मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| मुख्य विवाद | सीवान में NEET पेपर लीक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा AK-47 के इस्तेमाल के खिलाफ दायर याचिकाएं। |
| सरकार का रुख | पुलिस ने कोई आनुपातिक से अधिक बल प्रयोग नहीं किया; AK-47 की फायरिंग केवल आत्मरक्षार्थ हवा में की गई थी, जिससे कोई घायल नहीं हुआ। |
| कार्रवाई | AK-47 चलाने वाले सिपाही को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई। |
Disproportionate Force: बिहार में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) द्वारा आयोजित छात्र आंदोलन और प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस बर्बरता के आरोपों पर बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जवाबी हलफनामा (Counter-Affidavit) दायर किया है।
राज्य सरकार ने पुलिस द्वारा ‘अत्यधिक बल प्रयोग’ (Disproportionate Force) के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सीवान में तैनात सिपाही द्वारा AK-47 राइफल से की गई फायरिंग हवाई (Air Fire) थी और इससे कोई भी प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ था।
Disproportionate Force: बिहार सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए मुख्य बिंदु
- AK-47 फायरिंग की परिस्थिति (25 जुलाई, सीवान)
- स्थान व कारण: सीवान के जेपी चौक के पास जिला इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) के कांस्टेबल अभिषेक कुमार भीड़ के बीच घिर गए और खुद को घिरा पाकर उन्होंने भीड़ से निकलने के लिए AK-47 से हवा में 4 राउंड फायर किए।
- कोई हताहत नहीं: राज्य सरकार ने हलफनामे में स्पष्ट कहा कि AK-47 की गोलियों से कोई भी प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ है।
- प्रदर्शनकारियों के घायल होने की वजह
- सीवान के हाथी चौक के पास ASI नीलेश कुमार सिंह ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9mm पिस्टल से 2 राउंड फायर किए थे।
- इस कार्रवाई में 3 प्रदर्शनकारियों को मामूली आग्नेयास्त्र (Minor Firearm) की चोटें आई थीं। राज्य ने स्पष्ट किया कि ये चोटें AK-47 से नहीं लगी थीं और न ही वे लोग उस स्थान पर मौजूद थे जहाँ से AK-47 चलाई गई थी।
- सिपाही पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई
- राज्य सरकार ने माना कि AK-47 एक ‘प्लाटून-लेवल’ हथियार है, जिसका उपयोग विशेष अभियानों (Special Operations) के लिए होता है, न कि सामान्य कानून-व्यवस्था (Law & Order) बनाए रखने के लिए।
- ‘अनुचित व्यवहार’ (Undesirable Conduct) के कारण कांस्टेबल अभिषेक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा चुकी है।
Disproportionate Force: राज्यव्यापी हिंसा और दर्ज प्राथमिकियों (FIRs) का ब्योरा
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए आंकड़े में बताया कि प्रदर्शनों के दौरान ‘असामाजिक तत्वों’ की वजह से हिंसा फैली।
- पुलिसकर्मी व कर्मचारी घायल: पूरे राज्य (पटना, जहानाबाद, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज व सीवान) में हिंसा के दौरान 157 पुलिसकर्मी और 7 अन्य सरकारी सेवक घायल हुए।
- जहानाबाद घटना: 24 जुलाई को भीड़ ने जहानाबाद के जिलाधिकारी (DM) के आवास पर हमला किया, जिसमें 18 अधिकारी/कर्मचारी घायल हुए।
- गिरफ्तारियां व राहत:
- 22 से 25 जुलाई के बीच पूरे बिहार में 69 FIR दर्ज की गईं और 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है तथा 75 जुवेनाइल (नाबालिगों) को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा मुचलके पर छोड़ दिया गया है।

