Thursday, September 24, 2026
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Delhi HC: 40 साल तक केस लटकना तेज ट्रायल अधिकार के खिलाफ…3 वर्ष की सजा एक दिन की

Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के एक भ्रष्टाचार मामले में 90 साल के बुजुर्ग सुरेंद्र कुमार को राहत दी है।

90 साल की उम्र में आरोपी गंभीर बीमारियों से जूझ रहा

कोर्ट ने उनकी तीन साल की सजा घटाकर एक दिन कर दी। कोर्ट ने कहा कि 40 साल तक केस लटकना संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए तेज ट्रायल के अधिकार के खिलाफ है। जस्टिस जस्मीत सिंह ने कहा कि आरोपी की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए जेल भेजना शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने कहा कि 90 साल की उम्र में आरोपी गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है। ऐसे में जेल भेजना उसके लिए स्थायी नुकसान का कारण बन सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सजा कम करने के लिए उपयुक्त है। इसलिए आरोपी की सजा घटाकर उतनी कर दी जाती है, जितनी वह पहले ही काट चुका है। अपील आंशिक रूप से मंजूर की जाती है।

40 साल पुराना मामला, 22 साल से अपील लंबित

यह मामला जनवरी 1984 का है। ट्रायल पूरा होने में करीब 19 साल लगे और अपील 22 साल से लंबित थी। कोर्ट ने कहा कि इतनी लंबी देरी संविधान के तहत मिले तेज ट्रायल के अधिकार के खिलाफ है। सुरेंद्र कुमार उस समय स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (STC) में चीफ मार्केटिंग मैनेजर थे। उन पर मुंबई की एक फर्म से 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप था।

सीबीआई ने रंगे हाथ पकड़ा था

केस के मुताबिक, एसटीसी ने 140 टन सूखी मछली की सप्लाई के लिए कोटेशन मंगवाए थे। मुंबई की एक फर्म ने अब्दुल करीम हमीद के जरिए कोटेशन दिया। हमीद ने आरोप लगाया कि सुरेंद्र कुमार ने ऑर्डर दिलाने के बदले 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। कुमार ने हमीद से कहा कि अगले दिन होटल में 7,500 रुपए लेकर आए और बाकी रकम ऑर्डर मिलने के बाद दे। हमीद ने इसकी शिकायत सीबीआई से की। सीबीआई ने जाल बिछाकर कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

2002 में दोषी करार, तभी अपील दायर की

सुरेंद्र कुमार को 1984 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जल्द ही जमानत मिल गई। 2002 में उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक कानून और आईपीसी की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। उन्हें तीन साल की सजा और 15 हजार रुपए जुर्माना हुआ। उन्होंने उसी साल सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, जो अब जाकर सुनी गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषसिद्धि बरकरार रहेगी, लेकिन सजा घटा दी गई है। आरोपी ने 15 हजार रुपए का जुर्माना पहले ही जमा कर दिया था।

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