WhatsApp-Meta: सुप्रीम कोर्ट में टेक दिग्गज Meta और WhatsApp ने कहा, वे NCLAT के उन निर्देशों का पालन करेंगे, जिनमें एडवरटाइजिंग (विज्ञापन) डेटा के लिए प्राइवेसी और यूजर की सहमति (Consent) को अनिवार्य बनाया गया है।
मुख्य बातें
- डेडलाइन तय: वॉट्सऐप ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह 16 मार्च तक ट्रिब्यूनल (NCLAT) के निर्देशों को लागू कर देगा।
- कोर्ट का रुख: चीफ जस्टिस सूर्या कांत की बेंच ने कंपनियों की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें वे इन निर्देशों पर रोक (Stay) लगाने की मांग कर रही थीं।
- प्राइवेसी पर कड़ा प्रहार: कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कंपनियों को लोगों की प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
पूरा मामला क्या है?
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कंपनियों पर ₹213.14 करोड़ का जुर्माना लगाया था। मामला NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल) तक पहुँचा, जिसने जुर्माने को बरकरार रखा लेकिन डेटा शेयरिंग पर लगे 5 साल के बैन को हटा दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट उसी फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी
3 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कंपनियों को फटकार लगाते हुए कहा था कि “आप डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों की प्राइवेसी से नहीं खेल सकते। हम डिजिटल रूप से निर्भर और अनजान ग्राहकों के अधिकारों का हनन नहीं होने देंगे।”
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों से कंप्लायंस रिपोर्ट (Compliance Report) मांगी है। कंपनियों द्वारा पेश किए गए ‘प्राइवेसी पॉलिसी हलफनामे’ की जांच CCI करेगा।मुख्य अपील पर सुनवाई जारी रहेगी, लेकिन तब तक कंपनियों को प्राइवेसी नियमों का पालन करना होगा।

