Friday, October 16, 2026
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CJP Protest: CJP के 5 सितंबर के प्रदर्शन मार्च के खिलाफ आदेश पर NO; सरकार के पास जाएं, हम पहले से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का अनुमान नहीं लगा सकते

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और टिप्पणियां

  1. कानून-व्यवस्था पुलिस का काम: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पुलिस अपने अधिकारों के तहत यह तय कर सकती है कि क्या कानूनी है और क्या गैर-कानूनी।
  2. अनुमान पर आधारित रोक नहीं: शीर्ष अदालत ने कहा कि अभी ऐसा कोई आधार या “अपरिहार्य परिस्थिति” नहीं है जिससे यह माना जाए कि प्रदर्शन हिंसक होगा। कोर्ट यह उम्मीद करता है कि सभी पक्ष कानून के दायरे में रहकर जिम्मेदार व्यवहार करेंगे।
  3. हाई-पावर्ड कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश: कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी आशंकाएं केंद्र सरकार के समक्ष रखें और इस मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति (High-Powered Committee) के सामने भी विचारार्थ रखा जा सकता है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर 2026 को राजधानी दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा प्रस्तावित विरोध मार्च पर तत्काल रोक लगाने या कोई अंतरिम निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अदालत इस स्तर पर यह पूर्वाग्रह या पूर्वधारणा नहीं बना सकती कि प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च से कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता (दिल्ली पुलिस के पूर्व सेवानिवृत्त अधिकारी राजेंद्र सिंह) को निर्देश दिया कि वे कानून-व्यवस्था से जुड़ी अपनी आशंकाओं और चिंताओं को लेकर केंद्र सरकार के पास जाएं। अदालत इस मामले की विस्तृत सुनवाई अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ 10 सितंबर को करेगी।

सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

1. शांतिपूर्ण प्रदर्शन की पूर्वधारणा और पुलिस का कर्तव्य आशंकाओं पर अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा: “कम से कम अभी के लिए हम यह मानकर चलेंगे, और हमारे पास संदेह करने का कोई कारण नहीं है, कि हर कोई बेहद जिम्मेदार, शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से व्यवहार करेगा। अभी हमारे सामने ऐसी कोई बाध्यकारी परिस्थिति नहीं है जिससे यह मान लिया जाए कि कुछ गलत होने वाला है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और सरकार की जिम्मेदारी है, और वे यह तय करने में सक्षम हैं कि क्या वैध है और क्या अवैध।”

2. न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा पीठ ने स्पष्ट किया: “अंतिम फैसला संबंधित प्रशासनिक प्राधिकरणों को ही लेना होगा। यदि कोई अप्रिय घटना घटती है या कोई चिंताजनक स्थिति पैदा होती है, तब आप अदालत का रुख कर सकते हैं—बशर्ते वह मुद्दा अदालत के न्यायिक अधिकार क्षेत्र के भीतर आता हो।”

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मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता की दलीलें

  • 5 सितंबर का मार्च: सीजेपी ने 25 जुलाई को सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों (विशेषकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने) को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान किया है।
  • 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का हवाला: याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता रिजवान ने दलील दी कि लुटियंस दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्तर का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होना है, जिसमें विदेशी राजनयिक शामिल होंगे। सुरक्षा संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मौजूदगी को देखते हुए बिना अनुमति प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
  • असंगठित समूह की समस्या: सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिका में ऐसा कोई विधिवत पंजीकृत पता या संगठित इकाई नहीं है जिसे समन/नोटिस तामील कराया जा सके।

विवाद की मुख्य वजह

  • CJP का प्रदर्शन क्यों?: CJP ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को छात्र आंदोलन खत्म कराने के दौरान किए गए वादों (विशेषकर छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने) को पूरा नहीं किया है।
  • ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) का हवाला: याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील डॉ. रिजवान ने तर्क दिया कि 12-13 सितंबर को दिल्ली में 18वां ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित होना है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। लुटियंस दिल्ली जैसे संवेदनशील इलाके में बिना अनुमति इतने बड़े प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
  • तत्काल रोक की मांग: वकील ने मांग की कि जब तक सम्मेलन समाप्त नहीं हो जाता, इस मार्च को स्थगित कर दिया जाए।

अदालत का निर्देश

  1. सॉलिसिटर जनरल और हाई-पावर्ड कमेटी के समक्ष प्रस्तुति: पीठ ने कहा कि याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल के समक्ष रखी जाए और इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में गठित ‘उच्चाधिकार प्राप्त समिति’ (High-Powered Committee) को भी भेजा जाए ताकि वे इसका संज्ञान ले सकें।
  2. सरकार से संपर्क करने की छूट: अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी मांगों के लिए गृह मंत्रालय/केंद्र सरकार से संपर्क करने की अनुमति दी।
  3. 10 सितंबर को सुनवाई: मामले को सीजेपी विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ 10 सितंबर को अंतिम रूप से सूचीबद्ध किया गया है।

CJI सूर्य कांत की प्रमुख टिप्पणी

आदेश सुनाते हुए CJI सूर्य कांत ने कहा: “कम से कम अभी के लिए, हम यह मानकर चलेंगे कि हर कोई जिम्मेदार, शांतिपूर्ण और वैध तरीके से व्यवहार करेगा। हमारे सामने ऐसा कोई ठोस कारण नहीं है कि कुछ गलत होने का अनुमान लगाया जाए। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी है, और हम उनसे उम्मीद करते हैं कि वे कानूनी ढांचे के भीतर काम करेंगे।”

विधिक प्रतिनिधित्व

  • याचिकाकर्ता की ओर से: अधिवक्ता रिजवान (अधिवक्ता पुलकित अग्रवाल के माध्यम से दायर)।

CJP Protest: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Order)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतउच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठासीन पीठCJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति वी. मोहना
याचिकाकर्तादिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेंद्र सिंह
CJP का प्रस्तावित मार्च5 सितंबर 2026: इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक
कोर्ट का आदेशकोई अंतरिम रोक नहीं; याचिकाकर्ता केंद्र सरकार/पुलिस के समक्ष अपनी चिंताएं रखें।
अगली सुनवाई10 सितंबर 2026 (अन्य लंबित याचिकाओं के साथ)
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