Wednesday, October 14, 2026
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Old Monk: ओल्ड मोंक पर प्रतिबंध से कंपनी को नुकसान हुआ; FSSAI बोला- Rum नहीं, लेबल पर Rum-Like लिखना होगा; प्रतिबंध को निर्माता कंपनी ने दी चुनौती

विवाद का मूल कारण: FSSAI की आपत्तियां और लेबलिंग नियम

  1. ‘Rum’ बनाम ‘Rum-Like’ का विवाद:FSSAI का तर्क है कि मानक न्यूट्रल स्पिरिट्स में बाहर से कृत्रिम या प्रकृति-समरूप (Artificial or Nature-Identical) रम फ्लेवर मिलाने से मूल उत्पाद की संरचना छिप जाती है। FSSAI के अनुसार, जब तक उत्पाद को केवल “Rum” के बजाय “Flavoured Spirit with Rum Flavour” या “Rum-Like” न लिखा जाए, तब तक यह उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला और मानक से कम (Sub-standard) माना जाएगा।
  2. आयु विवरण (Ageing Descriptors) पर रोक:FSSAI ने ओल्ड मोंक की बोतलों पर लिखे जाने वाले ‘7 Years Old Blended’ और ‘Very Old Vatted’ जैसे दावों पर भी रोक लगा दी है, जिन्हें प्राधिकरण ने भ्रामक माना है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में कंपनी की दलीलें

  1. भारी वित्तीय और आबकारी नुकसान:कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने पीठ को बताया कि ठाणे जिले की विनिर्माण इकाई से बिक्री पर लगी रोक के कारण कंपनी को ₹500 करोड़ से अधिक का सीधा नुकसान हुआ है, जबकि महाराष्ट्र सरकार का आबकारी राजस्व भी ₹350 करोड़ से अधिक घट गया है।
  2. भेदभाव का आरोप:कंपनी ने तर्क दिया कि महाराष्ट्र की अन्य इकाइयों और प्रतिस्पर्धी कंपनियों द्वारा भी समान प्रक्रिया से बनी रम बेची जा रही है, लेकिन केवल ओल्ड मोंक की ठाणे यूनिट पर यह प्रतिबंध लगाया गया है।
  3. गतिरोध सुलझाने के प्रयास विफल:कंपनी ने पहले विवादित उम्र के विवरण (Age Descriptors) हटाकर और बोतलों पर ‘Added Flavor’ प्रमुखता से लिखकर नए लेबल FSSAI के पास भेजे थे। हालांकि, FSSAI द्वारा उन संशोधनों को खारिज किए जाने के बाद कंपनी ने मामले को गुण-दोष (Merits) के आधार पर सुनने का आग्रह किया।

केंद्र सरकार (FSSAI) का रुख

अपर सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह ने FSSAI की ओर से अदालत में दोहराया कि यदि कंपनी अपने बोतलों के लेबल में संशोधन कर उत्पाद को शुद्ध “रम” के बजाय “रम-जैसी” (Rum-like / Flavoured spirit) घोषित करने के लिए सहमत होती है, तो अधिकारियों द्वारा बिक्री की अनुमति दी जा सकती है।

मुंबई: खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006 – FSSA), एफएसएसएआई (FSSAI) के अल्कोहलिक बेवरेज विनियम, शराब उत्पादों में कृत्रिम/प्रकृति-समरूप स्वाद (Added Artificial/Nature-Identical Rum Flavours) के उपयोग, लेबलिंग मानकों और उपभोक्ताओं को भ्रामक जानकारी देने (Misleading Labeling & Age Descriptors), तथा राज्य के आबकारी राजस्व और व्यावसायिक नुकसान के विधिक टकराव पर बॉम्बे हाईकोर्ट में एक बड़ा मामला सामने आया है।

भारत के सबसे लोकप्रिय रम ब्रांडों में से एक ‘ओल्ड मोंक’ (Old Monk) की निर्माता कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा उसकी ठाणे जिला स्थित इकाई की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण कंपनी को ₹500 करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष वित्तीय घाटा हुआ है, जबकि महाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग को भी लगभग ₹350 करोड़ के आबकारी राजस्व (Excise Revenue) का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष सोमवार (12 अक्टूबर 2026) को इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अंतिम व गुण-दोष आधारित सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 के लिए तय की है।

उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत प्रमुख विधिक दलीलें एवं टकराव के बिंदु

1. निर्माता कंपनी का पक्ष: ‘₹350 करोड़ का सरकारी नुकसान और चयनात्मक कार्रवाई’

कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने अदालत के समक्ष वित्तीय आंकड़ों और विनियामक विसंगतियों को रेखांकित किया: “ठाणे इकाई से ओल्ड मोंक की बिक्री पर रोक लगाए जाने के कारण कंपनी को अब तक ₹500 करोड़ से अधिक का सीधा नुकसान हो चुका है। इस प्रतिबंध के कारण महाराष्ट्र के राज्य आबकारी विभाग को भी लगभग ₹350 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। विडंबना यह है कि महाराष्ट्र में ही स्थित अन्य विनिर्माण इकाइयां ठीक इसी फॉर्मूलेशन के साथ खुले बाजार में रम की बिक्री जारी रखे हुए हैं, और केवल ठाणे इकाई को निशाना बनाया गया है।”

  • नियमों का हवाला: कंपनी ने तर्क दिया कि लागू खाद्य सुरक्षा विनियम अनुमोदित एडिटिव्स (Approved Additives) के साथ न्यूट्रल स्पिरिट के उपयोग की अनुमति देते हैं। प्रतिस्पर्धी कंपनियां भी इसी प्रक्रिया का उपयोग करती हैं, परंतु उनके खिलाफ ऐसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

2. FSSAI का रुख: ‘यह असली Rum नहीं, इसे ‘Rum-Like’ लिखना अनिवार्य होगा’

केंद्र सरकार और FSSAI की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह ने कड़ा विनियामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया: “अधिकारी उत्पाद की बिक्री की अनुमति देने के लिए तैयार हैं, यदि कंपनी अपने लेबल में संशोधन करने पर सहमत हो और उत्पाद को ‘Rum’ के बजाय ‘Rum-Like’ (रम जैसा पेय) के रूप में वर्णित करे।”

  • फ्लेवरिंग से मूल संरचना छिपने का आरोप: FSSAI का तर्क है कि जब न्यूट्रल स्पिरिट में बाहरी या कृत्रिम रम फ्लेवर मिलाया जाता है, तो यह स्पिरिट की मूल संरचना को छुपा देता है। मानक उत्पाद नाम (‘Rum’) के तहत इसे बेचना उत्पाद को अवमानक (Sub-standard) बनाता है और उपभोक्ताओं को गुमराह करता है, जब तक कि इसे स्पष्ट रूप से “फ्लेवर्ड स्पिरिट” या “रम फ्लेवर युक्त स्पिरिट” न लिखा जाए।
  • भ्रामक उम्र का दावा (Misleading Age Descriptors): नियामक ने लेबल पर लिखे जाने वाले शब्दों—जैसे ‘7 Years Old Blended’ (7 वर्ष पुराना ब्लेंड) और ‘Very Old Vatted’—पर भी गंभीर आपत्ति जताई थी कि बिना वास्तविक परिपक्वता (Maturation) के ऐसे दावों से उपभोक्ताओं को धोखा दिया जा रहा है।

विवाद की पृष्ठभूमि और गतिरोध का कालक्रम

┌────────────────────────────────────┐
│                FSSAI का निषेधाज्ञा आदेश                        │
│• ठाणे इकाई से ओल्ड मोंक की बिक्री पर रोक।                  │
│• बाहरी रम फ्लेवर और '7 Years Old' जैसे भ्रामक उम्र दावों पर आपत्ति। │
└────────────────┬──────────────────┘
                      │
                      ▼
┌──────────────────────────┐
│         बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती                 │
│• हाईकोर्ट ने शुरुआत में अंतरिम रोक (Interim Stay) देने से किया मना। │
│• गतिरोध सुलझाने के लिए कंपनी ने संशोधित ड्राफ्ट लेबल प्रस्तुत किए।  │
└────────┬─────────────────┘
                  │
                 ▼
┌─────────────────────────────────────────┐
│         ताजा विधिक स्थिति         │
│ • संशोधित लेबल में कंपनी ने उम्र के दावे हटाए व 'Added Flavor' लिखा।│
│ • FSSAI ने फिर भी नाम 'Rum' लिखने पर आपत्ति जताई ('Rum-Like' मांगा)। │
│ • सहमति न बनने पर कंपनी ने मेरिट पर अंतिम सुनवाई का किया अनुरोध।      │
└────────────────────────────────────────────┘

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विधिक एवं विनियामक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

  • खाद्य सुरक्षा और मानक (अल्कोहलिक पेय) विनियम, 2018:
    • इन विनियमों के तहत ‘रम’ (Rum) को गन्ने के रस, शीरे (Molasses) या गन्ने के उत्पादों के किण्वन (Fermentation) और आसवन (Distillation) से प्राप्त पेय के रूप में परिभाषित किया गया है।
    • यदि किसी न्यूट्रल रेक्टिफाइड स्पिरिट में केवल केमिकल या नेचर-आइडेंटिकल एसेंस/फ्लेवर मिलाकर रम का स्वाद दिया जाता है, तो FSSAI नियमों के तहत उसे सीधे ‘Rum’ लेबल नहीं किया जा सकता; उसे ‘Flavoured Alcoholic Beverage’ या ‘Spirit with added flavour’ की श्रेणी में स्पष्ट रूप से घोषित करना अनिवार्य होता है।
  • FSSAI अधिनियम की धारा 24 (भ्रामक विज्ञापन एवं लेबलिंग):
    • कोई भी निर्माता ऐसा लेबल प्रदर्शित नहीं कर सकता जो उत्पाद की प्रकृति, गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया या उम्र के बारे में उपभोक्ता को भ्रमित करे।
  • संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) बनाम राज्य की नियामक शक्तियां:
    • यद्यपि शराब के व्यापार में कोई पूर्ण मौलिक अधिकार नहीं होता (Res Extra Commercium), परंतु यदि राज्य या विनियामक निकाय समान उद्योग के अन्य निर्माताओं के साथ भेदभाव करता है या मनमाने ढंग से प्रतिबंध लगाता है, तो अनुच्छेद 14 (समानता) के तहत न्यायिक समीक्षा आकर्षित होती है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड बनाम भारत संघ व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – बॉम्बे उच्च न्यायालय]
  • पीठ: मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना (खंडपीठ)
  • सुनवाई की तिथि: 12 अक्टूबर 2026
  • अगली सुनवाई की तिथि: 23 अक्टूबर 2026 (गुण-दोष पर अंतिम सुनवाई)
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ता (ओल्ड मोंक निर्माता) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड
    • प्रतिवादी (भारत संघ / FSSAI) की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह
  • संबद्ध उत्पाद एवं विनिर्माण इकाई: ‘ओल्ड मोंक रम’ (ठाणे जिला विनिर्माण संयंत्र, महाराष्ट्र)
  • दावा किया गया नुकसान:
    • कंपनी का अनुमानित नुकसान: ₹500 करोड़ से अधिक
    • महाराष्ट्र आबकारी विभाग का राजस्व नुकसान: लगभग ₹350 करोड़
  • प्रासंगिक कानून एवं विनियामक प्रावधान:
    • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSSA, 2006) की धाराएं 24 व 31
    • FSSAI (अल्कोहलिक पेय) विनियम, 2018 — रम की मानक परिभाषा व फ्लेवरिंग नियम
    • महाराष्ट्र आबकारी अधिनियम
  • अंतिम परिणाम: अंतरिम राहत के अभाव में कंपनी का व्यापारिक नुकसान जारी; लेबलिंग गतिरोध पर अंतिम विधिक निर्णय हेतु खंडपीठ 23 अक्टूबर 2026 को मामले की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई करेगी।

Old Monk:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
पीठमुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना
याचिकाकर्तामोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड (ओल्ड मोंक की निर्माता)
प्रतिवादीभारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एवं केंद्र/राज्य सरकार
मुख्य विवादFSSAI द्वारा ओल्ड मोंक के लेबल पर ‘Added Rum Flavors’ और ‘7 Years Old Blended / Very Old Vatted’ जैसे शब्दों को भ्रामक मानकर ठाणे यूनिट की बिक्री पर रोक लगाना।
वित्तीय प्रभावकंपनी का नुकसान: ₹500 करोड़ से अधिक
महाराष्ट्र आबकारी राजस्व हानि: ~₹350 करोड़
अगली सुनवाई23 अक्टूबर 2026
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