Sunday, September 20, 2026
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Hong Kong Court: हांगकांग हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला…लेस्बियन कपल को बेटे की पैरेंटल मान्यता मिली

Hong Kong Court: हांगकांग में मंगलवार को एक अदालत ने लेस्बियन दंपति को उनके बेटे की कानूनी पैरेंटल मान्यता देने के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

IVF प्रक्रिया से जन्मा था बच्चा

यह बच्चा रिसिप्रोकल इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया से जन्मा था। कपल, जिन्हें B और R के रूप में पहचाना गया है, ने 2020 में दक्षिण अफ्रीका में शादी के बाद यह मेडिकल प्रक्रिया कराई थी। उपचार के दौरान R के अंडाणु को एक गुमनाम पुरुष डोनर के शुक्राणु से निषेचित कर भ्रूण बनाया गया, जिसे बाद में B की कोख में प्रत्यारोपित किया गया। बच्चा 2021 में हांगकांग में जन्मा, लेकिन उसके जन्म प्रमाणपत्र पर केवल B को मां के रूप में दर्ज किया गया।

यह रहा न्यायाधीश का तर्क

जस्टिस रसेल कोलमैन ने अपने लिखित फैसले में कहा कि हांगकांग का Parent and Child Ordinance बच्चे को R से अपने रिश्ते को समाज में प्रदर्शित करने से रोकता है। उन्होंने माना कि मौजूदा कानून प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों और सामाजिक लाभों के बीच उचित संतुलन नहीं बना पाता। हालांकि, अदालत ने अभी राहत संबंधी अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। जज ने कहा कि वह इस पर आगे की दलीलें सुनना चाहते हैं।

पहले का फैसला और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण

2023 में भी एक अलग मामले में जज क्विनी औ-युंग ने माना था कि भले ही R विधिक योजना के अंतर्गत नहीं आतीं, लेकिन कॉमन लॉ के तहत वह बच्चे की पैरेंट मानी जाएंगी। दक्षिण अफ्रीकी कानून में भी कपल को बच्चे के माता-पिता के रूप में मान्यता दी गई है। यूरोप में पिछले कुछ वर्षों में कई अदालतों ने समान-लैंगिक दंपतियों को बच्चों की पैरेंटल मान्यता पर बेहतर कानूनी अधिकार दिए हैं। 2021 में यूरोपीय न्यायालय (European Court of Justice) ने फैसला सुनाया था कि अगर किसी बच्चे को दो माताओं के साथ एक ईयू देश में प्रमाणित किया गया है, तो अन्य सदस्य देशों को भी इसे मान्यता देनी होगी। 2024 में इटली की संवैधानिक अदालत ने दो महिलाओं को बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र पर माता-पिता के रूप में दर्ज होने की अनुमति दी।

अब हांगकांग में आगे की बहस हाेगी

हांगकांग की विधानसभा 10 सितंबर 2025 से इस पर बहस शुरू करने वाली है कि विदेशों में शादीशुदा समलैंगिक जोड़े क्या स्थानीय स्तर पर अपनी साझेदारी दर्ज करा सकेंगे। अगर बिल पास हुआ तो ऐसे जोड़ों को मेडिकल और उत्तराधिकार (after-death) संबंधी अधिकार मिलेंगे। लेकिन, इसे लेकर संसद में कड़ा विरोध भी है।

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