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Elephant use: हाथी की भलाई इंसानों के धार्मिक अधिकारों से ऊपर…यह रही बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी

Elephant use: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि एक हाथी को बेहतर जीवन जीने का अधिकार, इंसानों के धार्मिक आयोजनों में उसके इस्तेमाल के अधिकार से कहीं ज्यादा अहम है।

हाथी ‘महादेवी उर्फ माधुरी’ के मामले में आदेश

कोर्ट ने बुधवार को दिए फैसले में कोल्हापुर के एक ट्रस्ट से हाथी ‘महादेवी उर्फ माधुरी’ को हटाकर गुजरात के जामनगर स्थित राधे कृष्णा एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में भेजने के आदेश को बरकरार रखा।जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और नील गोकले की बेंच ने कहा कि कोल्हापुर ट्रस्ट में रहते हुए हाथी की मानसिक और शारीरिक हालत खराब हो गई थी। इसके उलट जामनगर का ट्रस्ट हाथी के लिए किसी वरदान से कम नहीं लगता। कोर्ट ने कहा कि हाथी के जीवन और उसकी भलाई को इंसानों के धार्मिक आयोजनों में उसके इस्तेमाल के अधिकार से ऊपर रखा जाना चाहिए।

पेटा की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई

हाथी को स्थानांतरित करने का आदेश पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया की शिकायत के बाद दिया गया था। शिकायत में हाथी की खराब हालत की जानकारी दी गई थी। इसके बाद हाईपावर कमेटी ने दिसंबर 2024 और जून 2025 में हाथी को जामनगर ट्रस्ट भेजने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने ट्रस्ट की याचिका खारिज की

कोल्हापुर के स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्था ने इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। संस्था का कहना था कि वह 1992 से हाथी की मालिक है और धार्मिक आयोजनों में उसकी मौजूदगी परंपरा का हिस्सा है। लेकिन कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी।

हाथी की हालत बेहद खराब: रिपोर्ट

कोर्ट ने जून 2024 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें हाथी के स्वास्थ्य, खानपान, सामाजिक माहौल, साफ-सफाई, पशु चिकित्सा देखभाल और काम के घंटे जैसे पहलुओं की समीक्षा की गई थी। रिपोर्ट में हाथी की हालत को ‘बेहद खराब’ बताया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, हाथी के कूल्हों और शरीर के कुछ हिस्सों पर गंभीर घाव थे।

कोर्ट ने कहा- जानबूझकर नुकसान नहीं पहुंचाया, लेकिन…

कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता संस्था की मंशा हाथी को नुकसान पहुंचाने की नहीं थी। लेकिन हाथी के अधिकार और धार्मिक आयोजनों में उसके इस्तेमाल के अधिकार के बीच टकराव की स्थिति में प्राथमिकता हाथी की भलाई को दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने लेखक लॉरेंस एंथनी के शब्दों को याद किया

कोर्ट ने लेखक लॉरेंस एंथनी की किताब ‘द एलिफेंट व्हिस्परर’ का जिक्र करते हुए कहा, “शायद सबसे जरूरी सबक यह है कि इंसानों और हाथियों के बीच कोई दीवार नहीं है, सिवाय उन दीवारों के जो हम खुद खड़ी करते हैं। जब तक हम हाथियों ही नहीं, बल्कि सभी जीवों को उनके हिस्से की धूप नहीं देंगे, तब तक हम खुद भी अधूरे रहेंगे। अब हाथी को दो हफ्तों में जामनगर ट्रस्ट भेजा जाएगा।

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