हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान जब यह बात सामने आई कि FSSAI ने कंपनी का पक्ष सुने बिना ही आदेश जारी कर दिया था, तो न्यायमूर्ति अमित महाजन ने मौखिक रूप से कहा:“अगर बिना किसी नोटिस के आदेश दिया गया है… तो इसे रद्द होना पड़ेगा।”
कोर्ट ने FSSAI के वकील से विशेष निर्देश लेने को कहा कि क्या आदेश पारित करने से पहले रेड बुल को कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया था या नहीं। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी क्या आपात स्थिति (Urgency) थी कि कंपनी की बात सुने बिना ही देश भर में कार्रवाई शुरू कर दी गई।
रेड बुल की मुख्य दलीलें
- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Natural Justice) का उल्लंघन:कंपनी ने कहा कि वह भारत में 2002 से अपने उत्पाद को “एनर्जी ड्रिंक” के रूप में बेच रही है। FSSAI ने 30 जून 2026 को बिना कोई नोटिस जारी किए या सुनवाई का अवसर दिए आदेश पारित कर दिया।
- उत्पादों की जब्ती और कार्रवाई:17 जुलाई 2026 के अनुवर्ती पत्र (Consequential Communication) के आधार पर राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने देश भर में कई जगहों पर रेड बुल के स्टॉक को जब्त करना शुरू कर दिया, जिससे कंपनी को भारी नुकसान हो रहा है।
- FSSAI का अपना पुराना रुख:याचिका में मार्च 2024 की FSSAI की एडवाइजरी और अप्रैल 2024 के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रेस नोट का हवाला दिया गया, जिसमें कैफिनेटेड पेय पदार्थों के लिए “एनर्जी ड्रिंक” शब्द के उपयोग की अनुमति दी गई थी। कंपनी ने तर्क दिया कि कानून या वैज्ञानिक मानकों में बदलाव के बिना FSSAI ने अपना रुख बदल दिया है।
नई दिल्ली: कैफीनयुक्त पेय पदार्थों (Caffeinated Beverages) पर उत्पाद विवरण, लेबलिंग मानकों और प्रशासनिक निर्णयों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) की अनिवार्यता को लेकर प्रमुख बेवरेज कंपनी रेड बुल (Red Bull) ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
‘एनर्जी ड्रिंक’ (Energy Drink) शब्द हटाने और देशभर में जब्ती कार्रवाई शुरू करने के निर्देश
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नियामक प्राधिकरण ने इतना बड़ा आदेश पारित करने से पूर्व कंपनी को कोई कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) जारी नहीं किया था या सुनवाई का अवसर नहीं दिया था, तो ऐसा आदेश विधिक रूप से टिक नहीं सकता। अदालत ने एफएसएसएआई के वकील को 29 सितंबर 2026 तक यह निर्देश लेकर आने को कहा है कि क्या आदेश जारी करने से पहले कोई पूर्व नोटिस दिया गया था या नहीं। हालांकि, अदालत ने पहले दिन रेड बुल को दंडात्मक कार्रवाई से कोई अंतरिम सुरक्षा (Interim Protection) प्रदान नहीं की। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अपने उत्पादों से ‘एनर्जी ड्रिंक’ (Energy Drink) शब्द हटाने और देशभर में जब्ती कार्रवाई शुरू करने के निर्देश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने नियामक संस्था के प्रक्रियात्मक रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
उच्च न्यायालय के प्रमुख अवलोकन एवं विधिक सवाल
1. ‘यदि नोटिस नहीं था… तो आदेश निरस्त होना तय है’ न्यायमूर्ति अमित महाजन ने एफएसएसएआई द्वारा बिना पूर्व सूचना के उत्पाद लेबलिंग पर प्रतिबंध लगाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा: “यदि कोई पूर्व नोटिस जारी नहीं किया गया था… तो इस आदेश को जाना ही होगा (If there is no notice… it has to go)।”
अदालत ने नियामक के वकील को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि वे संबंधित अधिकारियों से विशिष्ट निर्देश प्राप्त करें कि क्या 30 जून 2026 के विवादित निर्देश से पहले रेड बुल को किसी भी प्रकार का नोटिस जारी किया गया था या नहीं।
2. आपात स्थिति (Urgency) के औचित्य पर सवाल
- अदालत ने यह भी सवाल किया कि 2002 से चले आ रहे एक उत्पाद विवरण को अचानक बिना कंपनी का पक्ष सुने प्रतिबंधित करने के पीछे ऐसी कौन सी प्रशासनिक या सार्वजनिक आपात स्थिति थी:“इसमें कोई आपातकालीन या तात्कालिक स्थिति (Nothing emergent in it) नजर नहीं आती जो प्राकृतिक न्याय के मूलभूत नियमों को दरकिनार करने को उचित ठहरा सके।”
- अदालत ने मामले को विस्तृत सुनवाई के लिए 29 सितंबर 2026 को पुनः सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
रेड बुल द्वारा उठाए गए मुख्य विधिक आधार एवं नियामक विरोधाभास
रेड बुल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं—संदीप सेठी और सुहेल दत्त—ने अदालत के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख विधिक दलीलें प्रस्तुत कीं:
1. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Natural Justice) का घोर उल्लंघन:
- रेड बुल ने 30 जून 2026 को एफएसएसएआई के सहायक निदेशक द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कंपनी को अपनी सभी कैफीनयुक्त पेय श्रेणियों से “Energy Drink” शब्द हटाने का निर्देश दिया गया था।
- इसके अनुसरण में 17 जुलाई 2026 को जारी उस अनुवर्ती पत्र को भी चुनौती दी गई है, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (FSOs) को गैर-अनुपालन वाले उत्पादों के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।
- याचिका में कहा गया कि 24 वर्षों से भारत में स्वीकृत इस लेबल को बिना किसी कारण बताओ नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए रातों-रात प्रतिबंधित करना प्राकृतिक न्याय का सीधा उल्लंघन है।
2. देश भर में जब्ती और आर्थिक क्षति:
- कंपनी ने अदालत को अवगत कराया कि 17 जुलाई के पत्र के बाद विभिन्न राज्यों में खाद्य निरीक्षकों द्वारा रेड बुल के उत्पादों की जब्ती (Seizure) और दंडात्मक कार्रवाइयां शुरू कर दी गई हैं, जिससे कंपनी की साख और व्यापार को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।
3. नियामक रुख में अचानक यू-टर्न (Regulatory Reversal) और ‘वैध अपेक्षा’ (Legitimate Expectation):
- रेड बुल ने रेखांकित किया कि वह वर्ष 2002 से भारत में इसी डिस्क्रिप्टर “Energy Drink” के तहत अपने पेय पदार्थों की बिक्री कर रही है।
- कंपनी ने एफएसएसएआई की मार्च 2024 की एडवाइजरी का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त उत्पादों के लिए “एनर्जी ड्रिंक” शब्द का प्रयोग अनुमेय (Permissible) है।
- इसके अलावा, अप्रैल 2024 में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति, तथा वर्षों से रेड बुल को दिए गए आयात अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOCs) और विधिक लाइसेंसों में इसी नामकरण को विधिवत मंजूरी दी गई थी।
- याचिका में तर्क दिया गया कि किसी नए वैज्ञानिक साक्ष्य या खाद्य सुरक्षा कानूनों में संशोधन के बिना नियामक द्वारा अपने ही पुराने रुख से अचानक मुकर जाना मनमाना है और प्रशासनिक विधि के ‘वैध अपेक्षा के सिद्धांत’ का उल्लंघन करता है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं 2026 के विवादित आदेश
- उत्पाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: रेड बुल भारत में पिछले 24 वर्षों (2002 से) से कैफीनयुक्त पेय पदार्थ के रूप में स्वीकृत मानकों के तहत बिक रहा है।
- विवादित आदेशों का कालक्रम:
- 30 जून 2026: FSSAI के सहायक निदेशक ने अचानक आदेश पारित कर रेड बुल को ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का प्रयोग तुरंत बंद करने का निर्देश दिया।
- 17 जुलाई 2026: FSSAI ने देश के सभी राज्य/यूटी खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को परिपत्र जारी कर उन उत्पादों को जब्त करने और कानूनी कार्रवाई करने को कहा जो अभी भी ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल के साथ बाजार में उपलब्ध हैं।
- हाईकोर्ट में चुनौती: रेड बुल ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दोनों आदेशों को अधिकार-विहीन और असंवैधानिक घोषित कर निरस्त करने की मांग की।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: रेड बुल बनाम भारत संघ व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – दिल्ली उच्च न्यायालय]
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (Red Bull) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सुहेल दत्त (साथ में अधिवक्ता अभिषित सिंह, भास्कर जोशी, कृष्णा गंभीर, श्रेया सेठी एवं ऋत्विक शर्मा)
- प्रतिवादी (FSSAI व भारत संघ) की ओर से: केंद्र सरकार एवं नियामक के पैनल अधिवक्ता
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act, 2006):
- धारा 16 एवं 22 (मानक निर्धारण, मालिकाना और कैफीनयुक्त खाद्य पदार्थ)
- धारा 23 एवं 24 (खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापनों पर प्रतिबंध)
- खाद्य संरक्षा और मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) विनियम, 2020
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 14 (मनमाने प्रशासनिक आदेशों के विरुद्ध समता का अधिकार) एवं अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार और कारोबार की स्वतंत्रता)
- प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत — ऑडी अल्टरम पार्टम (Audi Alteram Partem – दूसरे पक्ष को भी सुनो)
- खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act, 2006):
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978, सुप्रीम कोर्ट) — ‘प्रशासनिक आदेश, भले ही वे विशुद्ध रूप से कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हों, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन में पारित नहीं किए जा सकते; पूर्व नोटिस और सुनवाई का अवसर अनिवार्य है।’
- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया बनाम मैगी नूडल्स (नेस्ले इंडिया) (बॉम्बे हाईकोर्ट) — ‘वैज्ञानिक परीक्षणों और प्रयोगशाला रिपोर्टों के बिना तथा विधिक प्रक्रिया व नोटिस का पालन किए बिना उत्पादों पर प्रतिबंध लगाना या जब्ती करना अवैध है।’
- पंजाब कम्युनिकेशंस लिमिटेड बनाम भारत संघ (सुप्रीम कोर्ट) — ‘प्रशासनिक संस्थाएं बिना किसी व्यापक सार्वजनिक हित या विधायी बदलाव के अपने पूर्ववर्ती आश्वासनों और स्थापित नीतियों से अचानक पीछे नहीं हट सकतीं (Legitimate Expectation)।’
- पीठ: न्यायमूर्ति अमित महाजन (दिल्ली उच्च न्यायालय)
- अंतिम निर्देश: FSSAI को नोटिस जारी होने पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश; बिना अंतरिम राहत के मामले की विस्तृत सुनवाई 29 सितंबर 2026 को तय।
Red Bull Case: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठ | न्यायमूर्ति अमित महाजन |
| याचिकाकर्ता | रेड बुल (Red Bull) |
| प्रतिवादी | भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) व अन्य |
| मुख्य विवाद | FSSAI द्वारा 30 जून 2026 को जारी आदेश, जिसमें “एनर्जी ड्रिंक” शब्द का इस्तेमाल बंद करने को कहा गया है। |
| कोर्ट का रुख | FSSAI से स्पष्टीकरण मांगा गया; मामला कल (29 सितंबर) आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध। |

