NHRC की मुख्य टिप्पणियाँ और निर्देश (Key Directions)
- बाल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन:एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि यह मामला केवल सार्वजनिक सभा में बच्चों की उपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिगों का सुनियोजित इस्तेमाल और शोषण है। यह बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 और 83(2) के तहत अपराध के दायरे में आता है।
- मुंबई पुलिस को निर्देश:
- तुरंत जांच करें और संज्ञेय अपराध प्रकट होने पर एफआईआर (FIR) दर्ज करें।
- उन आयोजकों, अभिभावकों और व्यक्तियों की पहचान करें जिन्होंने बच्चों को उकसाया, लाया या लामबंद किया।
- जांच करें कि क्या पुलिस कार्रवाई को रोकने के लिए बच्चों को शामिल करने की योजना पहले से बनाई गई थी।
- X Corp. और MeitY को निर्देश:
- X Corp: विवादित कंटेंट और उससे जुड़े खातों के पूरे डिजिटल साक्ष्यों (IP डिटेल्स, टाइमस्टैम्प, URL आदि) को सुरक्षित रखे और जानकारी उपलब्ध कराए।
- MeitY: जांच करे कि X Corp ने IT एक्ट 2000 और IT रूल्स 2021 के तहत बाल सुरक्षा और ‘ड्यू डिलिजेंस’ (Due Diligence) के नियमों का पालन किया या नहीं।
- महाराष्ट्र बाल विकास विभाग: बच्चों के रेस्क्यू, देखभाल और सुरक्षा की व्यवस्था तुरंत JJ Act के तहत सुनिश्चित करे।
नई दिल्ली/मुंबई: सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक जमावड़ों में नाबालिग बच्चों के अनुचित उपयोग, पुलिस कार्रवाई व कानूनी हिरासत से बचने के लिए बच्चों को ‘मानव ढाल’ (Shield) की तरह इस्तेमाल करने के गंभीर आरोपों, और सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें व वीडियो प्रसारित कर उनकी निजता व सुरक्षा को जोखिम में डालने के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए मुंबई पुलिस आयुक्त, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X Corp.’ (पूर्व में ट्विटर) के भारत स्थित शिकायत अधिकारी और महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को औपचारिक नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में पारित आदेश में रेखांकित किया गया कि यह मामला केवल किसी सार्वजनिक सभा में बच्चों की सामान्य उपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सुभेद्यता (Vulnerability) और उम्र का पूर्व ज्ञान होते हुए भी उन्हें कानूनन वैधानिक पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध ढाल के रूप में तैनात करने की सोची-समझी साजिश का गंभीर बाल-अधिकार व मानवाधिकार उल्लंघन प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के प्रमुख निष्कर्ष एवं टिप्पणियां
1. ‘बच्चों को पुलिस कार्रवाई के खिलाफ ढाल के रूप में इस्तेमाल करना गंभीर चिंता का विषय’ आयोग ने मामले के विधिक और सुरक्षात्मक पहलुओं को रेखांकित करते हुए स्पष्ट दर्ज किया: *”आयोग यह संज्ञान लेता है कि यह मुद्दा किसी सार्वजनिक सभा में बच्चों की मात्र सामान्य उपस्थिति तक सीमित नहीं है। यदि लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह बच्चों की उम्र और उनकी सुभेद्यता (Vulnerability) की जानकारी होने के बावजूद नाबालिगों के सुनियोजित जुटाव (Planned Mobilisation) या सुनियोजित उपयोग (Instrumental Use) से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर प्रश्न खड़ा करते हैं—जिसमें कानून-सम्मत पुलिस कार्रवाई के खिलाफ उन्हें एक ढाल (Shield) के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना और बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रसारित तस्वीरों/वीडियो के माध्यम से उनके जीवन व सुरक्षा को जोखिम में डालना शामिल है।”*
2. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 और 83(2) के तहत आपराधिक जांच की अनिवार्यता: आयोग ने निर्देश दिया कि इस पूरे घटनाक्रम की जांच बाल संरक्षण और आपराधिक कानून के कड़े ढांचे के तहत की जानी चाहिए:
- किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act, 2015) की धारा 75 (बच्चों के प्रति क्रूरता और शारीरिक/मानसिक प्रताड़ना) और धारा 83(2) (वयस्कों या संगठित समूहों द्वारा किसी भी गैर-कानूनी या प्रदर्शनकारी गतिविधि के लिए बच्चों का उपयोग करना)।
- जिन व्यक्तियों के पास उन बच्चों की वास्तविक अभिरक्षा या नियंत्रण था, आयोजक, समन्वयक, साथ मौजूद वयस्क और बच्चों को लाने, प्रेरित करने या प्रोत्साहित करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की आपराधिक भूमिका की जांच अनिवार्य है।
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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: शिवाजी पार्क का प्रदर्शन और सोशल मीडिया विवाद
- 2 अक्टूबर 2026 का विरोध-प्रदर्शन:
- मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में एक सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया था।
- यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था, जो द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आयोजित हुआ जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 अलग-अलग अवसरों पर आधिकारिक फाइलों पर असहमति (Dissent) दर्ज कराई थी।
- शिकायत और वीडियो साक्ष्य:
- ‘सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन’ (Sewa Nyaya Utthan Foundation) और एक अन्य संस्था द्वारा एनएचआरसी में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
- शिकायत में ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर प्रसारित उन वीडियो और तस्वीरों का हवाला दिया गया, जिसमें एक छोटे बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाया गया था, बच्चे के हाथ में राष्ट्रीय ध्वज और एक तख्ती (Placard) थी, जबकि आसपास भीड़ नारेबाजी कर रही थी और कई लोग मोबाइल फोन से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे।
- शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों का संबंध ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े व्यक्तियों से था।
- व्हाट्सएप/ग्रुप चैट में पूर्व-नियोजित साजिश के आरोप:
- आयोग के समक्ष प्रस्तुत सामग्री में कुछ कथित चैट/ग्रुप विमर्शों का हवाला दिया गया, जिसमें दावा किया गया कि विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाते समय नाबालिग बच्चों को लाने पर पहले से चर्चा की गई थी।
- चैट में कथित तौर पर यह आधार बनाया गया था कि “पुलिस छोटे बच्चों को हिरासत में नहीं लेगी”, जिससे यह गंभीर आशंका पैदा होती है कि वैध पुलिस कार्रवाई को रोकने, बाधित करने या टालने के लिए जानबूझकर बच्चों की नाबालिग स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की गई।
- आयोग ने सामग्री में अजिंक्य शिंदे, अभिजीत दिपके, सौरव दास और अन्य व्यक्तियों के नामों का भी उल्लेख पाया, जिनकी डिजिटल बातचीत और समन्वय की स्वतंत्र जांच के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग द्वारा विभिन्न प्राधिकारियों को जारी विशिष्ट निर्देश
- मुंबई पुलिस आयुक्त को निर्देश:
- पूरे वीडियो, फोटोग्राफिक और सोशल मीडिया फुटेज की तत्काल पड़ताल करें। जहां भी कोई संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) बनता दिखाई दे, वहां तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानून के अनुसार त्वरित और निष्पक्ष जांच करें।
- यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को लाने वाले अभिभावकों, आयोजकों और उकसाने वाले व्यक्तियों की पहचान की जाए।
- यह पता लगाएं कि क्या बच्चों को “पुलिस हिरासत से बचने के लिए ढाल” बनाने की पूर्व-योजना बनाई गई थी।
- X Corp. (पूर्व में ट्विटर) को निर्देश:
- संबंधित सामग्री, पोस्ट, यूजर अकाउंट, आईपी (IP) एड्रेस, यूआरएल, टाइमस्टैम्प और संपूर्ण मेटाडेटा के डिजिटल साक्ष्य पथ (Digital Evidentiary Trail) को तत्काल सुरक्षित (Preserve) रखें।
- जांच एजेंसियों को संपूर्ण विवरण उपलब्ध कराएं, भले ही उन पोस्टों को सार्वजनिक दृश्य से हटा (Delete/Restrict) दिया गया हो।
- केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) को निर्देश:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 (IT Rules, 2021) के तहत सोशल मीडिया मध्यवर्ती (Intermediary) द्वारा बरती जाने वाली ‘उचित सावधानी’ (Due Diligence) और बाल सुरक्षा दायित्वों के अनुपालन की जांच करें।
- यह समीक्षा करें कि बच्चों से जुड़ी ऐसी आपत्तिजनक व संवेदनशील सामग्री को प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने की अनुमति कैसे मिली और क्या कंटेंट मॉडरेशन के नियमों का उल्लंघन हुआ।
- महिला एवं बाल विकास विभाग, महाराष्ट्र:
- प्रदर्शन में शामिल बच्चों की पहचान कर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत उनके बचाव, आवश्यक काउंसलिंग, देखरेख और सुरक्षा सुनिश्चित करें।
(समानांतर संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग द्वारा बिना पूर्ण आयोग की सहमति या अन्य चुनाव आयुक्तों की बहुमत राय के विपरीत लिए गए सभी प्रशासनिक निर्णयों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर संशोधनों को चुनौती दी गई है।)
विधिक विवरण
- प्राधिकरण: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली
- आदेश की तिथि: अक्टूबर 2026
- कार्यवाही का प्रकार: मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance)
- पीठासीन सदस्य: प्रियंक कानूनगो (माननीय सदस्य, NHRC)
- पक्षकार/नोटिस पाने वाले प्राधिकारी:
- पुलिस आयुक्त, मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र
- सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार
- नोडल/शिकायत अधिकारी, X Corp. (India)
- प्रधान सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, महाराष्ट्र शासन
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (Protection of Human Rights Act, 1993) की धारा 12 (मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की जांच और संज्ञान लेने की आयोग की शक्तियां)
- किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act, 2015):
- धारा 75 (बच्चे के प्रति क्रूरता और उपेक्षा का दंडात्मक प्रावधान)
- धारा 83(2) (वयस्कों द्वारा किसी भी अवैध या संगठित गतिविधियों में बच्चों को शामिल करने/इस्तेमाल करने पर 7 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान)
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 एवं सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (मध्यवर्ती संस्थाओं के लिए बाल सुरक्षा और डेटा संरक्षण के अनिवार्य दायित्व)
- भारत का संविधान:
- अनुच्छेद 21 (बच्चों के गरिमापूर्ण जीवन, निजता और शारीरिक सुरक्षा का मौलिक अधिकार)
- अनुच्छेद 39(e) एवं (f) (राज्य के नीति निदेशक तत्व — बच्चों के स्वास्थ्य, गरिमा और शोषण से मुक्ति का संरक्षण)
- अंतिम निर्देश: सभी प्रतिवादी प्राधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) और प्रासंगिक दस्तावेज आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश।
CJP Protest: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित आयोग | राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) |
| पीठासीन सदस्य | प्रियंक कानूनगो (Priyank Kanoongo) |
| घटना की तारीख व स्थान | 2 अक्टूबर 2026, शिवाजी पार्क, मुंबई |
| संबंधित संस्थाएं/पक्षकार | मुंबई पुलिस, MeitY, X Corp (Twitter), महिला एवं बाल विकास विभाग (महाराष्ट्र) |
| मुख्य कानूनी प्रावधान | Juvenile Justice Act, 2015 (धारा 75 व 83(2)) एवं IT Act, 2000 |

