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OD-HC: अब ठेके पर काम करने वाली महिलाओं को भी मातृत्व अवकाश…ओडिशा हाईकोर्ट की टिप्पणी

OD-HC: ओडिशा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा, राज्य सरकार के तहत ठेके पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों को भी मातृत्व अवकाश और उससे जुड़ी सुविधाएं मिलनी चाहिए।

राज्य सरकार की अपील खारिज

हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली महिला को मातृत्व अवकाश का अधिकार नहीं है।यह फैसला जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और मृगांका शेखर साहू की बेंच ने सुनाया। बेंच ने अगस्त 2022 में सिंगल जज द्वारा दिए गए उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की एक महिला कर्मचारी के पक्ष में निर्णय दिया गया था। उस महिला की मातृत्व अवकाश की अर्जी 17 अगस्त 2016 से 12 फरवरी 2017 तक के लिए दी गई थी, जिसे विभाग ने खारिज कर दिया था।

यह थी सरकार की दलील

राज्य सरकार ने दलील दी थी कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली महिला को मातृत्व लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि वह नियमित कर्मचारी नहीं है। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समझौतों जैसे ICESCR और CEDAW का हिस्सा है, जो मातृत्व लाभ को सामाजिक अधिकार मानते हैं।

मातृत्व का सामाजिक महत्व है: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि मातृत्व का सामाजिक महत्व है और बच्चे के पालन-पोषण में मां और पिता दोनों की भूमिका अहम होती है। फैसले में कहा गया, “कहा जाता है कि भगवान हर जगह नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने मां बनाई। मातृत्व अवकाश का विचार इस पर आधारित है कि एक स्तनपान कराने वाली मां और उसके बच्चे के बीच कोई दूरी न हो।”

बाल मनोचिकित्सकों और प्रसूति विशेषज्ञों की राय का हवाला

कोर्ट ने बाल मनोचिकित्सकों और प्रसूति विशेषज्ञों की राय का हवाला देते हुए कहा कि मां और बच्चे के बीच शारीरिक साथ रहना दोनों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक स्तनपान कराने वाली मां को अपने बच्चे को दूध पिलाने का मौलिक अधिकार है और बच्चे को भी अच्छे माहौल में पाला जाना उसका अधिकार है। इन्हीं अधिकारों के आधार पर राज्य की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह मातृत्व लाभ जैसे पेड लीव दे।

सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाईकोर्ट्स के पुराने फैसलों की चर्चा

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाईकोर्ट्स के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली महिलाओं को भी मातृत्व अवकाश का अधिकार है। राज्य सरकार की इस दलील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया कि केवल नियमित महिला कर्मचारी ही मातृत्व अवकाश की हकदार हैं। कोर्ट ने कहा, “महिला कर्मचारी एक समान वर्ग हैं और उन्हें नियुक्ति की स्थिति के आधार पर बांटना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

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