Friday, October 9, 2026
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SC on PILs: एक या दो नहीं…बल्कि एक वकील ने दायर की 25 जनहित याचिकाएं, देखिए यह दी मिली सुप्रीम नसीहत

SC on PILs: सुप्रीम कोर्ट ने एक ही याचिकाकर्ता द्वारा दायर 25 अलग-अलग जनहित याचिकाओं (PILs) पर सुनवाई पर टिप्प्णी की।

सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील को सख्त नसीहत देते हुए कहा है कि हर मुद्दे पर सीधे अदालत भागने के बजाय संबंधित अधिकारियों के पास जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने वकील सचिन गुप्ता को सलाह दी कि वे कानूनी विशेषज्ञ के रूप में अपनी ऊर्जा का उपयोग अधिकारियों को संवेदनशील बनाने में करें। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे।

कोर्ट की सख्त लेकिन रचनात्मक नसीहत

  • जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, याचिकाकर्ता (सचिन गुप्ता) ने अपनी सभी 25 याचिकाएं वापस लेने की इच्छा जताई। इस पर CJI ने कहा, अधिकारियों को ‘वाइजर’ बनाएं: कोर्ट ने कहा, “आप अपने पेशे पर ध्यान दें। सीधे अदालत आने के बजाय संबंधित अधिकारियों के पास जाएं और उन्हें कुछ मुद्दों पर अधिक जागरूक (Wiser) बनाएं।
  • विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण (Analytical Approach): चूंकि याचिकाकर्ता बार के सदस्य हैं, इसलिए उन्हें मुद्दों की गहराई से जांच करनी चाहिए और पहले प्रशासन को इसके बारे में संवेदनशील बनाना चाहिए।
  • अंतिम विकल्प के रूप में कोर्ट: यदि अधिकारियों के पास जाने के बाद भी कुछ नहीं होता, तब अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

याचिकाओं में क्या मांग की गई थी? (Diverse Range of PILs)

  • याचिकाकर्ता ने कई अजीबोगरीब और विविध मुद्दों पर निर्देश देने की मांग की थी।
  • भाषा नीति: आधिकारिक उद्देश्यों के लिए देश में एक “कॉमन लिंक लैंग्वेज” (Common Link Language) विकसित करना।
  • कानूनी जागरूकता: आम जनता में कानूनी ज्ञान फैलाने के लिए टेलीविजन पर ‘लीगल अवेयरनेस शो’ शुरू करना।
  • साबुन में रसायन: साबुन में केवल उन रसायनों के उपयोग की अनुमति देना जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारते हैं, न कि त्वचा के लिए जरूरी बैक्टीरिया को।
  • सामाजिक कल्याण: भिखारी और ट्रांसजेंडर जैसे वंचित समूहों के उत्थान के लिए नीति बनाना।

“आधी रात को ड्राफ्ट करते हो क्या?” (Frivolous PILs)

  • इससे पहले 9 मार्च को भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिकाकर्ता की 5 याचिकाओं को “तुच्छ” (Frivolous) बताते हुए फटकार लगाई थी।
  • लहसुन-प्याज पर PIL: एक याचिका में वैज्ञानिक अध्ययन की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में “तामसिक” (नकारात्मक) ऊर्जा होती है।
  • CJI की टिप्पणी: नाराज होकर CJI ने पूछा था, “आधी रात को ये सब याचिकाएं ड्राफ्ट करते हो क्या?” कोर्ट ने इन याचिकाओं को अस्पष्ट, बेतुका और निराधार बताया था।
  • अन्य मुद्दे: शराब और तंबाकू उत्पादों में हानिकारक सामग्री को विनियमित करने वाली याचिकाओं को भी खारिज कर दिया गया था।

निष्कर्ष: जनहित याचिका का दुरुपयोग रोकने की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि PIL (Public Interest Litigation) का उपयोग गंभीर और व्यापक जनहित के मुद्दों के लिए होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत विचारों या अकादमिक जिज्ञासाओं को थोपने के लिए।

मुख्य बिंदुसुप्रीम कोर्ट का स्टैंड
याचिकाकर्ता का कर्तव्यप्रशासन को जागरूक करना, न कि कोर्ट का समय बर्बाद करना।
याचिकाओं का भविष्यवापस लेने की अनुमति दी गई।
सीखकार्यपालिका (Executive) के काम में न्यायपालिका का सीधा हस्तक्षेप तभी होना चाहिए जब प्रशासन विफल हो जाए।
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