अधिसूचना के मुख्य बिंदु और निर्देश (Key Instructions)
- अनिवार्य AIBE परीक्षा (Mandatory AIBE Qualification):अकादमिक वर्ष 2009-2010 के बाद से पंजीकृत वे सभी अधिवक्ता जिन्होंने अभी तक AIBE परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें वकालत (Practice Law) जारी रखने के लिए इस परीक्षा को उत्तीर्ण करना होगा।
- नवागंतुक स्नातकों के लिए शर्त (Fresh Graduates & Provisional Enrolment):नये कानून स्नातकों और अनंतिम रूप से नामांकित (Provisionally Enrolled) अधिवक्ताओं को स्थायी नामांकन प्रमाणपत्र (Absolute Certificate of Enrolment) केवल AIBE पास करने और नामांकन की तारीख से 2 वर्षों के भीतर Bar Council of India द्वारा जारी सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) प्रस्तुत करने के बाद ही प्रदान किया जाएगा।
- COP जमा करने हेतु 1 माह की समय सीमा:1 जुलाई 2010 के बाद पंजीकृत वे अधिवक्ता जो पहले ही AIBE पास कर चुके हैं, उन्हें अपने Certificate of Practice (COP) की प्रतियां 1 महीने के भीतर हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराने का निर्देश दिया गया है।
पृष्ठभूमि और बीसीआई (BCI) नियम
हाईकोर्ट के फुल कोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को अपनी बैठक में 19 अगस्त को रूल्स कमेटी द्वारा दी गई सिफारिशों को स्वीकार करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स (BCI Rules) के अध्याय III, भाग VI के नियम 9, 10 और 11 को लागू करने का निर्णय लिया:
- नियम 9 (Rule 9, BCI Rules): यह स्पष्ट करता है कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) के अध्याय IV के तहत देश में कहीं भी अदालतों में वकालत करने का अधिकार पाने के लिए AIBE पास करना अनिवार्य है।
- नियम 11 (Rule 11, BCI Rules): यह परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को BCI द्वारा प्रैक्टिस का प्रमाण पत्र (Certificate of Practice – COP) जारी करने का प्रावधान करता है।
श्रीनगर / जम्मू: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) के अध्याय IV के तहत विधि व्यवसाय करने का अधिकार (Right to Practise), बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स (BCI Rules) के भाग VI, अध्याय III के नियम 9, 10 एवं 11 की कानूनी बाध्यता, ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (All India Bar Examination – AIBE), तथा प्रैक्टिस प्रमाण पत्र (Certificate of Practice – COP) प्रस्तुत करने की अनिवार्यता पर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रशासनिक-न्यायिक आदेश जारी किया है।
उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एम.के. शर्मा द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में शैक्षणिक सत्र 2009-2010 के बाद से नामांकित सभी वकीलों के लिए AIBE पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। जब तक वे इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर बीसीआई द्वारा जारी ‘प्रैक्टिस प्रमाण पत्र’ (COP) प्रस्तुत नहीं करते, उन्हें अदालतों में वकालत करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
अधिसूचना के प्रमुख प्रावधान एवं निर्देश
1. 2009-2010 से नामांकित वकीलों के लिए पूर्वव्यापी क्रियान्वयन:
- यद्यपि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 2009-10 के विधि स्नातकों के लिए पूरे देश में AIBE अनिवार्य किया था, परंतु जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बार काउंसिल के स्तर पर इसे अब तक औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया था।
- नई अधिसूचना स्पष्ट करती है कि बार काउंसिल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख के साथ नामांकित वे सभी अधिवक्ता, जिन्होंने शैक्षणिक वर्ष 2009-2010 या उसके बाद विधि स्नातक (Law Degree) उत्तीर्ण की है, यदि उन्होंने अभी तक AIBE पास नहीं किया है, तो उन्हें विधि व्यवसाय जारी रखने के लिए इसे उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।
2. नए स्नातकों के लिए ‘अनंतिम नामांकन’ और 2 वर्ष की समय-सीमा:
- नए विधि स्नातकों और वर्तमान में अनंतिम रूप से नामांकित (Provisionally Enrolled) अधिवक्ताओं को अंतिम/पूर्ण नामांकन प्रमाण पत्र (Absolute Certificate of Enrolment) केवल तभी प्रदान किया जाएगा जब वे:
- ऑल इंडिया बार परीक्षा (AIBE) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करेंगे, और
- नामांकन के दो वर्ष के भीतर बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ (COP) प्रस्तुत करेंगे।
3. पहले से उत्तीर्ण वकीलों के लिए 1 माह की समय-सीमा:
- वे सभी अधिवक्ता जो 1 जुलाई 2010 के बाद नामांकित हुए थे और जिन्होंने पहले ही AIBE पास कर लिया है, उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अधिसूचना जारी होने के एक महीने के भीतर अपने सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) की प्रतियां उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में अनिवार्य रूप से जमा करें।
निर्णय की पृष्ठभूमि: फुल कोर्ट और रूल्स कमेटी की सिफारिशें
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│ AIBE अनिवार्यता का प्रशासनिक कालक्रम │
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【19 अगस्त 2026: रूल्स कमेटी की सिफारिश】 【8 अक्टूबर 2026: फुल कोर्ट की बैठक】
• उच्च न्यायालय की रूल्स कमेटी ने BCI रूल्स के • मुख्य न्यायाधीश और सभी न्यायाधीशों की फुल
नियम 9, 10 व 11 को केंद्र शासित प्रदेशों में कोर्ट ने रूल्स कमेटी की सिफारिशों को सर्वसम्मति
सख्ती से लागू करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा। से स्वीकार करते हुए अधिसूचना जारी करने की मंजूरी दी।
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│ 10 अक्टूबर 2026: आधिकारिक अधिसूचना │
│ • रजिस्ट्रार जनरल द्वारा अधिसूचना जारी; वकालत के लिए AIBE बाध्यकारी।
विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स (भाग VI, अध्याय III):
- नियम 9: यह निर्धारित करता है कि किसी भी अधिवक्ता को अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के अध्याय IV के तहत किसी भी अदालत या न्यायाधिकरण के समक्ष वकालत करने का अधिकार तभी होगा, जब वह बीसीआई द्वारा आयोजित ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) सफलतापूर्वक पास कर ले।
- नियम 10: परीक्षा के संचालन, पाठ्यक्रम और प्रक्रिया से संबंधित है।
- नियम 11: सफल उम्मीदवारों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ (COP) जारी करने का अधिदेश देता है।
- सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ का फैसला (बार काउंसिल ऑफ इंडिया बनाम बोनी फोई लॉ कॉलेज व अन्य, 2023):
- सुप्रीम कोर्ट की 5-जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट स्थापित किया था कि बीसीआई के पास वकालत के पेशे की गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखने के लिए AIBE आयोजित करने की पूर्ण संवैधानिक और वैधानिक शक्तियां हैं।
- अदालत ने माना था कि अनंतिम नामांकन केवल सीमित अवधि (2 वर्ष) के लिए होता है, जिसके दौरान परीक्षा पास न करने पर वकालत का अधिकार स्वतः निलंबित माना जाएगा।
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन और कानूनी एकरूपता:
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के लागू होने के बाद केंद्रीय कानूनों और राष्ट्रीय विनियामक निकायों के नियमों का संघ राज्य क्षेत्रों में पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। यह अधिसूचना स्थानीय वकीलों को राष्ट्रीय मानकों के समकक्ष लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विधिक विवरण
- प्राधिकरण: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट रजिस्ट्री)
- अधिसूचना जारीकर्ता: एम.के. शर्मा (रजिस्ट्रार जनरल)
- अधिसूचना की तिथि: 10 अक्टूबर 2026
- फुल कोर्ट की स्वीकृति तिथि: 8 अक्टूबर 2026 (रूल्स कमेटी की 19 अगस्त 2026 की सिफारिश पर आधारित)
- संबद्ध अधिकार क्षेत्र: संघ राज्य क्षेत्र जम्मू-कश्मीर एवं संघ राज्य क्षेत्र लद्दाख
- प्रासंगिक कानून एवं विनियामक प्रावधान:
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) — अध्याय IV (वकालत करने का अधिकार)
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स — भाग VI, अध्याय III, नियम 9, 10 एवं 11
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- विधिक पेशे के मानक और योग्यता: ‘ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) उत्तीर्ण करना और प्रैक्टिस प्रमाण पत्र (COP) प्राप्त करना न्यायिक प्रणाली में प्रैक्टिस करने के लिए एक अनिवार्य वैधानिक पूर्व-शर्त है; क्षेत्रीय बार काउंसिलों में इसके क्रियान्वयन में कोई शिथिलता नहीं दी जा सकती।’
- अंतिम परिणाम: 2009-10 के बाद नामांकित सभी वकीलों के लिए AIBE अनिवार्य; उत्तीर्ण अधिवक्ताओं को 1 माह में COP जमा करने और अनंतिम रूप से नामांकित वकीलों को 2 वर्ष के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करने का सख्त निर्देश।
AIBE Mandatory:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय |
| अधिसूचना जारीकर्ता | एम. के. शर्मा (रजिस्ट्रार जनरल, J&K हाईकोर्ट) |
| अधिसूचना तिथि | 10 अक्टूबर 2026 |
| प्रभावी वर्ष | 2009-10 अकादमिक वर्ष से नामांकित कानून स्नातक |
| संबंधित नियम | BCI Rules Chapter III, Part VI (Rules 9, 10 & 11) एवं Advocates Act, 1961 |
| मुख्य निर्देश | AIBE पास न करने वाले अधिवक्ताओं को वकालत करने का अधिकार नहीं होगा; प्रैक्टिस का प्रमाण पत्र (COP) जमा करने हेतु 1 माह का समय दिया गया। |

