Media Reporting: दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग के तौर-तरीकों पर सख्त रुख अपनाया है।
सनसनी पैदा करने के लिए रिपोर्ट न दें: कोर्ट
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा, सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए कोर्ट की ‘साधारण या असंबंधित टिप्पणियां’ प्रकाशित करना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन गई है। हाल के समय में यह एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति बन गई है कि सुनवाई के दौरान कोर्ट की किसी भी साधारण टिप्पणी को, जो मामले से जुड़ी भी न हो, सनसनी पैदा करने के लिए रिपोर्ट किया जाता है।
मीडिया की जिम्मेदारी पर कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि मीडिया की यह जिम्मेदारी है कि वह न केवल सही जानकारी जनता तक पहुँचाए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करे कि किसी टिप्पणी को संदर्भ से हटाकर सनसनीखेज ढंग से प्रस्तुत न किया जाए। पत्रकारिता और रिपोर्टिंग के क्षेत्र में मीडिया को यह तय करने के लिए किसी न्यायालय से दिशा-निर्देश की जरूरत नहीं कि कौन-सी बातें रिपोर्टिंग योग्य हैं और कौन-सी नहीं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आई जो श्रवण गुप्ता ने दायर की थी। मामला अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से जुड़े PMLA केस से संबंधित था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि कुछ मीडिया संस्थानों ने 16 और 17 जुलाई को प्रकाशित खबरों में उनके वकील वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा के खिलाफ झूठी और मानहानिकारक रिपोर्टिंग की। रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि अदालत ने पाहवा की कार्यशैली को “सीनियर एडवोकेट के लिए अनुचित आचरण” बताया, जबकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई भी बयान रिकॉर्ड या आदेश का हिस्सा नहीं था।
जिन मीडिया संस्थानों का जिक्र हुआ
याचिका में जिन मीडिया हाउसों के नाम आए, वे थे — CNN-News18, The Tribune Group, The Times Group, Indian Express Ltd., CSR Journal और Law Trend (Rabhyaa-Rabhav Corp Pvt. Ltd.)
कोर्ट ने कहा, टिप्पणी का गलत मतलब निकाला गया
कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान वकीलों द्वारा बार-बार स्थगन (adjournment) लेने पर सामान्य टिप्पणी की गई थी, जो किसी व्यक्ति विशेष पर लक्षित नहीं थी। इसे यह दिखाने के लिए कि टिप्पणी विशेष रूप से वरिष्ठ अधिवक्ता पाहवा के खिलाफ थी — यह गलत और जानबूझकर किया गया प्रयास है, जिससे सिर्फ सनसनी फैलाई गई।
कोर्ट ने मीडिया से आत्म-समीक्षा की अपील की
याचिका का निपटारा करते हुए न्यायमूर्ति बंसल कृष्णा ने कहा, मीडिया हाउसों को जिम्मेदार रिपोर्टिंग करनी चाहिए। मीडिया रिपोर्ट्स का जनमानस पर गहरा असर होता है, खासकर तब जब आम जनता कानूनी बारीकियों से अनभिज्ञ होती है। यह उम्मीद की जाती है कि प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान स्वयं विचार करेंगे कि इस तरह की रिपोर्टिंग को अपने प्लेटफॉर्म्स पर जारी रखना उचित है या नहीं।

