Thursday, September 24, 2026
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Court News: 2007 में हत्या का केस दर्ज कर जांच भूल गई दिल्ली पुलिस…कोर्ट ने किया सवाल

Court News: दिल्ली की एक अदालत ने 2007 में हुई एक हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई है।

ड्यूटी में कोताही बर्दाश्त नहीं: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि इंसानी जान से जुड़े मामलों में ड्यूटी में कोताही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इस मामले में डीसीपी रैंक के अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट भारती बेनीवाल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 30-35 साल के एक युवक की 30 जुलाई 2007 को संदिग्ध और आपराधिक हालात में मौत हुई, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद सही तरीके से जांच नहीं की। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में युवक की गर्दन पर रस्सी के निशान और सिर के पिछले हिस्से पर गंभीर चोट पाई गई, जो साफ तौर पर हत्या की ओर इशारा करते हैं। इसके बावजूद पुलिस ने सही ढंग से मामले की जांच शुरू नहीं की।

यह मामला पुलिस तंत्र की गंभीर लापरवाही: कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि यह मामला पुलिस तंत्र की गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करता है। चार गवाहों के बयान रिकॉर्ड पर आए हैं, जिनसे पता चलता है कि मृतक अजमेरी गेट स्थित मोहन होटल में काम करता था और उसकी हत्या होटल के अंदर ही की गई थी। बाद में शव को पास के नाले में फेंक दिया गया ताकि अपराध को छिपाया जा सके। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और घटनास्थल की जानकारी होने के बावजूद उस समय के एसएचओ और एसीपी ने एफआईआर दर्ज नहीं की। उस समय कमला मार्केट थाने के एसएचओ रहे रिटायर्ड एसीपी दिनेश कुमार ने कहा कि उन्होंने थाने के रिकॉर्ड में इनक्वेस्ट रिपोर्ट देखी और फिर डीसीपी से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी।

केस दर्ज होने के बाद भी गवाह या संदिग्ध से पूछताछ नहीं

कोर्ट ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने गवाहों या संदिग्धों से पूछताछ तक नहीं की। ऐसा लगता है कि एफआईआर सिर्फ औपचारिकता के तौर पर दर्ज की गई थी। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के रवैये को “संदिग्ध” बताया और कहा कि यह या तो जानबूझकर की गई लापरवाही है या फिर आरोपियों को बचाने की कोशिश।

डीसीपी सेंट्रल को नोटिस जारी

कोर्ट ने डीसीपी सेंट्रल को नोटिस जारी कर कहा है कि वह अदालत को बताए कि मृतक की मौत की तारीख से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक किन-किन एसएचओ, जांच अधिकारियों और एसीपी की जिम्मेदारी थी। साथ ही, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (सेंट्रल रेंज) को निर्देश दिया गया है कि वह इस मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करें और दोषी पुलिसकर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई करें। कोर्ट ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि वह यह जांच करे कि क्या उस समय के पुलिसकर्मी किसी साजिश या मिलीभगत में शामिल थे। इस मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त को होगी।

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