Monday, February 16, 2026
HomeLaworder HindiRape Case: पीड़िता की गवाही स्वीकार करने में हाे रही कठिनाई…पुष्टि करने...

Rape Case: पीड़िता की गवाही स्वीकार करने में हाे रही कठिनाई…पुष्टि करने चलें तो कहानी अविश्वसनीय, क्यों कहा सुप्रीम कोर्ट ने

Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के दो दोषियों को बरी कर दिया, यह पाते हुए कि अभियोजन की कहानी कमियों से भरी थी और उस पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ।

आरोपी की रक्षा करने में भी समान रूप से सतर्क रहना चाहिए: कोर्ट

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने एक पुराने फैसले का हवाला दिया, जिसमें झूठे दुष्कर्म के आरोपों के खिलाफ सतर्कता बरतने की बात कही गई थी, क्योंकि इससे आरोपित व्यक्ति को मानसिक पीड़ा, क्षति और अपमान झेलना पड़ता है, हालांकि वास्तविक दुष्कर्म सबसे बड़ी पीड़ा का कारण होता है। पीठ ने कहा कि अदालत को झूठे फंसाए जाने से आरोपी की रक्षा करने में भी समान रूप से सतर्क रहना चाहिए। पीठ ने कहा, यह स्वीकार करने में कठिनाई हो रही है कि पीड़ितों की गवाही पूर्ण विश्वसनीयता वाली है। हम यह भी नहीं कह सकते कि पीड़ितों द्वारा बताई गई कहानी भरोसेमंद है। यदि हम कोई पुष्टिकरण ढूंढें, तो पूरी कहानी अविश्वसनीय और उसके सूक्ष्म विवरणों में असमर्थ प्रतीत होती है।

दो आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

यह फैसला दो आरोपियों द्वारा दायर एक अपील पर आया था, जिन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के जुलाई 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें निचली अदालत के जुलाई 2003 के निर्णय के खिलाफ उनकी अपील को खारिज कर दिया गया था। निचली अदालत ने जून 2000 में दो महिलाओं के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में उन्हें दोषी ठहराया था। इस मामले में कुल चार आरोपी थे, जिनमें से दो को केवल अपहरण के आरोप में दोषी ठहराया गया था। हाई कोर्ट ने उन दो आरोपियों की अपील स्वीकार कर उन्हें बरी कर दिया था। हालांकि, जिन दो आरोपियों की अपील सुप्रीम कोर्ट के समक्ष थी, उनकी सजा को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था।

गवाह ने किसी भी आरोपी की पहचान नहीं की

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत और हाई कोर्ट दोनों ने उस गवाह की गवाही पर अत्यधिक भरोसा किया, जिसने कथित पीड़ितों को एक बच्चे के साथ उस वाहन में यात्रा करते हुए देखा था, जिसमें चारों आरोपी यात्रा कर रहे थे। पीठ ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि उस गवाह ने इनमें से किसी भी आरोपी की पहचान नहीं की कि वे टेम्पो में यात्रा कर रहे थे। पीठ ने कहा, अभियोजन द्वारा पेश की गई कहानी, जिसे अभियोजन पक्ष के गवाहों (कथित पीड़ितों) ने बताया, उसमें कई खामियां हैं और यह हमारे मन में गंभीर संदेह उत्पन्न करती है, जो एक न्यायसंगत संदेह की श्रेणी में आता है। अपील को स्वीकार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया और निचली अदालतों के आदेशों को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि आरोपी हिरासत में हैं और किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें रिहा कर दिया जाए।

यह है दुष्कर्म मामले में केस

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि दो महिलाएं कुर्ला जाने के इरादे से एक टेम्पो में सवार हुई थीं, जिसमें चारों आरोपी यात्रा कर रहे थे। आरोपियों ने वाहन को कुर्ला में नहीं रोका और महिलाओं को एक खेत में ले गए, जहां दो आरोपियों ने उनके साथ दुष्कर्म किया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments