हाईकोर्ट द्वारा जारी प्रमुख निर्देश
- इंजन और ब्रेकिंग सिस्टम में संशोधन दर्ज करना:निरीक्षण अधिकारियों को वाहन के इंजन की क्षमता/प्रदर्शन बढ़ाने के लिए किए गए अवैध फेरबदल और ब्रेकिंग सिस्टम (Braking System) में किए गए किसी भी बदलाव का पूरा ब्योरा डिजिटल फोटो और वीडियो के साथ e-DAR पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
- पैदल यात्रियों और सामने से आने वाले वाहनों के लिए खतरा:अदालत ने कहा कि वाहन के बॉडीवर्क में किए गए ऐसे बदलाव जो पैदल यात्रियों या टक्कर लगने वाले व्यक्तियों की गंभीर चोट का जोखिम बढ़ाते हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से रेखांकित किया जाएगा।
- ₹5,000 प्रति संशोधन जुर्माना:हाईकोर्ट ने अपने पिछले आदेशों का दोहराव करते हुए स्पष्ट किया कि वाहनों में हाई-इंटेंसिटी लाइटें (High-Intensity Lights), अवैध LED, नियॉन लाइट्स, लेजर लाइट्स और स्ट्रोब लाइट्स लगाने जैसे अनधिकृत बदलावों पर ₹5,000 का जुर्माना प्रति अवैध मॉडिफिकेशन के हिसाब से वसूला जाएगा।
- तकनीकी खामी दूर करने के लिए NIC पक्षकार:परिवहन आयुक्त ने कोर्ट को सूचित किया कि हालांकि फोटो e-DAR पर ऑनलाइन देखे और डाउनलोड किए जा सकते हैं, लेकिन प्रिंटेड कॉपी में वे दिखाई नहीं देते। इस तकनीकी समस्या को ठीक करने के लिए हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) को मामले में पक्षकार (Implead) बनाया है।
कोच्चि: मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) की धारा 52 के तहत वाहनों में अनधिकृत संशोधन (Unauthorised Vehicle Modifications) पर प्रतिबंध, इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (Electronic Detailed Accident Report – e-DAR / iRAD) पोर्टल का अनिवार्य क्रियान्वयन, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की तकनीकी जांच में निष्पक्षता व साक्ष्य संकलन, तथा पैदल यात्रियों व सामने से आने वाले चालकों के लिए जोखिम पैदा करने वाली तेज रोशनी (LED, लेजर, स्ट्रोब लाइट्स) के खिलाफ केरल हाईकोर्ट ने एक सख्त और दूरगामी निर्देश जारी किया है।
न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस. की खंडपीठ ने केरल में सड़क सुरक्षा और वाहनों के गैर-कानूनी रूपांतरण से संबंधित स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले की सुनवाई करते हुए राज्य के मोटर वाहन विभाग (MVD) और परिवहन आयुक्त को निर्देशित किया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (e-DAR पोर्टल) पर अपलोड करते समय उनके गैर-कानूनी बदलावों के रंगीन फोटो और वीडियो अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं।
उच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायिक निष्कर्ष एवं विधिक निर्देश
1. ‘e-DAR पोर्टल पर अवैध संशोधनों के फोटो और वीडियो अनिवार्य’
खंडपीठ ने परिवहन अधिकारियों की लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट व्यवस्था दी: “हम यह उचित समझते हैं कि (परिवहन आयुक्त) को संबंधित उप-परिवहन आयुक्तों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए कि दुर्घटनाओं में शामिल वाहनों के अवैध मॉडिफिकेशन विवरण, वाहनों के फोटोग्राफ और वीडियो संबंधित निरीक्षण अधिकारियों (Inspecting Officers) द्वारा e-DAR पोर्टल (www.irad.parivahan.gov.in) पर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं।”
2. सुरक्षा मानकों का उल्लंघन, इंजन और ब्रेकिंग सिस्टम में बदलाव का रिकॉर्ड:
- अदालत ने निर्देश दिया कि निरीक्षण अधिकारियों को सुरक्षा मानकों के ऐसे किसी भी उल्लंघन का ब्यौरा दर्ज करना होगा जो वाहन से टकराने वाले या उसके बॉडीवर्क से छू जाने वाले किसी भी व्यक्ति/पैदल यात्री के घायल होने के जोखिम को बढ़ाता हो।
- ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाने वाले विवरणों में विशेष रूप से शामिल होना चाहिए:
- वाहन के इंजन का परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए किए गए अवैध बदलाव (Illegal Alterations to Engine Performance)।
- ब्रेकिंग सिस्टम में किए गए किसी भी प्रकार के अनधिकृत परिवर्तन (Modifications to Braking Systems)।
3. अधिकारियों द्वारा प्रक्रिया को बायपास करने पर नाराजगी और NIC को पक्षकार बनाना:
- अदालत ने रेखांकित किया कि परिवहन आयुक्त ने 17 सितंबर 2026 को विस्तृत निर्देश जारी कर e-DAR पोर्टल पर फोटो-वीडियो अपलोड करने के लिए विशेष फील्ड उपलब्ध कराए थे।
- इसके बावजूद यह पाया गया कि कुछ निरीक्षण अधिकारी फोटो अपलोड करने की प्रक्रिया को नजरअंदाज (Bypass) कर रहे थे। आयुक्त ने अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान पाए गए अनधिकृत बदलावों के रंगीन फोटोग्राफ अपलोड करने के कड़े निर्देश दिए।
- परिवहन आयुक्त ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि पोर्टल पर फोटो ऑनलाइन देखे और डाउनलोड किए जा सकते हैं, लेकिन वे दुर्घटना निरीक्षण रिपोर्ट की मुद्रित प्रतियों (Printed Copies) पर दिखाई नहीं देते।
- इस तकनीकी खामी को दूर करने के लिए हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) को मामले में औपचारिक रूप से पक्षकार (Impleaded) बना दिया।
4. तेज रोशनी पर रोक और ₹5,000 प्रति मॉडिफिकेशन का जुर्माना:
- पीठ ने अपने पूर्व के आदेशों को दोहराते हुए कहा कि सामने से आ रहे चालकों और पैदल यात्रियों को क्षणिक रूप से अंधा/दिशाहीन (Temporary Visual Disorientation) करने वाली उच्च-तीव्रता वाली लाइटों (LED, नियॉन, लेजर, स्ट्रोब लाइट्स) के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
- अदालत ने पुनः दोहराया कि ऐसे प्रत्येक अनधिकृत मॉडिफिकेशन के लिए कानून के अनुसार ₹5,000 का जुर्माना लगाया जाना चाहिए। साथ ही राज्य के पुलिस प्रमुख (DGP) को सड़क सुरक्षा और वाहन संशोधनों पर पूर्व के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
e-DAR पोर्टल पर दर्ज किए जाने वाले अनिवार्य तकनीकी बिंदु
────────────────────────────────────────────────────────┐
e-DAR पोर्टल पर अनिवार्य वाहन निरीक्षण ढांचा
└────────────┬────────────────────────────┘
│
┌────────────────────────────────────┼────────────────────────────────────┐
▼ ▼ ▼
【बॉडीवर्क व बाहरी संशोधन】 【इंजन व तकनीकी सिस्टम】 【अवैध लाइटिंग व दृश्यता जोखिम】
• क्रैश गार्ड, बुल बार या नुकीले भाग। • इंजन पावर/स्पीड बढ़ाने वाले अवैध चिप्स। • हाई-इंटेंसिटी LED, लेजर व स्ट्रोब लाइट्स।
• बॉडी में ऐसे बदलाव जिनसे पैदल • ब्रेकिंग सिस्टम, स्टीयरिंग या सस्पेंशन में • तेज चमक वाली नियॉन लाइट्स (सामने वाले को
यात्रियों को कटने/चोट का खतरा हो। किए गए गैर-मानक अनधिकृत बदलाव। अस्थायी रूप से अंधा करने वाली)।
विधिक एवं सुरक्षा विश्लेषण: क्या कहता है मोटर वाहन कानून?
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 52 (वाहनों में संशोधन पर प्रतिबंध):
- सर्वोच्च न्यायालय ने केरल राज्य बनाम एस. सुब्रमण्यम (2019) के ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट रूप से व्यवस्था दी थी कि किसी भी वाहन मालिक को निर्माता द्वारा जारी विनिर्देशों (Manufacturer’s Specifications) और वाहन के मूल पंजीकरण प्रमाण पत्र (RC) के विपरीत वाहन की संरचना, इंजन, आकार या सुरक्षा घटकों में बदलाव करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
- इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (e-DAR / iRAD) की वैधानिकता:
- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित बीमा दावा दिलाने और दावों में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के समन्वय से e-DAR प्रणाली अनिवार्य की गई है।
- यदि दुर्घटना के समय वाहन अवैध रूप से संशोधित पाया जाता है (जैसे ब्रेक या इंजन से छेड़छाड़), तो यह बीमा कंपनियों की देनदारी और वाहन मालिक के खिलाफ लापरवाही के आपराधिक मुकदमों (धारा 281 / 106 BNS) में निर्णायक साक्ष्य साबित होता है।
- मुद्रित प्रतियों में फोटो का अभाव और NIC की भूमिका:
- अदालतों और ट्रिब्यूनलों (MACT) में जब मुद्रित दस्तावेज पेश किए जाते हैं, तो फोटो न होने से तकनीकी विसंगतियां साबित करना कठिन हो जाता है। NIC द्वारा मुद्रित प्रारूप में रंगीन छवियों को एकीकृत करने से दुर्घटना जांच की पारदर्शिता बढ़ेगी।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: स्वतः संज्ञान (सड़क सुरक्षा व अनधिकृत वाहन संशोधन) बनाम भारत संघ व अन्य [WP(C) Suo Motu – केरल उच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस. (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 8 अक्टूबर 2026
- अगली सुनवाई की तिथि: 28 अक्टूबर 2026
- शामिल तकनीकी एजेंसी: राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC – पक्षकार बनाया गया)
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) — धारा 52 (वाहनों में संशोधन), धारा 190(2) (सुरक्षा मानकों का उल्लंघन) एवं धारा 182A(4) (अवैध घटकों की बिक्री/फिटिंग पर जुर्माना)
- केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (CMVR) — नियम 125, 126 (सुरक्षा मानक एवं प्रकाश व्यवस्था)
- e-DAR / iRAD पोर्टल परिचालन नियम (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- दुर्घटना जांच में डिजिटल साक्ष्य और सड़क सुरक्षा: ‘दुर्घटना में शामिल वाहनों के अवैध संशोधनों (इंजन, ब्रेक, लाइट) को छुपाना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है; e-DAR पोर्टल पर फोटो और वीडियो अपलोड करना अनिवार्य है और प्रत्येक अनधिकृत बदलाव पर ₹5,000 का वैधानिक जुर्माना लागू रहेगा।’
- वर्तमान स्थिति: राज्य के पुलिस प्रमुख और परिवहन आयुक्त को अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश; NIC को मुद्रित रिपोर्ट में फोटो को एकीकृत करने की तकनीकी समस्या हल करने का निर्देश; मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी।
Motor Vehicles Act: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| पीठ | न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन एवं न्यायमूर्ति मुरली कृष्णा एस. |
| मामला | स्वतः संज्ञान (Suo Motu) – सड़क सुरक्षा एवं अनधिकृत वाहन संशोधन |
| संबंधित पोर्टल | e-DAR Portal (www.irad.parivahan.gov.in) |
| मुख्य निर्देश | दुर्घटना रिपोर्ट में इंजन, ब्रेक और बॉडीवर्क के अवैध बदलावों के फोटो व वीडियो अपलोड करना अनिवार्य। |
| जुर्माना/शास्ति | अवैध एलइडी/नियॉन/लेजर/स्ट्रोब लाइट्स लगाने पर ₹5,000 प्रति संशोधन जुर्माना। |
| अगली सुनवाई | 28 अक्टूबर 2026 |

