Tuesday, August 4, 2026
HomeBREAKING INDIACourt News: मप्र हाई कोर्ट ने अस्पष्ट आदेश देने पर जज पर...

Court News: मप्र हाई कोर्ट ने अस्पष्ट आदेश देने पर जज पर लिया Action, जज का 5 वर्ष की न्यायिक कार्यवाही की फाइलों का होगा निरीक्षण, 90 दिन के भीतर मांगी रिपोर्ट

Court News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमि मुआवजा मामले में निचली अदालत के संक्षिप्त आदेश को खारिज कर जज पर रिपोर्ट तलब की है।

अस्पष्ट आदेश को किया रद्द, कड़ा संज्ञान लिया…

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक भूमि-संबंधी मुआवजा मामले में निचली अदालत द्वारा पारित एक अस्पष्ट (cryptic) आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने सिंगरौली जिले के देवसर में पदस्थ चतुर्थ जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा के संबंध में एक रिपोर्ट 90 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) को दिया है।

जिला न्यायाधीश को 30 दिनों के भीतर दोबारा सुनवाई करने के दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि चतुर्थ जिला जज दिनेश कुमार शर्मा द्वारा पिछले पांच वर्षों में अलग-अलग स्थानों पर की गई न्यायिक कार्यवाही की फाइलों का निरीक्षण तीन महीने में पूरा किया जाए। कहा, 03 अगस्त 2024 को पारित विवादित आदेश को निरस्त किया जाता है। यह मामला अब संबंधित जिला न्यायाधीश को भेजा जाता है, जो इसे 30 दिनों के भीतर नियमों के अनुसार दोबारा सुनकर निर्णय लें। मामले से संबंधित भूमि, जो 0.01 हेक्टेयर की है और सिंगरौली जिले के गोडवाली गांव निवासी मंगल शरण के स्वामित्व में थी, लालितपुर-सिंगरौली रेल लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी।

याचिकाकर्ता शरण के वकील का दावा

याचिकाकर्ता शरण के वकील नित्यनंद मिश्रा ने बताया कि याचिकाकर्ता इस बात से आहत थे कि मुआवजे के लिए भूमि को तो गिना गया, लेकिन उस पर बने घर को नजरअंदाज कर दिया गया। नियमों के अनुसार, याचिकाकर्ता ने सिंगरौली कलेक्टर के समक्ष आवेदन देकर घर के लिए भी मुआवजा मांगा, लेकिन अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद याचिकाकर्ता ने जिला न्यायाधीश की अदालत में राहत के लिए याचिका दायर की। लेकिन 3 अगस्त 2024 को न्यायाधीश शर्मा ने याचिका खारिज कर दी, जिससे याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अग्रवाल की टिप्पणी

माननीय चौथे जिला न्यायाधीश ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम की धारा 64 का अध्ययन करने में विफलता दिखाई और एक संक्षिप्त आदेश पारित कर दिया। यदि न्यायाधीश ने अधिनियम 2013 की धारा 64 के प्रावधानों को ठीक से पढ़ने का प्रयास किया होता, तो इस प्रकार का अस्पष्ट आदेश नहीं दिया गया होता।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
light rain
34.8 ° C
34.8 °
34.8 °
52 %
2.7kmh
100 %
Tue
37 °
Wed
29 °
Thu
29 °
Fri
34 °
Sat
35 °