Thursday, October 15, 2026
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Arbitral Award: सिंगापुर कोर्ट ने $490 मिलियन के मध्यस्थता निर्णय के खिलाफ टाटा पावर की चुनौती खारिज की;पक्षपात के दावे को किया अस्वीकार

SICC के मुख्य निष्कर्ष (Key Findings)

  • प्राकृतिक न्याय का कोई उल्लंघन नहीं: टाटा पावर ने तर्क दिया था कि ट्रिब्यूनल ने ‘कारण’ (Causation) और ‘नुकसान की सुदूरता’ (Remoteness) जैसे मुख्य पहलुओं पर अलग से विचार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट केवल यह देखता है कि विश्लेषण हुआ है या नहीं; हर एक तर्क का अलग से उत्तर देना अनिवार्य नहीं है।
  • पक्षपात (Apparent Bias) का आरोप खारिज: टाटा पावर ने ट्रिब्यूनल के दो मध्यस्थों (प्रोफेसर लॉरेंस बू और स्टुअर्ट इसाक्स KC) पर पक्षपात का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि यह आरोप केवल “निराधार आशंका” है और इसका साक्ष्यों से कोई लेना-देना नहीं है।
  • मेरिट की पुनरावृत्ति नहीं: SICC ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक न्याय के नाम पर मध्यस्थता पुरस्कार की मेरिट (गुण-दोष) की फिर से समीक्षा नहीं की जा सकती।

सिंगापुर: सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट (SICC) ने ‘टाटा पावर कंपनी लिमिटेड’ की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें निवेश सलाहकार फर्म ‘क्लेरोस कैपिटल पार्टनर्स लिमिटेड’ (Kleros Capital Partners Limited) को लगभग $490.32 मिलियन (लगभग ₹4,100 करोड़ से अधिक) का भुगतान करने के मध्यस्थता आदेश को चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति एस. मोहन, अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीश एंथोनी बेसांको और अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीश एंथोनी मीघर की पीठ ने टाटा पावर के उन सभी दावों को खारिज कर दिया, जिनमें मध्यस्थता अधिकरण द्वारा आवश्यक मुद्दों पर निर्णय न लेने, प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के उल्लंघन और पंचाट (Tribunal) के सदस्यों पर प्रत्यक्ष पक्षपात (Apparent Bias) के आरोप लगाए गए थे।

मामले की पृष्ठभूमि: रूस का कोयला खनन प्रोजेक्ट

  • गोपनीयता समझौता (NDA): विवाद 2013 और 2014 में टाटा पावर और क्लेरोस के बीच हुए दो गैर-प्रकटीकरण समझौतों (NDA) से जुड़ा था। क्लेरोस ने रूस के क्रूटोगोरोवो (Krutogorovo) कोयला भंडार में खनन परियोजना के लिए सह-निवेशक के रूप में टाटा पावर से संपर्क किया था और नीलामी व भंडार से संबंधित गोपनीय विवरण साझा किए थे।
  • समझौते का उल्लंघन: परियोजना में इक्विटी और नियंत्रण को लेकर रिश्ते बिगड़ने के बाद, टाटा पावर ने अपनी रूसी सहायक कंपनी FENR के माध्यम से जनवरी 2018 में सीधे खनन लाइसेंस प्राप्त कर लिया (जिसे बाद में अव्यवहारिक मानकर 2022 में सरेंडर कर दिया गया)।
  • मध्यस्थता (Arbitration): क्लेरोस ने नवंबर 2020 में सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) के नियमों के तहत मध्यस्थता शुरू की। अधिकरण ने पाया कि टाटा पावर ने गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग किया, क्लेरोस के आर्थिक हितों को दरकिनार किया और अनुबंध के सद्भाव दायित्व का उल्लंघन किया।
  • हर्जाना आदेश: अधिकरण ने परियोजना का मूल्य $1.0215 बिलियन आंका और माना कि क्लेरोस ने परियोजना विकसित करने का 60% मौका खो दिया। इसके एवज में टाटा पावर को $490.32 मिलियन हर्जाना, $8.29 मिलियन कानूनी खर्च और 5.33% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया था।
  • NDA और गुप्त जानकारी: विवाद 2013 और 2014 के गैर-प्रकटीकरण समझौतों (NDAs) से शुरू हुआ। क्लेरोस ने रूस के क्रुटोगोरोवो कोयला ब्लॉक के खनन लाइसेंस और नीलामी प्रक्रिया से जुड़ी गोपनीय जानकारी टाटा पावर के साथ शेयर की थी।
  • समझौते का उल्लंघन: ट्रिब्यूनल ने पाया कि टाटा पावर ने क्लेरोस को दरकिनार कर अपनी रूसी सहायक कंपनी (FENR) के जरिए जनवरी 2018 में खुद लाइसेंस प्राप्त कर लिया। बाद में प्रोजेक्ट को अलाभकारी बताकर 2022 में लाइसेंस सरेंडर कर दिया।
  • ट्रिब्यूनल का निर्णय: सितंबर 2023 में ट्रिब्यूनल ने टाटा पावर को गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग करने और सद्भावना (Good Faith) के संविदात्मक कर्तव्य का उल्लंघन करने का दोषी पाया। जुलाई 2025 में परियोजना का मूल्यांकन $1.02 बिलियन करते हुए क्लेरोस को नुकसान के रूप में $490.32 मिलियन भुगतान करने का आदेश दिया।

सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट (SICC) की प्रमुख टिप्पणियां

प्राकृतिक न्याय के कथित उल्लंघन के तर्क पर अदालत ने कहा: “अदालत का सरोकार निर्णय की गुणवत्ता या उसके विश्लेषण की गहराई से नहीं, बल्कि विश्लेषण के अस्तित्व या तथ्य से है। अदालत सार (Substance) पर ध्यान देती है, प्रारूप (Form) पर नहीं।”

पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए पीठ ने रेखांकित किया: “अतः सभी बाहरी आवरणों को हटाकर देखा जाए तो प्रत्यक्ष पक्षपात पर टाटा का मामला हमारे निर्णय में साक्ष्य-विहीन और एक निराधार आशंका के अलावा कुछ नहीं है।”

अदालत द्वारा चुनौती खारिज करने के मुख्य आधार

  1. कारण-कार्य संबंध (Causation) व दूरदर्शिता का परीक्षण: अदालत ने पाया कि मध्यस्थता अधिकरण ने क्षति और उसके कारणों पर पर्याप्त विचार किया था। हर दलील के लिए अलग खंड न होने से प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
  2. पक्षपात के आरोप निराधार: क्लेरोस के मुकदमेबाजी फंडर (Omni Bridgeway) की अन्य असंबंधित मध्यस्थताओं में मध्यस्थों की मौजूदगी के आधार पर पक्षपात की आशंका को अदालत ने निराधार पाया।
  3. मेरिट को दोबारा खोलने का प्रयास: अदालत ने स्पष्ट किया कि पंचाट के फैसले की समीक्षा के बहाने मूल विवाद के गुण-दोष (Merits) को दोबारा नहीं खोला जा सकता।

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सिंगापुर कोर्ट की टिप्पणी

SICC पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा: “अदालत को मध्यस्थता पुरस्कार की गुणवत्ता या उसके विश्लेषण की गहराई से सरोकार नहीं है, बल्कि इस बात से मतलब है कि विश्लेषण मौजूद है। पक्षपात पर टाटा का मामला साक्ष्यविहीन और निराधार आशंका से अधिक कुछ नहीं है।”

विधिक प्रतिनिधित्व

  • टाटा पावर की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता दविंदर सिंह और कोह स्वी येन (दविंदर सिंह एलएलसी, वोंग पार्टनरशिप एलएलसी और प्रोलेजिस एलएलसी की टीम के साथ)।
  • क्लेरोस कैपिटल पार्टनर्स की ओर से: टोबी लैंडौ केसी, केल्विन लियांग हानवेन और रोशेल लिम रुई-ची (डक्सटन हिल चैंबर्स)।

Arbitral Award: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतसिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट (SICC)
पीठासीन पीठजस्टिस एस. मोहन, जज एंथनी बेसैंको एवं जज एंथनी मीगर
विवाद का कारणरूस के ‘क्रुटोगोरोवो’ कोयला खनन प्रोजेक्ट में गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग व गैर-प्रकटीकरण समझौते (NDA) का उल्लंघन
क्षतिपूर्ति (Damages)$490.32 मिलियन (लगभग ₹4,100 करोड़) + $8.29 मिलियन कानूनी खर्च + 5.33% वार्षिक ब्याज
अदालत का फैसलाटाटा पावर की चुनौती खारिज; मध्यस्थता ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखा।
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