Monday, October 19, 2026
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Adoption Guideline: पोर्टल के हर प्रोफाइल के पीछे एक बच्चा परिवार की और एक परिवार बच्चे की प्रतीक्षा में है;’CARA के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी

हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और CARA को निर्देश

1. “बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि”:

न्यायामूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया: “गलत रेफरल के कारण भावी दत्तक माता-पिता का भावनात्मक जुड़ाव वैधानिक आवश्यकताओं को दरकिनार नहीं कर सकता और न ही गोद लेने की प्रतीक्षा कर रहे अन्य पात्र परिवारों के साथ अन्याय कर सकता है। पोर्टल पर हर प्रोफाइल के पीछे एक परिवार है जो बच्चे का इंतजार कर रहा है, और एक बच्चा है जो परिवार का इंतजार कर रहा है।”

2. CARA के लिए जारी प्रमुख दिशानिर्देश:

  • पात्रता का कड़ा सत्यापन: CARA को पंजीकरण, होम स्टडी रिपोर्ट के री-वैलिडेशन और रेफरल भेजने—इन तीनों चरणों पर PAPs की पात्रता जांचनी होगी।
  • पोर्टल कॉन्फ़िगरेशन व ऑडिट: ‘CARINGS’ से ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ में माइग्रेशन के दौरान प्रभावित प्रोफाइल का ऑडिट किया जाए और पोर्टल को इस तरह कॉन्फ़िगर किया जाए कि अयोग्य श्रेणियों में स्वचालित रेफरल रुक सके।
  • NOC समयसीमा और लिखित संचार: विनियम 17(1) के तहत NOC जारी करने की समयसीमा का पालन हो। यदि दस्तावेजों में कमी है, तो CARA को एक समेकित लिखित पत्र के माध्यम से सूचित करना होगा।
  • जवाबदेही तय करना: इस मामले में हुई प्रशासनिक लापरवाही की जांच की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो और SOPs जारी कर कर्मचारियों को संवेदनशील बनाया जाए।

नई दिल्ली: किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act, 2015) की धारा 56 से 70, दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 (Adoption Regulations, 2022) के विनियम 5 (भावी दत्तक माता-पिता / PAPs की पात्रता मानदंड – दो जैविक बच्चों वाले दंपतियों का सामान्य श्रेणी से केवल विशेष आवश्यकता / हार्ड-टू-प्लेस बच्चों को गोद लेने का प्रतिबंध), विनियम 17(1) (अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र / NOC जारी करने की सांविधिक समय-सीमा), केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) द्वारा CARINGS पोर्टल से ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ (Mission Vatsalya Portal) में डेटा माइग्रेशन के दौरान हुई गंभीर तकनीकी व प्रशासनिक खामियां, तथा बच्चे के सर्वोत्तम हित के सिद्धांत (Principle of the Best Interests of the Child under Section 3(iv)) पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक युगांतरकारी विधिक निर्णय सुनाया है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने सिंगापुर निवासी एक भारतीय मूल के दंपति द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट व्यवस्था दी कि CARA के ऑनलाइन पोर्टल या अधिकारियों द्वारा की गई तकनीकी भूल, गलत रेफरल (Erroneous Referral) अथवा नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने में प्रशासनिक देरी किसी भी अपात्र व्यक्ति को किसी विशिष्ट बच्चे को गोद लेने का निहित या कानूनी रूप से प्रवर्तनीय अधिकार (Vested or Enforceable Legal Right) प्रदान नहीं कर सकती।

अदालत ने CARA की गंभीर प्रशासनिक लापरवाहियों और पोर्टल की गड़बड़ियों पर कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए देश भर में अंतर-देशीय व घरेलू दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने, पोर्टल में सुरक्षात्मक तकनीकी फिल्टर लगाने, प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए व्यापक राष्ट्रीय दिशा-निर्देश जारी किए।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायिक निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था

1. ‘गलत रेफरल या प्रशासनिक देरी वैधानिक पात्रता को निष्प्रभावी नहीं कर सकती’

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने दत्तक ग्रहण कानून की वैधानिक सर्वोच्चता को स्पष्ट करते हुए व्यवस्था दी: “यद्यपि CARA की प्रशासनिक खामियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के प्रसंस्करण में हुआ विलंब घोर असंतोष और अस्वीकृति के पात्र हैं, किंतु वे सांविधिक पात्रता आवश्यकताओं (Statutory Eligibility Requirements) को निष्प्रभावी नहीं कर सकते और न ही किसी विशेष बच्चे को गोद लेने का कोई विधिक रूप से प्रवर्तनीय अधिकार (Enforceable Right) प्रदान कर सकते हैं। न तो बच्चे का किया गया गलत रेफरल (Referral) और न ही याचिकाकर्ता द्वारा उसकी स्वीकृति कोई निहित अधिकार देती है, क्योंकि याचिकाकर्ता दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के तहत ‘सामान्य श्रेणी’ (Normal Category) से बच्चे को गोद लेने के लिए कानूनन पूरी तरह अपात्र (Statutorily Ineligible) थे।”

2. प्रशासनिक देरी किसी सामान्य बच्चे को ‘हार्ड-टू-प्लेस’ (कठिन श्रेणी) में नहीं बदल सकती:

  • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि मुकदमेबाजी और CARA की देरी के कारण बच्ची महीनों तक अनाथालय में रही, इसलिए अब उसे ‘हार्ड-टू-प्लेस’ या ‘विशेष आवश्यकता’ वाली मानकर उन्हें गोद दे दिया जाना चाहिए।
  • अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया:“प्रशासनिक प्रसंस्करण या अदालती मुकदमेबाजी के कारण हुए विलंब का उपयोग किसी सामान्य बच्चे को ‘हार्ड-टू-प्लेस’ (Hard-to-Place) या ‘विशेष आवश्यकता’ (Special Needs) वाली श्रेणी में लाने के लिए नहीं किया जा सकता। अन्यथा प्रशासनिक गलतियों की आड़ लेकर वैधानिक नियमों को दरकिनार करने की एक खतरनाक परिपाटी शुरू हो जाएगी।”

3. ‘माना गया अनुमोदन’ (Deemed Approval) का सिद्धांत लागू नहीं होगा:

  • न्यायालय ने यह दलील भी खारिज कर दी कि विनियम 17(1) के तहत NOC जारी करने की निर्धारित समय-सीमा बीत जाने पर ‘डीम्ड एनओसी’ मान ली जानी चाहिए।
  • पीठ ने माना कि निर्धारित समय-सीमा का उद्देश्य प्रक्रियाओं में तेजी लाना है, न कि ऐसे दंपतियों के पक्ष में एनओसी जारी करने की बाध्यता थोपना जो कानूनन पात्रता की बुनियादी शर्तें ही पूरी नहीं करते।

4. भावनात्मक लगाव बनाम अन्य प्रतीक्षारत परिवारों के साथ निष्पक्षता:

  • उच्च न्यायालय ने मानवीय संवेदनशीलता और विधिक संतुलन पर मार्मिक टिप्पणी करते हुए कहा:“गलत रेफरल के कारण भावी दत्तक माता-पिता (PAPs) के भीतर उत्पन्न होने वाला भावनात्मक लगाव (Emotional Attachment) कानून के वैधानिक अधिदेश को समाप्त नहीं कर सकता और न ही उन अन्य हजारों पात्र परिवारों के साथ अन्याय कर सकता है जो वर्षों से कतार में अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक प्रोफाइल के पीछे एक ऐसा परिवार है जो बच्चे की प्रतीक्षा कर रहा है, और एक ऐसा बच्चा है जो एक परिवार की प्रतीक्षा कर रहा है (Behind every profile on its portal, is a family waiting for a child, and a child waiting for a family)।”

मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं विधिक कालक्रम

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│सिंगापुर दंपति दत्तक ग्रहण विवाद: कालक्रम │
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【दिसंबर 2020: 1 बच्चे के साथ पंजीकरण】 【मार्च 2022: दूसरे जैविक पुत्र का जन्म】 【सितंबर 2025: HSR का पुनर्वैधीकरण】
• सिंगापुर निवासी दंपति ने CARA पोर्टल • दंपति के घर दूसरे जैविक पुत्र का जन्म • होम स्टडी रिपोर्ट (HSR) में 2 जैविक
पर 1 जैविक बच्चे के साथ आवेदन किया। हुआ; नियमानुसार वे सामान्य श्रेणी से बेटों की मौजूदगी विधिवत दर्ज हुई;
दत्तक ग्रहण हेतु अपात्र हो गए। पोर्टल ने पात्रता अपडेट नहीं की।
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【जनवरी 2026: नवजात बच्ची का गलत रेफरल】 【मार्च-अक्टूबर 2026: हाईकोर्ट का हस्तक्षेप】
• CARA ने नवंबर 2025 में जन्मी बच्ची को रेफर किया; • मार्च 2026 में आवेदन स्वतः रद्द दिखा।
दंपति ने बच्ची को देखा व स्वीकार किया। • हाईकोर्ट ने यथास्थिति आदेश हटाकर याचिका
खारिज की; बच्ची को पात्र परिवार को देने का आदेश।
चरण / विवरणतथ्यात्मक स्थिति एवं विधिक बिंदु
मूल पंजीकरण (दिसंबर 2020)सिंगापुर में रहने वाले याचिकाकर्ता और उनकी पत्नी ने CARA के पोर्टल पर एक जैविक बच्चे के माता-पिता के रूप में पंजीकरण कराया था। उस समय वे सामान्य श्रेणी के बच्चे के लिए पात्र थे।
पात्रता में सांविधिक बदलावमार्च 2022 में दंपति के दूसरे जैविक पुत्र का जन्म हुआ। दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के विनियम 5 के अनुसार, जिन दंपतियों के पहले से दो या अधिक जैविक बच्चे हैं, वे केवल ‘विशेष आवश्यकता वाले’ (Special Needs) या ‘हार्ड-टू-प्लेस’ बच्चों को ही गोद ले सकते हैं; वे सामान्य श्रेणी के नवजात शिशु के लिए कानूनन अपात्र हो जाते हैं।
HSR और CARA की भारी चूकसितंबर 2025 में जब होम स्टडी रिपोर्ट (HSR) का पुनर्वैधीकरण हुआ, तो उसमें दोनों बेटों का स्पष्ट उल्लेख था। इसके बावजूद CARINGS से ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल पर माइग्रेशन की तकनीकी गड़बड़ी के कारण जनवरी 2026 में CARA ने नवंबर 2025 में जन्मी एक परित्यक्त नवजात बच्ची को इस दंपति को रेफर कर दिया।
विवाद एवं रिट याचिकादंपति ने बच्ची को स्वीकार कर लिया और भारत आकर उससे मुलाकात भी की। किंतु मार्च 2026 में पोर्टल पर उनका आवेदन तकनीकी रूप से “खारिज/वापस लिया गया” दिखने लगा और CARA ने अपात्रता का हवाला देकर NOC देने से मना कर दिया। दंपति ने गोद लेने का अधिकार मांगते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में रिट दायर की।
हाईकोर्ट का अंतिम फैसलापूर्व में दिया गया अंतरिम यथास्थिति (Status Quo) आदेश समाप्त; याचिका खारिज; CARA को बच्ची को कानून के अनुसार तत्काल किसी अन्य पात्र माता-पिता को सौंपने का निर्देश।

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CARA के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी बाध्यकारी राष्ट्रीय दिशा-निर्देश

अदालत ने पाया कि CARA की प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक मासूम बच्चे का भविष्य अधर में लटका रहा और एक परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचा। भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए अदालत ने निम्नलिखित आदेशात्मक दिशानिर्देश (Mandatory Guidelines) जारी किए:

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│CARA प्रशासनिक सुधार: दिल्ली हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश │
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【त्रि-स्तरीय पात्रता सत्यापन】 【पोर्टल तकनीकी ऑडिट व ऑटो-फिल्टर】 【जवाबदेही, SOPs व संवेदीकरण】
• पंजीकरण के समय। • मिशन वात्सल्य पोर्टल का संपूर्ण ऑडिट। • लापरवाह अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय।
• HSR के प्रत्येक पुनर्वैधीकरण पर। • पोर्टल एल्गोरिदम में सांविधिक फिल्टर; • अस्वीकृति का लिखित कारण 24 घंटे में।
• बच्चे को रेफर करने से ठीक पहले। अपात्र प्रोफाइल को स्वतः ब्लॉक करे। • विनियम 17(1) के तहत NOC समय-सीमा का पालन।
  1. त्रि-स्तरीय पात्रता सत्यापन (Three-Stage Eligibility Verification):
    • CARA को प्रत्येक भावी दत्तक माता-पिता (PAPs) की पात्रता का अनिवार्य सत्यापन तीन विशिष्ट चरणों पर करना होगा:
      1. प्रारंभिक ऑनलाइन पंजीकरण के समय;
      2. होम स्टडी रिपोर्ट (HSR) के प्रत्येक पुनर्वैधीकरण (Revalidation) के समय; और
      3. किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए रेफर करने से ठीक पहले।
  2. मिशन वात्सल्य पोर्टल का ऑडिट एवं ऑटोमेशन:
    • CARINGS पोर्टल से नए ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ में माइग्रेट की गई सभी प्रोफाइलों का व्यापक तकनीकी ऑडिट किया जाए।
    • पोर्टल सॉफ्टवेयर को इस प्रकार पुनर्गठित किया जाए कि वह सांविधिक पात्रता मानदंडों के विपरीत किसी भी अपात्र माता-पिता को सिस्टम स्तर पर ही बच्चे का रेफरल जेनरेट न होने दे।
  3. विनियम 17(1) के तहत NOC समय-सीमा का कड़ा पालन:
    • अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण में अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने की वैधानिक समय-सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए।
    • यदि दस्तावेजों में कोई कमी है, तो CARA टुकड़ों-टुकड़ों में आपत्तियां लगाने के बजाय एक एकल समेकित लिखित सूचना (Consolidated Written Communication) के माध्यम से PAPs और संबंधित अधिकृत विदेशी एजेंसी (AFPA) को सूचित करे।
  4. प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासनात्मक कार्रवाई:
    • CARA वर्तमान मामले में हुई चूकों की आंतरिक जांच करे, खामियों की पहचान करे और दोषी अधिकारियों पर प्रशासनिक जिम्मेदारी (Fix Responsibility) तय करे।
    • सभी कर्मचारियों के लिए नई मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) जारी की जाएं और उन्हें संवेदनशील बनाया जाए।

विधिक एवं सांविधिक विश्लेषण: क्या कहता है दत्तक ग्रहण कानून?

  • दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 का नियम 5(4) — बच्चों की संख्या की सीमा:
    • भारत के दत्तक ग्रहण कानून का उद्देश्य उन बच्चों को परिवार देना है जिनके पास कोई नहीं है, और उन दंपतियों को प्राथमिकता देना है जिनके पास कोई जैविक संतान नहीं है।
    • नियम 5(4) स्पष्ट करता है कि जिन दंपतियों के पास दो या अधिक जैविक बच्चे पहले से हैं, वे सामान्य श्रेणी के बच्चे को गोद नहीं ले सकते। उन्हें केवल ‘विशेष आवश्यकता’ वाले दिव्यांग बच्चों या बड़े उम्र के कठिन श्रेणी के बच्चों को ही गोद लेने की अनुमति है।
  • किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 3(iv) — ‘बच्चे का सर्वोत्तम हित’:
    • दत्तक ग्रहण कोई संपत्ति संविदा नहीं है; यह एक सामाजिक-पुनर्वास प्रक्रिया है। कानून में माता-पिता का ‘गोद लेने का कोई मौलिक अधिकार’ नहीं है, बल्कि बच्चे का ‘परिवार पाने का अधिकार’ सर्वोपरि है।
    • प्रशासनिक त्रुटि के कारण किसी अपात्र परिवार को केवल सहानुभूति के आधार पर बच्चा नहीं सौंपा जा सकता, क्योंकि इससे कानून का शासन (Rule of Law) ध्वस्त हो जाएगा।
  • सद्भाव और भविष्य का विकल्प:
    • अदालत ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उसके इस फैसले से याचिकाकर्ता दंपति की सत्यनिष्ठा (Bona fides) या उनकी माता-पिता बनने की उपयुक्तता पर कोई सवाल नहीं खड़ा होता। वे एक सक्षम और अच्छे परिवार हैं।
    • अदालत ने आशा व्यक्त की कि वे कानूनी रूप से किसी विशेष आवश्यकता वाले या संरक्षण की प्रतीक्षा कर रहे अन्य बच्चे को अपनाकर एक परिवार का निर्माण कर सकेंगे।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: भावी दत्तक माता-पिता (सिंगापुर) बनाम केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – दिल्ली उच्च न्यायालय]
  • पीठ: न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा (एकल पीठ)
  • निर्णय की तिथि: अक्टूबर 2026
  • संबद्ध विषय: दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के तहत अपात्र विदेशी रेफरल की विधिक अप्रवर्तनीयता एवं CARA सुधार दिशा-निर्देश

विधिक पक्षकार:

  • याचिकाकर्ता: सिंगापुर निवासी भारतीय मूल के दंपति (दो जैविक पुत्रों के माता-पिता)
  • प्रतिवादी: केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) एवं महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act) — धारा 3(iv) (बच्चे का सर्वोत्तम हित), धारा 57 (PAPs की पात्रता) एवं धारा 59 (अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण प्रक्रिया)
    • दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 (Adoption Regulations, 2022) — विनियम 5 (दत्तक माता-पिता की पात्रता व बच्चों की संख्या की सीमा), विनियम 10 (रेफरल प्रक्रिया) एवं विनियम 17(1) (NOC निर्गमन की समय-सीमा)
    • हेग कन्वेंशन, 1993 (अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण पर अंतरराष्ट्रीय अभिसमय)
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 226 (संवैधानिक असाधारण क्षेत्राधिकार)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • सांविधिक पात्रता की सर्वोच्चता: ‘दत्तक ग्रहण में प्रशासनिक त्रुटि, गलत रेफरल या एजेंसी का विलंब किसी अपात्र आवेदक को विधिक रूप से बच्चा पाने का कोई प्रवर्तनीय अधिकार नहीं देता; बच्चे का सर्वोत्तम हित और सांविधिक नियमों का कठोर पालन भावनात्मक तर्कों से ऊपर है।’
  • अंतिम परिणाम: सिंगापुर निवासी दंपति की याचिका खारिज; अंतरिम यथास्थिति आदेश रद्द; CARA को बच्ची को कानून के अनुसार तत्काल किसी अन्य पात्र भावी माता-पिता को सौंपने का निर्देश; साथ ही पूरे देश के लिए CARA को पोर्टल ऑडिट, त्रि-स्तरीय सत्यापन और जवाबदेही तय करने हेतु बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी।

Adoption Guideline: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा
संबंधित प्राधिकरणकेंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA)
संबंधित नियमदत्तक ग्रहण विनियम, 2022 (Adoption Regulations, 2022) का विनियम 17(1)
मुख्य मुद्दाCARA द्वारा प्रशासनिक गलती से अयोग्य दंपत्ति को सामान्य श्रेणी का बच्चा रेफर करना और NOC में देरी।
मुख्य कानूनी सिद्धांत1. गलत रेफरल या भावनात्मक जुड़ाव के आधार पर वैधानिक योग्यता नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
2. प्रशासनिक देरी के कारण किसी सामान्य बच्चे को ‘विशेष आवश्यकता’ (Special-Needs) या ‘कठिन श्रेणी’ (Hard-to-Place) में नहीं डाला जा सकता।
अदालत का अंतिम आदेशयाचिका खारिज; स्टे ऑर्डर रद्द; CARA को बच्ची को कानून के अनुसार अन्य पात्र परिवार को गोद देने और प्रणाली में सुधार के निर्देश।
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