सुनवाई के दौरान अदालत की प्रमुख टिप्पणियाँ व घटनाक्रम
- 13वीं सदी के ‘लाल महल’ पर अतिक्रमण और अधिकारियों को निलंबन की चेतावनी:अदालत आयुक्त गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि निज़ामुद्दीन स्थित 13वीं सदी का ऐतिहासिक ‘लाल महल’ (जिसका उल्लेख प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता के लेखों में भी मिलता है) निजी बिल्डरों द्वारा अतिक्रमित और आंशिक रूप से ढहा दिया गया है। जब MCD के वकील यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि वह भूमि निजी है या सार्वजनिक, तो पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:“आप पूरी तरह से बेपरवाह हैं… हमें उन अधिकारियों के नाम दीजिए जिन्होंने आपको निर्देश दिए हैं! हम उन्हें आज ही अदालत से निलंबित कर देंगे। यह अविश्वासनीय रूप से चौंकाने वाला है।”
- ज़मरूदपुर का लोधी कालीन मकबरा बना गौशाला और कचरा घर:अदालत आयुक्त ने बताया कि ज़मरूदपुर स्थित लोधी काल का मकबरा गौशाला में बदल दिया गया है और वहाँ 14 से 16 इंच तक कचरा भरा हुआ है। इस पर जस्टिस अमानुल्लाह ने पूछा:“आपकी हिम्मत कैसे हुई इसे गौशाला के रूप में इस्तेमाल करने देने की?… मुझे नहीं लगता कि MCD में स्मारकों के रखरखाव की क्षमता है।”
- ASI पर तीखा हमला:ASI के महानिदेशक को संबोधित करते हुए पीठ ने कहा:“वे सिर्फ फंड एकत्र करना चाहते हैं, अपने सुरक्षा गार्ड तैनात कर देते हैं और कोई काम नहीं करते। दिल्ली में कोई भी ASI के स्थलों पर नहीं जाएगा। ASI पूरी तरह से अपनी विश्वसनीयता खो चुका है… वे केवल अनुदान प्राप्त करते हैं और पे-रोल पर सैकड़ों लोगों को रखे हुए हैं।”
सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश (Order)
हालांकि पीठ अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक आदेश पारित करना चाहती थी, लेकिन वकीलों के अनुरोध पर अंतिम अवसर देते हुए निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:
- संस्कृति मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया: अदालत ने कहा कि विभिन्न सरकारी निकायों (MCD, DDA, ASI, NDMC) के बीच तालमेल की भारी कमी है। इसलिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) को मामले में पक्षकार बनाया जाता है।
- शीर्ष अधिकारियों की अनिवार्य व्यक्तिगत उपस्थिति: अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 (दोपहर 1:00 बजे) को तय की गई है। कोर्ट ने आदेश दिया कि संस्कृति सचिव, MCD कमिश्नर, NDMC प्रमुख, दिल्ली पुरातत्व विभाग के सचिव, ASI के महानिदेशक, DDA के उपाध्यक्ष और CPWD के महानिदेशक व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहेंगे। किसी भी प्रतिनिधि (Nominee) को भेजने की अनुमति नहीं होगी।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक धरोहरों (Heritage Sites) के संरक्षण में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और दिल्ली नगर निगम (MCD) की घोर लापरवाही, सदियों पुराने संरक्षित स्मारकों को कूड़ाघर (Dumping Yard) और गौशाला (Cow Shed) में तब्दील किए जाने, 13वीं सदी के ऐतिहासिक ‘लाल महल’ पर निजी बिल्डरों द्वारा अतिक्रमण व विध्वंस, तथा अदालतों में अधिकारियों द्वारा झूठे हलफनामे (False Affidavits) दाखिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त और अभूतपूर्व रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एएसआई पूरी तरह अपनी विश्वसनीयता खो चुका है और दिल्ली में उसका कोई भी स्थल अब देखने लायक नहीं बचा है।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की खंडपीठ ने 7 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कोर्ट कमिश्नर गोपाल शंकरनारायणन की रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ ने अधिकारियों के “लापरवाह और शांतिपूर्ण अज्ञान” (Peacefully Ignorant) वाले रवैये पर भारी नाराजगी जताई। अदालत ने अंतिम अवसर देते हुए केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव, एमसीडी कमिश्नर, एनडीएमसी अध्यक्ष, दिल्ली पुरातत्व विभाग के सचिव, एएसआई के महानिदेशक (DG ASI), डीडीए के उपाध्यक्ष (VC DDA) और सीपीडब्ल्यूडी के महानिदेशक (DG CPWD) को 16 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1:00 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का कड़ा फरमान सुनाया है।
शीर्ष अदालत की तीखी टिप्पणियां एवं मौखिक फटकार
1. ‘एएसआई ने विश्वसनीयता खो दी—केवल अनुदान कमाने और पे-रोल बढ़ाने का काम बचा है’
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने अदालत में मौजूद एएसआई के महानिदेशक (DG) को आड़े हाथों लेते हुए कहा: “वे केवल फंड इकट्ठा करना चाहते हैं, अपने गार्ड वहां खड़े कर देते हैं, वहां कोई हलचल तक नहीं होती। दिल्ली में एएसआई के स्थलों पर अब कोई नहीं जाएगा। एएसआई पूरी तरह अपनी विश्वसनीयता खो चुका है (ASI has totally lost their credibility)। करने के लिए कुछ नहीं है, वे केवल ग्रांट (सरकारी अनुदान) कमाते हैं और पे-रोल पर सैकड़ों लोगों की फौज पाल रखी है…”
2. ‘स्मारक में गौशाला चलाने की हिम्मत कैसे हुई? एमसीडी के बस का कुछ नहीं’
ज़मरूदपुर (Zamroodpur) में लोधी-युगीन मकबरे में गायें बांधे जाने और उसे कचरा घर बनाए जाने पर कोर्ट ने एमसीडी से पूछा:
- “आपकी हिम्मत कैसे हुई इसे गौशाला (Cow Shed) के रूप में इस्तेमाल करने की?”
- पीठ ने कहा कि यह कोई इत्तेफाक नहीं है, स्मारकों के फर्श पर 14 से 16 इंच तक कचरे का ढेर लगा दिया गया है, जिसे साफ करने में 20 साल लग जाएंगे। अदालत ने दो-टूक कहा कि एमसीडी अब दिल्ली में किसी भी हेरिटेज साइट के रखरखाव के काबिल नहीं रह गई है।
3. 13वीं सदी का ‘लाल महल’ और अधिकारियों को सीधे निलंबित करने की चेतावनी:
- कोर्ट कमिश्नर ने बताया कि प्रसिद्ध ऐतिहासिक यात्री इब्न बतूता के यात्रा वृत्तांतों में वर्णित 13वीं सदी का ‘लाल महल’ (निजामुद्दीन) न केवल आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया है, बल्कि उस पर निजी बिल्डरों ने अवैध कब्जा कर लिया है। जब कोर्ट कमिश्नर निरीक्षण करने गए, तो उन्हें निजी संपत्ति बताकर अंदर नहीं जाने दिया गया।
- जब एमसीडी के वकील सीनियर एडवोकेट एस.डी. संजय ने कहा कि वह निजी जमीन है और एमसीडी के दायरे में नहीं आती, तो पीठ ने उस निजी जमीन का ‘होल्डिंग नंबर’ मांगा। वकील के निरुत्तर होने पर अदालत भड़क गई:“आप पूरी तरह गैर-जिम्मेदार हैं… उन तीन अधिकारियों के नाम बताइए जिन्होंने आपको यह निर्देश दिया है और बिना जाने हलफनामा दायर किया है! हम उन्हें आज ही इसी अदालत से तुरंत निलंबित (Suspend) कर देंगे। यह अविश्वसनीय रूप से स्तब्ध करने वाला है।”
सुप्रीम कोर्ट का औपचारिक आदेश: कोई प्रतिनिधि नहीं, शीर्ष अधिकारी खुद आएं
पीठ ने अपने लिखित आदेश में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय के पूर्ण अभाव को दर्ज किया:
- अधिकारियों की गैर-गंभीरता: अदालत ने दर्ज किया कि विभिन्न विभागों के अधिकारी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। वे अदालतों में जो दावे करते हैं और ज़मीन पर जो हकीकत है, उसमें जमीन-आसमान का अंतर है।
- अंतिम मोहलत (Last Indulgence): वकीलों के अनुरोध पर अदालत ने अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने या दंडात्मक आदेश पारित करने से खुद को रोका, परंतु इसे आखिरी रियायत बताया।
- संस्कृति मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया: अदालत ने मामले में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय (Department of History and Culture) को सचिव के माध्यम से नया पक्षकार बनाया।
- 16 अक्टूबर को व्यक्तिगत पेशी का आदेश:
- 16 अक्टूबर 2026 (दोपहर 1:00 बजे) निम्नलिखित सभी शीर्ष अधिकारियों को सशरीर उपस्थित रहना होगा:
- सचिव, संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार)
- आयुक्त, दिल्ली नगर निगम (MCD)
- अध्यक्ष, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC)
- सचिव, पुरातत्व विभाग (NCT दिल्ली)
- महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
- उपाध्यक्ष, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA)
- महानिदेशक, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD)
- दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) के अधिकारी
- सख्त हिदायत: “इन अधिकारियों की अन्य सभी व्यस्तताएं और बैठकें रद्द मानी जाएंगी। इस अदालत में कोई भी स्थानापन्न (Substitute) या प्रतिनिधि/नॉमिनी नहीं भेजा जाएगा।”
- 16 अक्टूबर 2026 (दोपहर 1:00 बजे) निम्नलिखित सभी शीर्ष अधिकारियों को सशरीर उपस्थित रहना होगा:
- दिल्ली गोल्फ क्लब को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश: दिल्ली गोल्फ क्लब द्वारा दाखिल हलफनामे पर भी कोर्ट ने असंतोष जताया और नियमों के तहत विस्तृत प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए नया हलफनामा देने को कहा।
मामले की पृष्ठभूमि: ‘शेख अली गुमटी’ से शुरू हुआ दायरा
- यह मामला मूल रूप से लोधी काल के स्मारक शेख अली ‘गुमटी’ के संरक्षण को लेकर शुरू हुआ था।
- बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन को न्यायमित्र/कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करते हुए इसका दायरा दिल्ली के सभी उपेक्षित स्मारकों तक बढ़ा दिया।
- कोर्ट कमिश्नर द्वारा समाचार पत्रों की खोजी रिपोर्टों और ज़मीनी मुआयने के आधार पर जब अदालत को बताया गया कि अधिकारी हलफनामे में स्मारकों को “सुरक्षित व सुव्यवस्थित” बताकर झूठी गवाही दे रहे हैं, जबकि असलियत में वहां मवेशी बाड़े और कूड़े के ढेर हैं, तब शीर्ष अदालत ने यह सख्त रुख अपनाया।
विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act, 1958):
- अधिनियम की धारा 4 और 18 के तहत राष्ट्रीय महत्व के घोषित स्मारकों का संरक्षण, अतिक्रमण हटाना और उनका सौंदर्यीकरण एएसआई का वैधानिक कर्तव्य है।
- धारा 30A से 30C के तहत संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के निषिद्ध क्षेत्र (Prohibited Area) में कोई भी निर्माण अवैध और गैर-जमानती अपराध है।
- संविधान का अनुच्छेद 49 (राज्य के नीति निदेशक तत्व):
- राज्य का यह बाध्यकारी दायित्व है कि वह कलात्मक या ऐतिहासिक रुचि के प्रत्येक संस्मारक या स्थान को विरूपण, विनाश, अपसारण या निर्यात से संरक्षित करे।
- संविधान का अनुच्छेद 51A(f) (मौलिक कर्तव्य):
- देश की सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझना और उसका परिरक्षण करना प्रत्येक नागरिक और संस्था का कर्तव्य है।
- झूठा हलफनामा दाखिल करने पर अवमानना (Perjury & Contempt):
- न्यायालय के समक्ष झूठी स्थिति रिपोर्ट पेश करना भारतीय न्याय संहिता / आईपीसी की धारा 193 और न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत सीधा अपराध बनता है, जिस पर अदालत ने निलंबन की चेतावनी दी।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: इन रे: दिल्ली में ऐतिहासिक स्मारकों और हेरिटेज साइट्स का संरक्षण [रिट याचिका – सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 7 अक्टूबर 2026
- अगली सुनवाई एवं व्यक्तिगत पेशी की तिथि: 16 अक्टूबर 2026 (दोपहर 1:00 बजे)
- विधिक सहभागिता:
- कोर्ट कमिश्नर / न्यायमित्र: वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन
- एमसीडी की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता एस.डी. संजय
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act)
- दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 (MCD Act)
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 49, अनुच्छेद 51A(f), अनुच्छेद 32 एवं अनुच्छेद 142
- न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971
- वर्तमान स्थिति: एएसआई और एमसीडी की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार; केंद्र के संस्कृति सचिव सहित 7 शीर्ष विभागों के प्रमुखों को 16 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया।
Delhi Monument: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. के. सिंह) |
| मामला | दिल्ली के ऐतिहासिक व विरासत स्थलों (Lodhi Era Monumets, Lal Mahal) का संरक्षण |
| अदालत आयुक्त (Court Commissioner) | वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन |
| मुद्दे | ज़मरूदपुर मकबरे में गौशाला व 16 इंच गहरा कचरा जमा होना; 13वीं सदी के ‘लाल महल’ पर निजी अतिक्रमण |
| अदालत का अगला कदम | 16 अक्टूबर 2026 को संस्कृति सचिव, ASI महानिदेशक, MCD कमिश्नर, NDMC, DDA, CPWD प्रमुखों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी। |

