न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने शम्स तबरेज़ द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया। उच्च न्यायालय ने दोहराया कि राजस्व अभिलेखों में नामांतरण की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (UP Revenue Code, 2006) में निर्धारित विशेष विधिक प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है, और यह क्षेत्राधिकार केवल संबंधित तहसीलदार में निहित है, न कि जिला मजिस्ट्रेट में।
उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. विशेष कानून बनाम सामान्य शक्तियां: ‘वक्फ बोर्ड डीएम को निर्देश नहीं दे सकता’ न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने वक्फ अधिनियम और राजस्व कानून के टकराव पर विधिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा: “जहां कोई विशेष कानून (Special Law) एक विशिष्ट प्रक्रिया निर्धारित करता है, वहां उसे दरकिनार (Bypass) करने के लिए किसी अन्य कानून की सामान्य शक्तियों का सहारा नहीं लिया जा सकता। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अपनी सामान्य शक्तियों के प्रयोग में किसी जिला मजिस्ट्रेट को वक्फ संपत्ति से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज करने, हटाने या बदलने का निर्देश नहीं दे सकता।”
2. वक्फ रजिस्टर (धारा 41) और राजस्व रिकॉर्ड (धारा 34) का अंतर: पीठ ने वक्फ अधिनियम, 1995 और यूपी राजस्व संहिता, 2006 के बीच विधिक विभाजन रेखा खींचते हुए कहा:
- वक्फ रजिस्टर में संशोधन: वक्फ अधिनियम की धारा 41 के तहत वक्फ बोर्ड को अपने स्वयं के वक्फ रजिस्टर में आवश्यक प्रविष्टियां करने या बदलने का पूर्ण अधिकार है।
- राजस्व अभिलेखों में नामांतरण: राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी/भू-अभिलेख) में किसी नाम को दर्ज करना या हटाना राज्य के राजस्व प्रशासन का विषय है, जो पूरी तरह संबंधित तहसीलदार के क्षेत्राधिकार में आता है।
3. धारा 34 के तहत दावों और आपत्तियों का निस्तारण अनिवार्य:
- अदालत ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 के तहत किसी भी नामांतरण आदेश को पारित करने से पहले तहसीलदार द्वारा सार्वजनिक उद्घोषणा जारी करना, आपत्तियां आमंत्रित करना और दावों की न्यायिक जांच करना अनिवार्य है।
- संहिता का यह प्रावधान किसी जिला मजिस्ट्रेट को सीधे प्रशासनिक आदेश से नामांतरण दर्ज करने की शक्ति प्रदान नहीं करता।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: प्रतापगढ़ वक्फ नंबर 1339 का विवाद
- वक्फ बोर्ड का 13 जनवरी 2025 का आदेश:
- सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ ने 13 जनवरी 2025 को एक आदेश पारित किया था।
- इस आदेश के माध्यम से बोर्ड ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित वक्फ संख्या 1339 की प्रबंध समिति से कासिम नदीम का नाम हटा दिया था और याचिकाकर्ता (शम्स तबरेज़) को प्रबंध समिति का नया सचिव नियुक्त किया था।
- डीएम को निर्देश देने की मांग:
- याचिकाकर्ता ने वक्फ बोर्ड के आदेश का हवाला देते हुए जिला मजिस्ट्रेट, प्रतापगढ़ से मांग की कि वह राजस्व रिकॉर्ड में वक्फ संपत्ति के विवरण में से कासिम नदीम का नाम हटाकर उसका नाम दर्ज करें।
- कार्रवाई न होने पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दलील दी कि वक्फ अधिनियम की धारा 28 के तहत वक्फ बोर्ड को जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश जारी करने की शक्ति प्राप्त है, इसलिए डीएम बोर्ड के आदेश का पालन कराने के लिए बाध्य हैं।
- राज्य सरकार का विधिक विरोध:
- राज्य सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए दलील दी कि राजस्व अभिलेखों में नामांतरण का विषय पूरी तरह उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 के तहत एक वैधानिक और अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है।
- इसे वक्फ बोर्ड के किसी प्रशासनिक पत्र या निर्देश के आधार पर सीधे परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जाने की छूट
उच्च न्यायालय ने डीएम को सीधे राजस्व रिकॉर्ड बदलने का निर्देश देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को वैधानिक स्वतंत्रता दी:
- यदि याचिकाकर्ता वक्फ बोर्ड के आदेश के आधार पर राजस्व अभिलेखों में संशोधन कराना चाहता है, तो वह उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 के तहत सक्षम प्राधिकारी (संबंधित तहसीलदार) के समक्ष विधिवत नामांतरण प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर सकता है।
- तहसीलदार कानून के अनुसार सभी पक्षों को नोटिस जारी कर, आपत्तियों की सुनवाई के बाद नियमानुसार आदेश पारित करेंगे।
विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 28 बनाम धारा 41:
- धारा 28: यह राज्य सरकार और जिला मजिस्ट्रेट को वक्फ बोर्ड द्वारा जारी वैध निर्देशों के क्रियान्वयन में सहयोग करने की सामान्य शक्ति देती है। परंतु यह धारा डीएम को राजस्व अदालत (Revenue Court) के रूप में कार्य करने का अधिकार नहीं देती।
- धारा 41: यह वक्फ बोर्ड को अपने केंद्रीय वक्फ रजिस्टर (Register of Auqaf) में वक्फ के मुतवल्ली या प्रबंधन के विवरण में परिवर्तन करने की अनुमति देती है।
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 एवं 35:
- धारा 34 (उत्तराधिकार या अंतरण की रिपोर्ट): भूमि पर कब्जा प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को तहसीलदार को नामांतरण हेतु रिपोर्ट करना अनिवार्य है।
- धारा 35 (नामांतरण मामलों में प्रक्रिया): तहसीलदार उद्घोषणा जारी करता है, आपत्तियां आमंत्रित करता है और विवाद न होने पर सारांश रूप से तथा विवाद होने पर साक्ष्य लेकर आदेश पारित करता है। कोई भी कार्यपालक अधिकारी (जैसे डीएम) तहसीलदार की इस वैधानिक शक्ति का अतिक्रमण नहीं कर सकता।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: शम्स तबरेज़ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ]
- पीठ: न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय (खंडपीठ)
- निर्णय की तिथि: अक्टूबर 2026
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (UP Revenue Code, 2006):
- धारा 34 (उत्तराधिकार या अंतरण के मामलों में राजस्व नामांतरण हेतु आवेदन)
- धारा 35 (तहसीलदार द्वारा आपत्तियों के निस्तारण और आदेश की प्रक्रिया)
- वक्फ अधिनियम, 1995 (Waqf Act, 1995):
- धारा 28 (जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश जारी करने की बोर्ड की सामान्य शक्तियां)
- धारा 41 (वक्फ रजिस्टर में प्रविष्टियों का संशोधन)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार)
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (UP Revenue Code, 2006):
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- जनरलिया स्पेशियालिबस नॉन डेरोगेंट (Generalia specialibus non derogant) — ‘सामान्य कानून विशेष कानून के प्रावधानों को निष्प्रभावी नहीं कर सकता; राजस्व संहिता की विशेष नामांतरण प्रक्रिया वक्फ कानून के सामान्य निर्देशों पर प्रभावी रहेगी।’
- सुप्रीम कोर्ट नजीरें (राजस्व नामांतरण) — ‘राजस्व प्रविष्टियां (Khatauni/Jamabandi) केवल वित्तीय और कर संग्रह के उद्देश्यों के लिए होती हैं; वे स्वतः स्वामित्व का निर्धारण नहीं करतीं और उनका संशोधन केवल निर्धारित राजस्व प्रक्रिया द्वारा ही संभव है।’
- अंतिम निर्णय: रिट याचिका खारिज; वक्फ बोर्ड के आदेश पर डीएम को राजस्व रिकॉर्ड बदलने का निर्देश देने से इनकार; याचिकाकर्ता को यूपी राजस्व संहिता की धारा 34 के तहत तहसीलदार के समक्ष नामांतरण आवेदन करने की विधिक छूट।
UP Revenue Code: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ पीठ) |
| पीठ | न्यायमूर्ति आलोक माथुर एवं न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय |
| याचिकाकर्ता | शम्स तबरेज (Shams Tabrez) |
| मूल विवाद | प्रतापगढ़ की वक्फ संपत्ति संख्या 1339 के रिकॉर्ड में डीएम के माध्यम से संशोधन कराने की मांग। |
| संबद्ध अधिनियम | वक्फ अधिनियम (Waqf Act) बनाम उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UP Revenue Code) |
| अदालत का फैसला | याचिका खारिज; म्यूटेशन का अधिकार तहसीलदार का है, डीएम या वक्फ बोर्ड का नहीं। |

