WIDOW-PROPERTIES: सुप्रीम कोर्ट ने उस विधवा के संपत्ति अधिकार बहाल कर दिए, जिसे पति की मौत के बाद ससुरालवालों ने घर से निकाल दिया था और उसके पति की जीवन बीमा राशि भी ले ली थी।
ससुराल वाले विधवा पर हमले के भी आरोपी
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ससुराल वाले विधवा पर हमले के भी आरोपी हैं। अदालत ने आरोपी बिरेंद्र उरांव से कहा – “आपने अपने बेटे की मौत के बाद उसकी पत्नी को घर से निकाल दिया, उसकी संपत्ति हड़प ली और जीवन बीमा की रकम भी ले ली। अब आप गरीब आदिवासी होने का दावा कर रहे हैं। यह स्वीकार्य नहीं है।”जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “कुछ लोग सोचते हैं कि आदिवासी होने के नाम पर कुछ भी कर सकते हैं। हमें पता है ग्रामीण इलाकों में क्या-क्या होता है।”
संपत्ति बहाल करने का आश्वासन
सुप्रीम कोर्ट ने ससुरालवालों द्वारा दिया गया वह नोट रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें विधवा की संपत्ति बहाल करने का आश्वासन दिया गया था। अदालत ने कहा, “अगर यह आश्वासन नहीं होता तो हम याचिका और जमानत दोनों खारिज कर पुलिस को तुरंत गिरफ्तारी का आदेश दे देते।”
अग्रिम जमानत पर सवाल
पीठ ने कहा कि गंभीर आरोपों को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने suo motu नोटिस जारी कर विधवा पर हमला करने के मामले में जमानत पाए अन्य ससुरालवालों – बुधो उरांव, लालमोहन उरांव, लक्षु उरांव, कौलेश्वर उरांव और जितेंद्र उरांव – से जवाब मांगा कि उनकी नियमित जमानत क्यों न रद्द की जाए।
अदालत से वारंट जारी
कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ ₹5,000 के जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया और झारखंड के लातेहार जिले के एसपी को इन्हें लागू कर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। अदालत ने बिरेंद्र उरांव की जमानत सिर्फ एक हफ्ते के लिए बढ़ाई है। इससे पहले 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी से पूछा था कि क्या वे मृतक सैकेंद्र उरांव के हिस्से की पूरी संपत्ति विधवा के नाम करने को तैयार हैं।

