Friday, October 16, 2026
HomeHigh CourtTinted Glass: राजस्थान हाईकोर्ट ने पूरे राज्य में वाहनों पर टिंटेड ग्लास...

Tinted Glass: राजस्थान हाईकोर्ट ने पूरे राज्य में वाहनों पर टिंटेड ग्लास और ब्लैक फिल्म के बेधड़क इस्तेमाल पर लिया स्वतः संज्ञान; जानिए यह रही वजह

स्वतः संज्ञान लेने का मुख्य कारण और अपराध में इस्तेमाल

  1. शव को छिपाकर ले जाने में काले शीशों का उपयोग:दौसा के एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने आया कि अभियुक्तों ने एक मृत महिला के शव को ऐसी कार में छिपाकर ले जाया, जिसकी खिड़कियों पर गहरी काली फिल्म चढ़ी हुई थी। बाहर से कुछ न दिखने के कारण वे शव को आसानी से अपराध स्थल से दूर फेंकने में कामयाब रहे।
  2. निजी एम्बुलेंस का अवैध गतिविधियों में दुरुपयोग:वकीलों (Bar Members) ने अदालत का ध्यान आकर्षित किया कि राजस्थान में निजी एम्बुलेंसों में बड़े पैमाने पर काले शीशों का इस्तेमाल हो रहा है, जिनका उपयोग कई गैर-कानूनी और संदिग्ध गतिविधियों के संचालन के लिए किया जा रहा है।

कानूनी मानक और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश

हाईकोर्ट ने अभिषेक गोयनका बनाम भारत संघ (2012) मामले में उच्चतम न्यायालय के मील के पत्थर वाले निर्णय का हवाला दिया:

 ┌──────────────────────────────────────────────┐
│ केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (Rule 100) │
└──────────────────────┬───────────────────────┘
│
┌────────────────────┴────────────────────┐
▼ ▼
┌──────────────────────────┐ ┌──────────────────────────┐
│ सामने व पीछे के शीशे │ │ साइड की खिड़कियां │
│ (Windscreens & Rear) │ │ (Side Windows) │
├──────────────────────────┤ ├──────────────────────────┤
│ न्यूनतम 70% दृश्य प्रकाश │ │ न्यूनतम 50% दृश्य प्रकाश │
│ पारगम्यता (VLT) अनिवार्य।│ │ पारगम्यता (VLT) अनिवार्य।│
└──────────────────────────┘ └──────────────────────────┘
  • अतिरिक्त फिल्म/सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ऊपर दिए गए सुरक्षा मानक कंपनी से बनकर आने वाले कांच (Safety Glass) के लिए हैं। कांच के ऊपर अलग से किसी भी प्रकार की प्लास्टिक फिल्म, ब्लैक फिल्म या सन-कंट्रोल फिल्म चिपकाना पूरी तरह से प्रतिबंधित (Illegal) है, चाहे उसका VLT प्रतिशत कुछ भी हो।

जयपुर: केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 (Central Motor Vehicles Rules, 1989) के नियम 100, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत सुरक्षा शीशों (Safety Glass) की दृश्य प्रकाश संप्रेषण क्षमता (Visual Light Transmission – VLT), वाहनों के शीशों पर किसी भी प्रकार की काली फिल्म चिपकाने पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्ण प्रतिबंध, काली फिल्मों की आड़ में महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराधों व शवों के गुप्त परिवहन, तथा निजी एम्बुलेंसों के अनियंत्रित दुरुपयोग पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (Suo Motu PIL) दर्ज की है।

न्यायमूर्ति महेंद्र कुमार गोयल और न्यायमूर्ति भुवन गोयल की खंडपीठ ने दौसा जिले से संबंधित एक मृत्यु संदर्भ (Death Reference) और संबद्ध आपराधिक अपीलों की सुनवाई के दौरान यह संज्ञान लिया। अभियोजन के रिकॉर्ड से यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने एक मृतका के शव को काली फिल्म चढ़ी कार में रखकर गुप्त रूप से ले जाकर दूर ठिकाने लगाया था, क्योंकि बाहर से किसी भी राहगीर को अंदर देखना संभव नहीं था। खंडपीठ ने बार के सदस्यों द्वारा उठाई गई उन चिंताओं को भी दर्ज किया जिनमें निजी एम्बुलेंसों पर काली फिल्में लगाकर अवैध गतिविधियों को अंजाम दिए जाने की बात कही गई।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायिक निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था

1. ‘दौसा हत्या मामले में काली फिल्म ने शव ठिकाने लगाने में मदद की’

खंडपीठ ने आपराधिक मामले के तथ्यों की समीक्षा करते हुए रेखांकित किया:

  • अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने एक मृत महिला के शव को ऐसी कार में रखकर ले जाया जिसके शीशों पर काली फिल्में लगी थीं।
  • इस अपारदर्शी शीशे के कारण रास्ते में किसी भी राहगीर या पुलिसकर्मी को वाहन के भीतर का दृश्य दिखाई नहीं दिया, जिससे अपराध स्थल से काफी दूर ले जाकर शव को ठिकाने लगाना आरोपियों के लिए आसान हो गया।

2. निजी एम्बुलेंसों (Private Ambulances) का संदिग्ध इस्तेमाल:

  • बार के सदस्यों ने अदालत का ध्यान आकर्षित किया कि राजस्थान भर में निजी वाहनों के अलावा बड़ी संख्या में निजी एम्बुलेंसों पर काली फिल्में और अपारदर्शी शीशे लगाए जा रहे हैं।
  • ऐसी सूचनाएं और रिपोर्टें हैं कि इन निजी एम्बुलेंसों के आपातकालीन दर्जे और काले शीशों का दुरुपयोग तस्करी तथा अन्य अवैध व आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक सुरक्षित ढाल के रूप में किया जा रहा है।

3. ‘अभिषेक गोयनका’ फैसले और नियम 100 का उल्लंघन:

  • अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा 2012 में दिए गए बाध्यकारी फैसले के बावजूद राजस्थान में सड़कों पर काली फिल्मों और गहरे टिंटेड ग्लास वाले वाहनों का बेधड़क संचालन प्रशासन और यातायात पुलिस की विनियामक विफलता को दर्शाता है।
  • अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे स्वतः संज्ञान जनहित याचिका में बदलने का आदेश दिया।

Also Read; Motor Vehicles Act: इंजन व ब्रेकिंग सिस्टम में अनधिकृत बदलाव का भी रखा जाए रिकॉर्ड; e-DAR पोर्टल पर अवैध मॉडिफिकेशन के फोटो और वीडियो जोड़ना अनिवार्य

विधिक एवं विनियामक मानक: दृश्य प्रकाश संप्रेषण (VLT) और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ‘अभिषेक गोयनका बनाम भारत संघ (2012, SC)’ का हवाला देते हुए वैधानिक मानकों को दोहराया:

┌────────────────────────────────────────────────────────┐
│ केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989: नियम 100 के मानक │
└───────────────────────────┬────────────────────────────┘
│
┌────────────────────────────┴────────────────────────────────────┐
▼ ▼
【आगे और पीछे का शीशा (Windscreen & Rear)】 【किनारों के शीशे (Side Windows)】
• न्यूनतम 70% दृश्य प्रकाश संप्रेषण (VLT) आवश्यक। • न्यूनतम 50% दृश्य प्रकाश संप्रेषण (VLT) आवश्यक।
• विनिर्माता द्वारा निर्मित ग्लास पर ही लागू। • विनिर्माता द्वारा निर्मित ग्लास पर ही लागू।
│
▼
┌──────────────────────────────────────────────────┐
│ अभिषेक गोयनका फैसला: फिल्मों पर पूर्ण प्रतिबंध │
│ • सुरक्षा शीशे पर किसी भी VLT प्रतिशत की ब्लैक │
│ फिल्म या अन्य सामग्री चिपकाना पूर्णतः अवैध है। │
│ • केवल मूल रूप से निर्मित ग्लास ही मान्य होगा। │
└────────────────────────────────────────────┘
  • ‘अभिषेक गोयनका’ (2012) की स्पष्ट विधिक व्यवस्था:
    • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सीएमवीआर के नियम 100(2) के तहत 70% और 50% की सीमा केवल वाहन निर्माता द्वारा बनाए गए सुरक्षा कांच (Safety Glass) की आंतरिक बनावट के लिए है।
    • वाहन खरीदने के बाद शीशे पर किसी भी प्रकार की काली, रंगीन या टिंटेड सामग्री/प्लास्टिक फिल्म चिपकाना (चाहे वह 70% या 50% पारदर्शिता का दावा ही क्यों न करे) कानूनन पूरी तरह वर्जित है।

जनहित याचिका में बनाए गए प्रमुख प्रतिवादी

खंडपीठ ने पूरे राज्य में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और जब्ती अभियानों के परीक्षण हेतु शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को पक्षकार बनाया है:

  1. मुख्य सचिव (Chief Secretary), राजस्थान सरकार
  2. सचिव (Secretary), परिवहन विभाग, राजस्थान
  3. परिवहन आयुक्त (Transport Commissioner), राजस्थान
  4. पुलिस महानिदेशक (Director General of Police – DGP), राजस्थान

अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि इस स्वतः संज्ञान जनहित याचिका को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि इसे जनहित याचिकाओं की सुनवाई करने वाली उपयुक्त खंडपीठ के समक्ष विधिवत सूचीबद्ध किया जा सके।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान (अवैध टिंटेड ग्लास एवं ब्लैक फिल्म का उपयोग) बनाम राजस्थान राज्य व अन्य [स्वतः संज्ञान जनहित याचिका – राजस्थान उच्च न्यायालय]
  • पीठ: न्यायमूर्ति महेंद्र कुमार गोयल और न्यायमूर्ति भुवन गोयल (खंडपीठ)
  • संज्ञान आदेश की तिथि: 9 अक्टूबर 2026
  • संबद्ध मूल कार्यवाही: दौसा जिले से संबंधित मृत्यु संदर्भ (Death Reference) एवं आपराधिक अपील
  • प्रत्यर्थी (Respondents): मुख्य सचिव, परिवहन सचिव, परिवहन आयुक्त और डीजीपी राजस्थान
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 (CMVR) — नियम 100 (सुरक्षा शीशों की दृश्यता व VLT मानक)
    • मोटर वाहन अधिनियम, 1988 — धारा 177 एवं धारा 190(2) (मानकों के उल्लंघन पर जुर्माना व जब्ती)
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट व जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
  • संबद्ध न्यायिक नजीर:
    • अभिषेक गोयनका बनाम भारत संघ [(2012) 5 SCC 321] — ‘वाहनों के शीशों पर बाद में किसी भी प्रकार की काली फिल्म चिपकाना अवैध है; 70% और 50% VLT केवल ग्लास की अपनी बनावट के लिए निर्धारित है।’
  • अंतिम परिणाम: राजस्थान हाईकोर्ट ने पूरे राज्य में दौड़ रहे टिंटेड ग्लास और ब्लैक फिल्म वाले वाहनों व निजी एम्बुलेंसों के दुरुपयोग पर स्वतः संज्ञान पीआईएल दर्ज की; मुख्य न्यायाधीश को मामला उपयुक्त रोस्टर पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने हेतु अग्रेषित किया गया।

Tinted Glass: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतराजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court)
पीठन्यायमूर्ति महेंद्र कुमार गोयल एवं न्यायमूर्ति भुवन गोयल
मुख्य मुद्दावाहनों पर काले शीशों/ब्लैक फिल्म का अवैध इस्तेमाल और सुप्रीम कोर्ट के 2012 के आदेश का उल्लंघन।
संबंधित कानूनी नियम1. केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (नियम 100)
2. सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (Avishek Goenka v. Union of India, 2012)
नामित प्रतिवादी (Respondents)राजस्थान के मुख्य सचिव, परिवहन विभाग सचिव, परिवहन आयुक्त और पुलिस महानिदेशक (DGP)।
ताजा आदेशमामले को मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के समक्ष उचित पीठ के गठन हेतु सूचीबद्ध करने के निर्देश।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
clear sky
30 ° C
30 °
30 °
66 %
0kmh
1 %
Fri
32 °
Sat
32 °
Sun
33 °
Mon
33 °
Tue
32 °

Recent Comments