SC News: सुप्रीम कोर्ट ने एक हाईकोर्ट जज की आलोचना की है, जिन्होंने नियमित जमानत अर्जी को उस जज के पास भेजने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने पहले इसी एफआईआर में अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की थी।
चीफ जस्टिस के अधिकार पर हुई चर्चा
जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने इस रवैये को अनुचित ठहराते हुए कहा कि यह केवल संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का अधिकार है कि किसी मामले को किस बेंच को सौंपा जाए। अदालत ने कहा कि यदि इस तरह का कारण दर्ज किया जाए तो यह संदेश जाता है कि अगर रोस्टर न बदला होता तो मामला पहले वाले जज के पास भेजा जा सकता था, जो उचित नहीं है। बता दें कि मामले में हाईकोर्ट जज ने तर्क दिया था कि पहले वाले जज का रोस्टर बदल चुका है और वे उस समय डिवीजन बेंच में बैठ रहे थे।
शेखर प्रसाद महतो बनाम रजिस्ट्रार जनरल, झारखंड हाईकोर्ट का दिया गया हवाला
न्यायमूर्ति अमानुल्लाह द्वारा लिखे गए आदेश में कहा गया कि बेंच की वर्तमान संरचना या रोस्टर देखकर यह तय करना सही नहीं कि मामला ट्रांसफर किया जाए या नहीं। रजिस्ट्री भी तभी ऐसे आदेश पर अमल करेगी जब चीफ जस्टिस अनुमति दें। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने शेखर प्रसाद महतो बनाम रजिस्ट्रार जनरल, झारखंड हाईकोर्ट (7 फरवरी, 2024) के आदेश का हवाला दिया। उस आदेश में कहा गया था कि यदि रोस्टर बदल जाता है तो ज़मानत याचिकाओं को पहले वाले जज के पास भेजने के सामान्य नियम में ढील दी जा सकती है। हालांकि, मौजूदा बेंच ने स्पष्ट किया कि इससे किसी जज की यह शक्ति समाप्त नहीं होती कि वह मामले को पहले वाले जज के पास रेफर करे, लेकिन यह चीफ जस्टिस की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
यह है पूरा मामला व सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
पीठ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट में, अपीलकर्ता ने एकल न्यायाधीश से अनुरोध किया था कि वह मामले को पहले वाले न्यायाधीश के पास भेज दें, जिन्होंने अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, इस अनुरोध को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि पहले न्यायाधीश का रोस्टर बदल गया था और वह एक डिवीजन बेंच में बैठ रहे थे। इस दृष्टिकोण को अस्वीकार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, स्पष्ट तर्क के आधार पर स्थानांतरण की याचिका को खारिज करना कि विद्वान एकल न्यायाधीश का रोस्टर बदल गया था और उस तारीख को एक डिवीजन बेंच में बैठे थे, उचित नहीं था। ऐसे कारणों को दर्ज करने से यह धारणा बनती है कि अगर विद्वान न्यायाधीश (जिन्होंने अग्रिम जमानत आवेदनों को खारिज कर दिया) रोस्टर में बदलाव नहीं हुआ होता या उस तारीख को डिवीजन बेंच का हिस्सा नहीं होते, तो मामलों को उक्त न्यायाधीश को भेजा जा सकता था।
IN THE SUPREME COURT OF INDIA
CRIMINAL APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL APPEAL NO.4283 OF 2025
[@ SPECIAL LEAVE PETITION (CRIMINAL) NO.4971 OF 2025]
M/S NETSITY SYSTEMS PVT. LTD. …APPELLANT
VERSUS
THE STATE GOVT. OF NCT OF DELHI & ANR. …RESPONDENTS
R1: THE STATE GOVT. OF NCT OF DELHI
R2: DHARAM PAL SINGH RATHORE
WITH
CRIMINAL APPEAL NO.4284 OF 2025
[@ SPECIAL LEAVE PETITION (CRIMINAL) NO.7587 OF 2025]
M/S NETSITY SYSTEMS PVT. LTD. …APPELLANT
VERSUS
THE STATE NCT OF DELHI & ANR. …RESPONDENTS
R1: THE STATE NCT OF DELHI
R2: SHIKSHA RATHORE

