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य अरुण बारोका — ने आदेश सुनाते हुए कहा, हम आयोग के उस निष्कर्ष को रद्द करते हैं जिसमें धारा 4(2)(D) का उल्लंघन माना गया था और आदेश के पैराग्राफ 247.1 में दिए गए निर्देशों को हटाते हैं, जो WhatsApp को पांच साल तक यूजर डेटा साझा करने से रोकते थे। हालांकि, NCLAT ने Rs 213 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा और बाकी आदेश में कोई बदलाव नहीं किया। “विज्ञापन उद्देश्यों के लिए डेटा शेयरिंग को लेकर CCI के आदेश में संशोधन किया जाता है, पर बाकी निष्कर्ष यथावत रहेंगे।
यह है मामला
नवंबर 2024 में CCI ने WhatsApp और Meta पर एंटी-कम्पटीटिव प्रैक्टिसेज के लिए ₹213.14 करोड़ का जुर्माना लगाया था। आदेश में कहा गया था कि WhatsApp पांच साल तक उपयोगकर्ता डेटा Meta या उसकी अन्य कंपनियों के साथ विज्ञापन के लिए साझा नहीं करेगा। Meta और WhatsApp ने इस आदेश को NCLAT में चुनौती दी थी। जनवरी 2025 में NCLAT ने अंतरिम राहत देते हुए डेटा शेयरिंग पर लगी पांच साल की रोक को स्थगित कर दिया था।
CCI का तर्क
CCI ने कहा था कि 2021 की WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट के बाद Meta उपयोगकर्ता डेटा का इस्तेमाल विज्ञापन और क्रॉस-प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन के लिए कर रहा था, जो अनुचित व्यापारिक आचरण (unfair business practice) है। आयोग ने आदेश दिया था कि WhatsApp केवल अपनी सेवाओं के लिए आवश्यक डेटा ही प्रयोग करे। किसी भी उपयोगकर्ता को यह शर्त न दी जाए कि यदि वे डेटा शेयरिंग से सहमत नहीं हैं तो वे WhatsApp का उपयोग नहीं कर सकते।
यह होगा अगला कदम
NCLAT ने कहा कि विस्तृत फैसला जल्द जारी किया जाएगा। यह आदेश टेक कंपनियों के लिए राहत, लेकिन डेटा गोपनीयता बहस के लिए एक नया अध्याय खोलता है।

