याचिका में उठाए गए मुख्य कानूनी बिंदु
- खोज समिति (Search Committee) के पैनल पर सवाल (धारा 6):
- नियम के अनुसार खोज समिति को प्रत्येक रिक्ति (Vacancy) के लिए 5 नामों का पैनल (यानी 2 पदों के लिए 10 नाम) तैयार करना था।
- याचिका के अनुसार मार्च 2024 में 2 रिक्तियों के लिए खोज समिति ने केवल 6 नामों की सिफारिश की, जो कि वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
- इसके अलावा, चयन समिति की बैठक वाले दिन ही शॉर्टलिस्ट और अंतिम चयन बहुत ही जल्दबाजी में किया गया।
- चुनाव प्रबंधन के अनुभव (Election Experience) का अभाव (धारा 5):
- धारा 5 के अनुसार केवल उन्हीं व्यक्तियों की नियुक्ति हो सकती है जिन्हें चुनाव प्रबंधन और संचालन में विशिष्ट ज्ञान या अनुभव हो।
- याचिका में कहा गया है कि ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के आधिकारिक प्रोफाइल और एग्जीक्यूटिव रिकॉर्ड में किसी विशिष्ट चुनाव प्रबंधन पद का उल्लेख नहीं मिलता है।
- 2025 में हुई पदोन्नति/नियुक्ति की प्रक्रिया को चुनौती:
- याचिका में 17 फरवरी 2025 के उस आदेश को भी अलग से चुनौती दी गई है जिसके तहत ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयुक्त से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पदोन्नत किया गया और विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया।
- याचिकाकर्ता का तर्क है कि EC से CEC के रूप में पदोन्नति के लिए भी अधिनियम की धारा 5 से 8 की प्रक्रियाओं (ताज़ा पैनल और पारदर्शी चयन) का स्वतंत्र रूप से पालन होना अनिवार्य था।
- मांगी गई अंतरिम राहत (Interim Relief):
- मूल खोज समिति और चयन समिति की कार्यवाही के मूल रिकॉर्ड (Original Records) को अदालत में पेश करने और सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए।
- यदि सुप्रीम कोर्ट पाता है कि नियुक्तियां कानून के खिलाफ थीं, तो इन पदों को रिक्त घोषित किया जाए।
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त (EC) सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की नियुक्तियों में ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023’ के अनिवार्य वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिकाकर्ता सूरी पायला (Suri Payala) द्वारा एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR) अनिल कुमार के माध्यम से दायर इस याचिका में 14 मार्च 2024 (ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू की बतौर चुनाव आयुक्त नियुक्ति) तथा 17 फरवरी 2025 (ज्ञानेश कुमार की मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदोन्नति और विवेक जोशी की चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति) की अधिसूचनाओं को सीधे चुनौती दी गई है। याचिका में 2023 के अधिनियम की धारा 5, 6 और 8(1) के घोर उल्लंघन का दावा किया गया है। याचिका में शीर्ष अदालत से अधिकार पृच्छा (Writ of Quo Warranto) जारी करने की मांग की गई है, जिसके तहत तीनों शीर्ष चुनाव अधिकारियों से पूछा जाए कि वे किस प्राधिकार (Authority of Law) के तहत इन संवैधानिक पदों पर आसीन हैं, और यदि उनकी नियुक्तियां अवैध पाई जाएं तो इन पदों को रिक्त घोषित किया जाए।
याचिका में उठाए गए प्रमुख विधिक आधार एवं सांविधिक उल्लंघन
1. सर्च कमेटी द्वारा पैनल तैयार करने में विफलता (धारा 6 का उल्लंघन)
- प्रति रिक्ति 5 नामों का अनिवार्य नियम:
- 2023 के अधिनियम की धारा 6 के अनुसार, सर्च कमेटी (खोज समिति) को चयन समिति (Selection Committee) के विचारार्थ प्रत्येक रिक्ति के लिए पांच उपयुक्त व्यक्तियों का पैनल तैयार करना आवश्यक है।
- मार्च 2024 में चुनाव आयुक्तों के दो पद रिक्त थे। याचिका में कहा गया है कि कानून के अनुसार 10 नामों का पैनल तैयार किया जाना चाहिए था, परंतु सर्च कमेटी ने दो रिक्तियों के लिए केवल छह नाम ही अनुशंसित किए।
- सुप्रीम कोर्ट के 22 मार्च 2024 के आदेश का हवाला:
- याचिका में 2023 के अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 22 मार्च 2024 को पारित सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर भरोसा जताया गया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से दर्ज किया था कि दो रिक्तियों के लिए 10 नामों की आवश्यकता थी।
- अदालत ने तब जल्दबाजी में अपनाई गई प्रक्रिया पर भी चिंता जताई थी और कहा था कि चयन समिति के सदस्यों के साथ पूरी पृष्ठभूमि और विवरण पहले से साझा किए बिना नियुक्ति नहीं की जानी चाहिए।
- 200+ नामों की सूची और एक दिन में चयन:
- याचिका में आरोप लगाया गया कि 13 मार्च 2024 को विधायी विभाग के सचिव ने विपक्ष के नेता को 200 से अधिक व्यक्तियों की एक अनौपचारिक सूची भेजी, जबकि उस समय सर्च कमेटी ने शॉर्टलिस्ट तक तैयार नहीं की थी।
- अगले ही दिन (14 मार्च) सर्च कमेटी ने 6 नामों की सिफारिश की और उसी दिन चयन समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू के नामों पर मुहर लगा दी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि क्या इन 6 नामों को वास्तव में धारा 6 के तहत विधिवत गठित “पैनल” माना जा सकता है?
2. चुनाव प्रबंधन के प्रमाणित अनुभव का अभाव (धारा 5 की अर्हता का उल्लंघन)
- धारा 5 के तहत वैधानिक अहर्ता:
- 2023 अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, चुनाव आयुक्त के पद पर केवल वही व्यक्ति नियुक्त हो सकता है जो भारत सरकार के सचिव स्तर का पद धारण कर चुका हो, सत्यनिष्ठ हो और “चुनावों के प्रबंधन एवं संचालन का ज्ञान तथा अनुभव रखता हो” (Knowledge and experience in management and conduct of elections)।
- एग्जीक्यूटिव रिकॉर्ड शीट्स (ERS) में शून्य अनुभव:
- ज्ञानेश कुमार: उनकी आधिकारिक रिकॉर्ड शीट में 26 विभिन्न पदों की पदस्थापना दर्ज है, परंतु इनमें से किसी को भी ‘चुनाव प्रबंधन’ से संबंधित वर्गीकृत नहीं किया गया है। यद्यपि वे एर्नाकुलम के जिला कलेक्टर रहे, परंतु रिकॉर्ड में वह पद ‘भू-राजस्व प्रबंधन और जिला प्रशासन’ के तहत दर्ज है। सार्वजनिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उन्होंने कभी जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) या चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में कार्य किया हो।
- सुखबीर सिंह संधू: उनके रिकॉर्ड में उत्तराखंड के मुख्य सचिव, एनएचएआई (NHAI) के अध्यक्ष और लोकपाल के सचिव जैसे वरिष्ठ पद दर्ज हैं, लेकिन चुनाव प्रबंधन का कोई विशिष्ट अनुभव परिलक्षित नहीं होता।
- विवेक जोशी: हरियाणा के मुख्य सचिव, भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त, तथा डीओपीटी/वित्तीय सेवा विभाग के सचिव रहे, परंतु आधिकारिक प्रोफाइल में चुनाव संचालन से जुड़ा कोई विशिष्ट कार्य दर्ज नहीं है।
3. फरवरी 2025 में CEC और EC की नियुक्तियों में स्वतंत्र प्रक्रिया की अनदेखी
- 17 फरवरी 2025 को ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयुक्त से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के पद पर पदोन्नत किया गया और उसी बैठक में खाली हुए चुनाव आयुक्त के पद पर विवेक जोशी को नियुक्त किया गया।
- याचिका में तर्क दिया गया है कि सीईसी की नई नियुक्ति के लिए भी 2023 के अधिनियम की धारा 5 से 8 के तहत सभी चरणों का नए सिरे से स्वतंत्र अनुपालन (सर्च कमेटी का नया पैनल और पारदर्शी चयन प्रक्रिया) किया जाना अनिवार्य था।
- याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि क्या चयन समिति ने चयन करने से पूर्व अपनी आंतरिक प्रक्रिया और नियमों को पारदर्शी तरीके से अंगीकार और सार्वजनिक किया था, जैसा कि धारा 8(1) के तहत अपेक्षित है?
याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई प्रमुख राहतें (Prayers)
- अधिकार पृच्छा (Quo Warranto) की रिट: शीर्ष अदालत ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के विरुद्ध ‘क्वो वारंटो’ रिट जारी करे, जिसमें उनसे यह साबित करने को कहा जाए कि वे किस कानूनी अधिकार के तहत अपने पदों पर बने हुए हैं; तथा वैध अधिकार के अभाव में इन पदों को तत्काल प्रभाव से रिक्त घोषित किया जाए।
- मूल अभिलेख तलब करना: 2024 और 2025 की सर्च कमेटी और चयन समिति की संपूर्ण बैठकों और कार्यवाही के मूल अभिलेख (Original Records) न्यायालय में मंगाए जाएं। (याचिकाकर्ता ने बताया कि 27 सितंबर 2026 और 2 अक्टूबर 2026 को दायर आरटीआई अर्जियां अभी भी लंबित हैं)।
- अंतरिम सुरक्षा उपाय: याचिका के लंबित रहने के दौरान भविष्य में किसी भी सीईसी या ईसी की नियुक्ति के लिए कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं—जैसे सर्च कमेटी के मापदंडों का अग्रिम प्रकटीकरण, प्रत्येक रिक्ति के लिए अनिवार्य 5 नामों का पैनल, और चयन के आधारों का लिखित रिकॉर्ड संधारण।
पृष्ठभूमि: एसआईआर (SIR) विवाद और विरोध प्रदर्शन
यह याचिका ऐसे समय में शीर्ष अदालत के समक्ष पहुंची है जब:
- विपक्षी दलों और ‘सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
- इसी सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को उन याचिकाओं पर भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि सीईसी ने अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए एकतरफा निर्णय लिए।
CEC Row:विधिक एवं संवैधानिक महत्व के प्रश्न
याचिका ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष निम्नलिखित महत्वपूर्ण संवैधानिक व विधिक प्रश्न खड़े किए हैं:
| विधिक प्रश्न | संबंधित सांविधिक / संवैधानिक प्रावधान |
| क्या धारा 6 के तहत प्रत्येक रिक्ति के लिए अनिवार्यतः 5 नामों (2 रिक्तियों के लिए 10 नाम) का पैनल बनना बाध्यकारी है? | अधिनियम, 2023 की धारा 6 |
| क्या धारा 5 के तहत ‘चुनाव प्रबंधन का पूर्व अनुभव’ नियुक्ति की एक अनिवार्य और जांच-योग्य (Justiciable) पूर्व-शर्त है? | अधिनियम, 2023 की धारा 5 |
| क्या किसी सेवारत चुनाव आयुक्त को सीईसी के पद पर पदोन्नत करते समय नए पैनल और संपूर्ण चयन प्रक्रिया का नए सिरे से पालन आवश्यक है? | अधिनियम, 2023 की धारा 6, 7 एवं 8 |
| क्या संविधान के अनुच्छेद 324(5) (हटाने की प्रक्रिया) के होते हुए भी अवैध नियुक्ति की स्थिति में सीईसी/ईसी के विरुद्ध ‘अधिकार पृच्छा’ (Quo Warranto) की रिट पोषणीय है? | भारत का संविधान — अनुच्छेद 32, 226 एवं 324(5) |
CEC Row:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| याचिकाकर्ता | सूरी पायाला (एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनिल कुमार के माध्यम से) |
| प्रतिवादी अधिकारी | CEC ज्ञानेश कुमार, EC सुखबीर सिंह संधू और EC विवेक जोशी |
| मांगी गई रिट | कुओ वारंटो (Quo Warranto – अधिकार पृच्छा रिट) |
| मुख्य कानूनी आधार | 2023 अधिनियम की धारा 5 (पात्रता), धारा 6 (खोज समिति की भूमिका) और धारा 8(1) (पारदर्शिता) का उल्लंघन |

