Monday, February 16, 2026
HomeLaworder Hindi Recalls verdict: अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल न्याय करने के लिए होता है,...

 Recalls verdict: अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल न्याय करने के लिए होता है, अन्याय के लिए नहीं, किस मामले काे लेकर सुप्रीम अदालत ने कही बात

 Recalls verdict: सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 2 मई को भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (BPSL) को लिक्विडेट करने और JSW स्टील की समाधान योजना को खारिज करने के पुराने आदेश काे वापस ले लिया।

रिटायर जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने कानूनी स्थिति को सही तरीके से नहीं समझा

चीफ जस्टिस BR गवई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यह फैसला कानून की सही व्याख्या पर आधारित नहीं था और इसमें कई तथ्यात्मक गलतियां थीं। कोर्ट ने माना कि 2 मई का फैसला, जो अब रिटायर हो चुकीं जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने लिखा था, उसने पहले के कई फैसलों में तय की गई कानूनी स्थिति को सही तरीके से नहीं समझा। कोर्ट ने कहा कि यह मामला दोबारा विचार के लायक है और अब इसकी नई सुनवाई होगी।

अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल पर सवाल

वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत कोर्ट ने NCLT को कंपनी को लिक्विडेट करने का आदेश दिया था। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल न्याय करने के लिए होता है, न कि 25 हजार लोगों के साथ अन्याय करने के लिए। अब अगली सुनवाई अगले गुरुवार को होगी, जिसमें कोर्ट इस मामले की दोबारा सुनवाई करेगा और तय करेगा कि JSW स्टील की समाधान योजना को फिर से मंजूरी दी जाए या नहीं।

25 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर संकट

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने हैरानी जताई कि BPSL में इस समय 25 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं और JSW स्टील ने कंपनी को दोबारा खड़ा करने के लिए 30 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है। कोर्ट ने कहा, “हमें बड़ी तस्वीर भी देखनी चाहिए। 25 हजार लोगों को सड़क पर नहीं छोड़ा जा सकता।”

IBC के मकसद के खिलाफ था पुराना फैसला

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि 2 मई का फैसला IBC के मकसद के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि IBC का उद्देश्य कंपनियों को दोबारा खड़ा करना है, न कि उन्हें बंद करना। उन्होंने यह भी बताया कि JSW स्टील 2021 से कंपनी चला रही है और उसने इसके लिए कर्ज भी लिया है।

97.75% लेनदारों ने योजना को मंजूरी दी थी

JSW स्टील की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने बताया कि 97.75% लेनदारों ने समाधान योजना को मंजूरी दी थी और इसे NCLT और NCLAT दोनों ने सही ठहराया था। उन्होंने कहा कि योजना पूरी तरह लागू हो चुकी है, नया निवेश हुआ है और सभी लेनदारों को भुगतान किया गया है।

पुराने फैसले से खतरनाक मिसाल बनी

कौल ने कहा कि 2 मई का फैसला एक खतरनाक मिसाल बनाता है और इससे IBC की मूल भावना को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई योजना के मंजूर होने के बाद शुरू हुई, जिससे कानूनी प्रक्रिया लंबी हो गई।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments