Friday, October 16, 2026
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Kingfisher Crisis: 9 साल तक नौकरी किया…1.39 करोड़ रुपए बकाया वेतन नहीं मिले, एक पायलट का इस तरह छलका दर्द

Kingfisher Crisis: किंगफिशर एयरलाइंस (Kingfisher Airlines) के बंद होने के एक दशक बाद भी उसके कर्मचारियों का संघर्ष जारी है।

कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की एकल पीठ ने कैप्टन मुकेश सिंह शक्तावत और कैप्टन डेसमंड डी’मेलो की याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अपनी याचिका की प्रति ‘ऑफिशियल लिक्विडेटर’ (Official Liquidator) को सौंपें। अब एयरलाइंस के दो पूर्व पायलटों ने अपने बकाया वेतन की वसूली के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पायलटों का कहना है कि उनकी सैलरी की राशि तय (Finalized) होने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है।

मुख्य शिकायत: “सब तय, फिर भी पैसा नहीं”

याचिकाकर्ता कैप्टन शक्तावत के अनुसार उन्होंने दिसंबर 2005 से फरवरी 2014 तक एयरलाइंस में सेवा दी। जुलाई 2011 से फरवरी 2014 के बीच का उनका वेतन और अन्य बकाया लगभग 1,39,77,487 रुपये है। लिक्विडेटर ने 2022-23 में ही इस राशि को फाइनल कर दिया था, लेकिन अब तक केवल ‘प्रोविडेंट फंड’ (PF) का पैसा ही मिला है, सैलरी नहीं।

SBI और फंड का पेच (The Funding Deadlock)

    • याचिका में ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ (SBI) की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
    • रिकवरी: पायलटों का दावा है कि बैंकों के कंसोर्टियम ने संपत्तियों की बिक्री से लगभग 14,000 करोड़ रुपये वसूल किए हैं।
    • फंड रिलीज: बताया गया है कि SBI ने 15 दिसंबर 2025 को लिक्विडेटर को 142.24 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
    • दलील: पायलटों का कहना है कि यदि ब्याज को छोड़ भी दें, तो वसूल की गई राशि सभी कर्मचारियों और लेनदारों के मूल धन (Principal amount) चुकाने के लिए पर्याप्त है।

    कानूनी आधार: ‘जीवन और आजीविका का अधिकार’

    • याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में कड़े तर्क दिए हैं।
    • आर्टिकल 21: वेतन न देना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन और आजीविका के अधिकार’ का उल्लंघन है।
    • वर्कमैन कैटेगरी: पूर्व कर्मचारियों ने खुद को इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 के तहत ‘वर्कमैन’ (Workmen) की श्रेणी में रखने और अन्य सुरक्षित लेनदारों (Secured Creditors) पर प्राथमिकता देने की मांग की है।
    • इन रेम (In Rem) आदेश: पायलटों ने प्रार्थना की है कि कोर्ट ऐसा आदेश दे जो सभी पूर्व कर्मचारियों पर लागू हो, ताकि हर किसी को अलग से अदालत के चक्कर न काटने पड़ें।

    केस की पृष्ठभूमि: विजय माल्या और किंगफिशर

    • डिफ़ॉल्ट: विजय माल्या और किंगफिशर एयरलाइंस पर भारतीय बैंकों के कंसोर्टियम का 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।
    • जांच: यह मामला ED, CBI, SFIO और SEBI जैसी एजेंसियों की रडार पर है। माल्या फिलहाल यूनाइटेड किंगडम (UK) में हैं।

    निष्कर्ष: 10 साल का लंबा इंतजार

    किंगफिशर के कर्मचारियों के लिए यह केवल पैसे की बात नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और सम्मान की लड़ाई है। 10 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अपनी मेहनत की कमाई के लिए कोर्ट के दरवाजे खटखटाना सिस्टम की सुस्ती को दर्शाता है।

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