Sunday, September 20, 2026
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 Judicial infra: अपने लिए घर बना रहे, न्यायिक ढांचा नहीं बना पा रहे”: पंजाब सरकार को फटकार

 Judicial infra: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की आप सरकार से कहा, राज्य सरकार न्यायपालिका के लिए जरूरी ढांचा तैयार नहीं कर रही।

न्यायिक मद में मिली केंद्र की राशि कहीं और खर्च कर दिए क्या

पंजाब की आप सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा, अपने लिए घर बना रहे हैं और केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि का भी ठीक से उपयोग नहीं कर रही। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से मिले बार-बार के निर्देशों के बावजूद बुनियादी न्यायिक अवसंरचना तक न बनाने पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि न्यायिक मद में मिली केंद्र की राशि कहीं और खर्च कर दी गई होगी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा

“अगर हम जांच का आदेश दें तो पता चल जाएगा कि केंद्र का अनुदान किसी और काम में खर्च कर चुके हैं। अपने लिए मकान बना रहे हैं, लेकिन अदालतें और न्यायिक ढांचा नहीं तैयार कर सकते।”

यह है मामला

मामला पंजाब सरकार द्वारा हाईकोर्ट के उन आदेशों को चुनौती देने का था जिनमें नवगठित मलेरकोटला जिले में न्यायिक ढांचा और न्यायिक अधिकारियों के लिए ट्रांजिट आवास उपलब्ध कराने को कहा गया था। पंजाब के महाधिवक्ता मनींद्रजीत सिंह बेदी ने बताया कि मलेरकोटला के लिए पद और बुनियादी सुविधाएँ तैयार की जा रही हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्य सरकार की ओर से कहा कि हाईकोर्ट की आलोचना अनुचित थी और मामला केवल मलेरकोटला में कोर्ट स्थापना तक सीमित था।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा

“आपको पता नहीं पंजाब में क्या हो रहा है। केंद्र से फंड मिल भी जाए, तो साइट तक आवंटित नहीं करते। और कई चीजों पर पैसे खर्च करने के लिए धन मौजूद है।”

पीठ ने नए जिलों के गठन पर भी सवाल उठाया

“मलेरकोटला को रेवेन्यू जिला क्यों बनाया? यह सिर्फ राजनीतिक तुष्टिकरण था। जब ढांचा बना ही नहीं, तो ऐसा क्यों किया? एसपी के लिए घर चाहिए, लेकिन सेशंस जज के लिए घर नहीं?” न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अदालतों की इमारतें अक्सर केंद्रीय योजनाओं पर निर्भर होती हैं, जबकि राज्यों का योगदान या तो देरी से आता है या कहीं और खप जाता है। उन्होंने न्यायपालिका के लिए राज्य और केंद्र, दोनों के बजट में न्यूनतम आवंटन तय करने की जरूरत बताई। वर्तमान में यह जीडीपी का एक प्रतिशत भी नहीं है।

अपील वापस लेने की अनुमति मांगी

अदालती माहौल भांपते हुए सिंघवी ने अपील वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा कि वे हाईकोर्ट में जाकर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करेंगे तथा समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध करेंगे। पीठ ने अनुमति देते हुए पंजाब सरकार को हाईकोर्ट जाने की छूट दे दी।सितंबर में देरी पर कड़ा रुख लेते हुए हाईकोर्ट ने इन भवनों को खाली कराकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश को आवास और जरूरत पड़ने पर कोर्टरूम के रूप में उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। इसी आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

अलग सेशंस डिविजन घोषित हाेने के बाद भी व्यवस्था नहीं

हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, मलेरकोटला जून 2021 में जिला, और अगस्त 2023 में अलग सेशंस डिविजन घोषित किया गया था, लेकिन स्थायी कोर्ट कक्ष या न्यायाधीशों के आवास अब तक नहीं बने। हाईकोर्ट ने अगस्त में आदेश दिया था कि दो अतिरिक्त कोर्टरूम बनाए जाएँ और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कब्जे में लिए गए कई भवनों — जैसे डीसी गेस्ट हाउस और एसएसपी का आवास — न्यायाधीशों को दिए जाने पर विचार किया जाए।

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