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Promise to marry: पति के रहते प्रेम संबंध बनाए, अब रेप का आरोप नहीं चलेगा…ऐसा क्यों कहा सुप्रीम कोर्ट ने

Promise to marry: सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने पूर्व प्रेमी को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की थी।

कोर्ट ने कहा- आप समझदार हैं, जिम्मेदारी आपकी भी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “आप एक परिपक्व महिला हैं, शादीशुदा थीं और दो बच्चों की मां हैं। आप जानती थीं कि आप विवाहेतर संबंध बना रही हैं। अब आप खुद को पीड़ित नहीं बता सकतीं।” कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया और महिला की याचिका खारिज कर दी।

पटना हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया

महिला ने उस पर शादी का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि जब महिला पहले से शादीशुदा थी, तब यह संबंध बना और अब वह खुद को पीड़ित बता रही है। कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया, जिसमें आरोपी को अग्रिम जमानत दी गई थी।

विवाहेतर संबंध बनाकर अपराध किया: शीर्ष कोर्ट

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनवाई के दौरान महिला से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने कहा, “आप बार-बार उसकी बात मानकर होटल क्यों जाती रहीं? आप समझदार हैं, शादीशुदा हैं और दो बच्चों की मां हैं। आपने भी विवाहेतर संबंध बनाकर अपराध किया है।”

सोशल मीडिया पर हुई थी मुलाकात

महिला की याचिका के मुताबिक, उसकी मुलाकात आरोपी से 2016 में सोशल मीडिया पर हुई थी। जुलाई 2022 में आरोपी ने उसे सुल्तानगंज के एक रेस्ट हाउस में बुलाया। महिला का आरोप है कि वहां उसे खाने-पीने में नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

ब्लैकमेल कर रिश्ता जारी रखने का आरोप

महिला ने दावा किया कि आरोपी ने आपत्तिजनक फोटो और वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल किया और शादी का वादा कर रिश्ता बनाए रखा। दबाव में आकर महिला ने तलाक की अर्जी दी और मार्च 2023 में उसे तलाक मिल गया। लेकिन तलाक के बाद आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने बिहार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

हाईकोर्ट ने कहा- तलाक के बाद संबंध नहीं रहे

पटना हाईकोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए कहा था कि तलाक के बाद दोनों के बीच कोई संबंध नहीं रहा। महिला के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाईकोर्ट ने आरोपी द्वारा धमकी और दबाव की बातों को नजरअंदाज किया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

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