At A Glance | एक नज़र में बड़ी ख़बर
- असामान्य कदम: 29 जुलाई को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को दरकिनार करते हुए सीधे कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा।
- विवाद की वजह: कार्य-बंटवारे (Work-Allocation) का 28 जुलाई का आदेश, जिसे नियमों का उल्लंघन और स्थापित प्रथाओं से “बड़ा भटकाव” माना गया।
- मामले का नतीजा: आपत्ति के बाद विवादित कार्य-बंटवारे का आदेश वापस लिया गया और आईटी (IT) डिवीजन पर निगरानी प्रणाली पहले की तरह बनी रही।
- RTI से हुआ खुलासा: RTI अर्जी के जवाब में कैबिनेट सचिवालय में पत्रों की एंट्री और आगे की कार्रवाई का आधिकारिक कागज़ी सबूत (Paper Trail) सामने आया।
- दस्तावेज़ होल्ड पर: 14 पन्नों के अहम दस्तावेज़ मात्र ₹28 की फीस का भुगतान न होने के कारण फिलहाल रोके गए हैं।
नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र और चुनाव व्यवस्था की सबसे शीर्ष संस्था भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के भीतर से एक बेहद चौंकाने वाला और अभूतपूर्व मामला सामने आया है। देश के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को दरकिनार करते हुए सीधे देश के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी, यानी कैबिनेट सचिव को एक अधिकारिक पत्र लिखा।
यह पत्र चुनाव आयोग के भीतर कार्य-आबंटन (Work-Allocation) को लेकर पैदा हुए गंभीर मतभेदों के बाद लिखा गया था। अब इस पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे के आधिकारिक कागज़ी सबूतों का खुलासा एक सूचना के अधिकार (RTI) अर्जी के माध्यम से हुआ है।
आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले में क्या-क्या हुआ, RTI से क्या नए तथ्य सामने आए हैं और चुनाव आयोग का इस पर क्या आधिकारिक पक्ष है।
क्या है पूरा मामला? 29 जुलाई का वह अप्रत्याशित कदम
29 जुलाई को चुनाव आयोग के इतिहास में एक दुर्लभ घटना घटी। देश के तीन-सदस्यीय चुनाव आयोग में से दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने आयोग के प्रमुख, यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से शिकायत करने के बजाय सीधे कैबिनेट सचिव का दरवाज़ा खटखटाया।
इस पत्र का मुख्य कारण 28 जुलाई का एक कार्य-बंटवारा (Work-Allocation) आदेश था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दो आयुक्तों ने इस नए आदेश पर कड़ा ऐतराज़ जताया और इसे स्थापित नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
विवादित आदेश में क्या था?
- IT सिस्टम पर निगरानी का मुद्दा: रिपोर्टों के मुताबिक, 28 जुलाई के आदेश के जरिए मतदाता सूची (Electoral Rolls) का प्रबंधन करने वाले अति-संवेदनशील आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और बैकबोन से निगरानी की एक अहम परत (Layer of Oversight) को हटा दिया गया था।
- आयुक्तों को अंधेरे में रखा गया: दोनों चुनाव आयुक्तों ने यह स्पष्ट किया कि यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव उनकी जानकारी या सहमति के बिना किया गया था।
- स्थापित परंपराओं से भटकाव: इस कदम को आयोग के पारंपरिक कामकाज के तरीकों से “एक बेहद radical और बड़ा भटकाव” करार दिया गया।
RTI का खुलासा: कैबिनेट सचिवालय का Paper Trail
इंडिया टुडे द्वारा दायर की गई एक RTI अर्जी के जवाब में इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि हुई है। यह RTI 24 सितंबर को दाखिल की गई थी, जिसका आधिकारिक जवाब 19 अक्टूबर को आया।
RTI जवाब से जो आधिकारिक कागज़ी सबूत (Paper Trail) सामने आया है, वह इस प्रकार है:
[29 जुलाई] ──> दो आयुक्तों ने पत्र लिखा
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[30 जुलाई] ──> कैबिनेट सचिवालय में पत्र दर्ज (Logged) हुआ
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[05 अगस्त] ──> कैबिनेट सचिव ने पत्र DoPT और CEC कार्यालय को भेजा
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[19 अक्टूबर] ──> RTI जवाब में कागजी कार्रवाई की पुष्टि हुई
RTI के जवाब से यह साबित हो गया है कि दोनों आयुक्तों के पत्र कैबिनेट सचिवालय पहुंचे थे, उन्हें आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया और बाद में उन्हें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के कार्यालय को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया गया।
14 पन्ने और ₹28 की फीस: दस्तावेज़ों पर क्यों लगा है पेच?
हालांकि RTI के ज़रिए यह साफ हो गया कि चिट्ठियां अस्तित्व में हैं, लेकिन उनके भीतर आयुक्तों ने वास्तव में क्या लिखा था, इसका खुलासा होना अभी बाकी है।
कैबिनेट सचिवालय ने कुल 14 पन्नों के दस्तावेज़ को फिलहाल रोककर रखा है। इन 14 पन्नों में शामिल हैं:
- 10 पन्ने: दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा लिखे गए विस्तृत पत्र।
- 02 पन्ने: उस पत्र पर दिए गए आधिकारिक जवाब।
- 02 पन्ने: कैबिनेट सचिवालय की अंदरूनी फाइल नोटिंग्स (File Notings)।
₹28 का डिजिटल पेच!
सचिवालय ने इन 14 पन्नों को जारी करने के लिए ₹28 की प्रोसेसिंग फीस (₹2 प्रति पन्ना) मांगी है। दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार का शीर्ष प्रशासनिक निकाय—कैबिनेट सचिवालय—वर्तमान में इस फीस के लिए डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) स्वीकार नहीं करता है।
इस ₹28 की फीस का भुगतान केवल निम्नलिखित तरीकों से ही किया जा सकता है:
- डिमांड ड्राफ्ट (Demand Draft)
- बैंकर चेक (Banker’s Cheque)
- इंडियन पोस्टल ऑर्डर (Indian Postal Order)
- रसीद के साथ नकद (Cash against acknowledgment)
जैसे ही यह फीस चुका दी जाएगी, RTI के तहत वे 14 पन्ने जारी कर दिए जाएंगे, जिससे दोनों आयुक्तों के बयानों और कैबिनेट सचिव के जवाब की पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।
चुनाव आयोग (ECI) का आधिकारिक पक्ष
इस पूरे विवाद और मीडिया में चल रही खबरों के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को एक प्रेस रिलीज़ जारी कर अपनी सफाई पेश की थी।
आयोग ने अपने बयान में कहा: “कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीतिगत मामले या आईटी (IT) डिवीजन से संबंधित नहीं था, बल्कि यह ECI में डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। संबंधित अधिकारी द्वारा जारी किए गए कार्य-पुनर्वितरण आदेशों को दोनों आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया था। डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) द्वारा IT डिवीजन पर रखी जाने वाली निगरानी को कभी भी वास्तव में वापस नहीं लिया गया था।”
इसके अलावा, कुछ सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया था कि यह चिट्ठी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नहीं, बल्कि आयोग में तैनात एक वरिष्ठ उप-चुनाव आयुक्त (Deputy Election Commissioner) के कामकाज को लेकर थी।
RTI खुलासे के मायने: आगे क्या होगा?
चुनाव आयोग जैसे स्वायत्त और संवैधानिक निकाय में इस तरह की अंदरूनी खींचतान और पत्रों का आदान-प्रदान बेहद संवेदनशील मामला है। अब तक यह पूरा मामला सिर्फ लीक हुई खबरों, सूत्रों के दावों और प्रेस नोट तक सीमित था।
लेकिन इस RTI जवाब ने पहली बार इसे एक आधिकारिक मुहर दी है। यह साफ हो गया है कि:
- दोनों आयुक्तों ने पत्र लिखा था।
- वह पत्र कैबिनेट सचिवालय तक पहुंचा।
- कैबिनेट सचिव ने उस पर संज्ञान लेते हुए उसे DoPT और CEC दफ्तर भेजा।
- विवादित आदेश को अंततः रद्द कर दिया गया और IT विभाग का नियंत्रण पहले जैसा सुरक्षित रखा गया।
जैसे ही नियमानुसार ₹28 की फीस जमा कर 14 पन्नों के मूल दस्तावेज़ प्राप्त होंगे, इस पूरे प्रशासनिक घटनाक्रम की हर एक परत और दोनों आयुक्तों के वास्तविक शब्दों का पूरी तरह से खुलासा हो जाएगा।
RTI reveals ECI Row: Key Indicators | मुख्य बिंदु और घटनाक्रम
| मुख्य बिंदु (Key Indicator) | विवरण (Details) |
| मुख्य पात्र (Key Figures) | सुखबीर सिंह संधू (EC), विवेक जोशी (EC), ज्ञानेश कुमार (CEC), कैबिनेट सचिव |
| पत्र की तारीख (Letter Date) | 29 जुलाई |
| कैबिनेट सचिवालय में एंट्री | 30 जुलाई को दर्ज, 5 अगस्त को आगे भेजा गया |
| संबंधित विभाग | कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और CEC कार्यालय |
| रोके गए पन्ने (Withheld Pages) | 14 पन्ने (10 पन्नों का पत्र + 2 पन्ने जवाब + 2 पन्ने फाइल नोटिंग) |
| RTI फीस (Processing Fee) | ₹28 (केवल ऑफलाइन माध्यम से भुगतान योग्य) |

